धान बेचकर रकम कम मिली? तौल और नमी की कटौती का हिसाब ऐसे मिलाकर देखें
धान की कटाई के बाद किसान सरकारी खरीद केंद्र या मंडी में फसल बेचता है और कुछ दिनों में रकम खाते में आ जाती है। कई बार किसान को लगता है कि जितनी फसल तौली थी, उसके हिसाब से रकम कम आई है। असल में तौल, नमी और सफाई जैसी वजहों से कटौती होना आम प्रक्रिया है, लेकिन कटौती सही हुई है या ज्यादा, यह जांचना हर किसान का हक है। इसके लिए सिर्फ तीन चीजें चाहिए — तौल पर्ची, बिक्री रसीद और थोड़ा सा ध्यान।
सबसे पहली कटौती तौल से जुड़ी होती है। कांटे पर तौली गई मात्रा और पर्ची पर दर्ज मात्रा में अंतर नहीं होना चाहिए। कुछ जगह बोरों के वजन के नाम पर भी छोटी कटौती होती है, जिसकी जानकारी नियमों के अनुसार पहले से दी जानी चाहिए। दूसरी बड़ी वजह नमी है। धान में तय सीमा से ज्यादा नमी होने पर सूखने के हिसाब से कटौती की जाती है, क्योंकि गीला धान भंडारण में खराब हो सकता है। तीसरी वजह सफाई से जुड़ी है — धान में मिट्टी, कंकड़, भूसा या खाली दाने ज्यादा हों तो उसके हिसाब से भी मात्रा घटाई जाती है।
ध्यान रहे कि ये कटौतियां केंद्र के नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए और उनकी जानकारी केंद्र पर लगी सूचना या बोर्ड पर उपलब्ध रहती है। कोई भी मनमानी या अतिरिक्त कटौती नियमों के खिलाफ है, इसलिए हर कटौती का कारण पूछना और समझना बेहद जरूरी है। रकम जिस दर से दी गई है, वह भी केंद्र पर बोर्ड पर लगी घोषित दर से मिलाकर देखनी चाहिए।
पर्ची और रसीद से ऐसे मिलाएं पूरा हिसाबफसल तौलवाते समय किसान को खुद कांटे के पास मौजूद रहना चाहिए और तौल पर्ची ध्यान से पढ़नी चाहिए। पर्ची पर कुल वजन, बोरों की संख्या और शुद्ध वजन साफ दर्ज होना चाहिए।
कई बार नमी या सफाई की कटौती रसीद पर अलग से दर्ज होती है। अगर कोई कटौती समझ में न आए या उसका आधार न बताया गया हो, तो बैंक खाते का विवरण और रसीद दोनों लेकर केंद्र प्रभारी से स्पष्ट हिसाब मांगें। यह सवाल पूछना आपका अधिकार है, कोई एहसान नहीं।
अगर केंद्र प्रभारी से संतोषजनक जवाब न मिले तो शिकायत का अगला रास्ता मंडी समिति और जिला आपूर्ति या कृषि कार्यालय है। कई राज्यों में किसान हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है। शिकायत के साथ तौल पर्ची, बिक्री रसीद और खाते का विवरण लगाना होता है, इसलिए ये कागज कम से कम सीजन खत्म होने तक संभालकर रखें। बिना कागजों के शिकायत कमजोर पड़ जाती है और हिसाब साबित करना कठिन हो जाता है।
अंत में सलाह है कि धान की दर, कटौती के नियम या शिकायत प्रक्रिया की कोई भी जानकारी अपने नजदीकी सरकारी खरीद केंद्र, मंडी समिति कार्यालय या जिला कृषि विभाग से पुष्टि करके ही आगे बढ़ें, क्योंकि नियम और व्यवस्था राज्य के अनुसार बदल सकते हैं।