Good News for Petrol: आम जनता को बड़ी राहत! कच्चे तेल की हलचल के बीच इन बड़े शहरों में घट गए पेट्रोल-डीजल के दाम
नई दिल्ली। आज महीने की 21 तारीख आ गई है और अगर आप भी अपनी गाड़ी लेकर पेट्रोल पंप की तरफ निकलने की तैयारी कर रहे हैं, तो रुकिए! घर से बाहर निकलने से पहले आज के पेट्रोल-डीजल की कीमतों का पूरा गणित समझ लेना आपके लिए बेहद जरूरी है। देश की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने आज के लिए पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं। आज का दिन देश के आम उपभोक्ताओं के लिए मिलाजुला साबित होने वाला है।
देश की राजधानी दिल्ली, कोलकाता, गुरुग्राम से लेकर बेंगलुरु तक के ग्राहकों के लिए आज सुबह तेल कंपनियों की तरफ से कोई नया सरप्राइज नहीं मिला है।
इन शहरों में कीमतें पूरी तरह से स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली वाले आज भी 98.64 रुपये प्रति लीटर के पुराने भाव पर ही पेट्रोल भरा सकते हैं, जबकि डीजल भी 91.58 रुपये पर टिका हुआ है। इसी तरह कोलकाता में पेट्रोल 109.70 रुपये, गुरुग्राम में 99.38 रुपये, और बेंगलुरु में 107.16 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है।लेकिन अगर आप चेन्नई, जयपुर या पटना के रहने वाले हैं, तो आपकी लॉटरी लग गई है। चेन्नई में पेट्रोल के दाम 35 पैसे टूटकर 104.57 रुपये पर आ गए हैं, जबकि डीजल भी 33 पैसे सस्ता हुआ है।
गुलाबी नगरी जयपुर में 30 पैसे की गिरावट के साथ पेट्रोल अब 108.70 रुपये का हो गया है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दाम मामूली 4 पैसे कम हुए हैं, जबकि डीजल 94.08 रुपये पर जस का तस बना हुआ है। इसके अलावा पटना, लखनऊ, चंडीगढ़ और हैदराबाद के लोगों को भी आज कीमतों में आई आंशिक गिरावट का सीधा फायदा मिला है। नोएडा से तिरुवनंतपुरम तक बढ़ गई ग्राहकों की टेंशन, जानिए क्यों अलग होते हैं दामएक तरफ जहां कई शहरों में दाम घटे हैं, वहीं दिल्ली से सटे नोएडा में आज तेल भरवाना महंगा हो गया है।
दरअसल, आपके मन में यह सवाल जरूर उठता होगा कि देश के हर राज्य और शहर में ईंधन की कीमतें इतनी अलग-अलग क्यों होती हैं? तो आपको बता दें कि यह पूरा खेल टैक्स का है।
अब बात करते हैं कि ग्लोबल मार्केट में क्या चल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आज फिर से हल्की तेजी देखने को मिली है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि तेल में यह नई तेजी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि ईरान के साथ उनकी बातचीत बिल्कुल अंतिम चरण में है। इस बयान से मार्केट को उम्मीद जगी है कि वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई आने वाले दिनों में काफी बेहतर हो जाएगी।
ग्लोबल मार्केट में लगातार महंगे होते क्रूड ऑयल के बावजूद भारत सरकार ने इसका सीधा झटका देश की आम जनता पर नहीं पड़ने दिया है। भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार 76 दिनों तक बढ़ती लागत का पूरा बोझ खुद अपने कंधों पर उठाया। इस वजह से इन कंपनियों को 24,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम ‘अंडर-रिकवरी’ नुकसान भी झेलना पड़ा।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने भी अपनी तरफ से एक्साइज ड्यूटी घटाकर कीमतों को नियंत्रण में रखने की हर संभव कोशिश की है। एक्साइज ड्यूटी कम करने के कारण सरकारी खजाने को करीब 30,000 करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं, घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस (LPG) के दामों को स्थिर रखने के चक्कर में कंपनियों को अलग से 40,000 करोड़ रुपये का घाटा सहना पड़ा है।