पेंशनर बैंक शाखा बदलना चाहते हैं? यह प्रक्रिया अपनाई तो पेंशन एक दिन भी नहीं रुकेगी

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रिटायरमेंट के बाद बहुत से पेंशनर बच्चों के पास दूसरे शहर रहने चले जाते हैं या अपने गांव लौट जाते हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि जिस बैंक शाखा से पेंशन आती है, उसे बदलवाने पर पेंशन कहीं रुक न जाए। अच्छी बात यह है कि बैंक शाखा बदलना अब एक साफ और तय प्रक्रिया है, बस सही क्रम में कदम उठाए जाएं। घबराहट की कोई बात नहीं है, पेंशन भुगतान आदेश यानी पीपीओ आपका अधिकार है, शाखा बदलने से पेंशन का हक खत्म नहीं होता, सिर्फ भुगतान का ठिकाना बदलता है।

इस लेख में हम वही सामान्य प्रक्रिया समझेंगे जो आमतौर पर अपनाई जाती है। ध्यान रहे कि बैंक और पेंशन वितरण व्यवस्था के हिसाब से कुछ चरणों में अंतर हो सकता है, इसलिए शुरू करने से पहले अपनी शाखा से पुष्टि जरूर कर लें।

शाखा बदलने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया

पहला कदम है अपनी वर्तमान शाखा में लिखित आवेदन देना, जिसमें नई शाखा का नाम, पता और यदि हो सके तो उसका विवरण साफ लिखा हो। यदि नई शाखा उसी बैंक की है तो प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान और तेज होती है, क्योंकि खाता और पीपीओ उसी बैंक के तंत्र में आगे बढ़ता है।

बैंक आपकी पेंशन फाइल और पीपीओ से जुड़े दस्तावेज संबंधित भुगतान प्राधिकरण के माध्यम से नई शाखा को भेजता है। केंद्र सरकार के पेंशनरों के मामले में केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय की भूमिका भी प्रक्रिया में आती है। दूसरा कदम है नई शाखा में खाता खोलना या मौजूदा खाते को सक्रिय रखना और अपनी पहचान व पते से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी अद्यतन कराना। आवेदन की एक प्रति और बैंक की पावती अपने पास संभालकर रखें, ताकि बाद में स्थिति पूछनी हो तो संदर्भ नंबर काम आए।

पेंशन रुकने से बचने के लिए ये सावधानियां

सबसे पहली सावधानी यह है कि पुराना खाता तब तक बंद न करें, जब तक नई शाखा से पहली पेंशन आ न जाए। कई बार स्थानांतरण में कुछ सप्ताह लग जाते हैं और बीच में पेंशन पुराने खाते में ही आती है। दूसरी बात, जीवित प्रमाण यानी जीवन प्रमाण पत्र देने के वार्षिक चक्र पर शाखा बदलने का कोई असर नहीं पड़ता, आप पहले की तरह निर्धारित समय पर जीवन प्रमाण दे सकते हैं और डिजिटल जीवन प्रमाण की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। बस नई शाखा को अपने आगमन की जानकारी देकर रिकॉर्ड अद्यतन करा लें। तीसरी सावधानी, स्थानांतरण की योजना महीने के बीच में ऐसे समय बनाएं जब पेंशन आने की तारीख आसपास न हो, इससे उलझन कम होती है।
सारी जानकारी लिखित में लेना और हर चरण की तारीख नोट करना हमेशा फायदेमंद रहता है।

देरी हो जाए तो कहां करें शिकायत

यदि तय समय से ज्यादा देरी हो जाए तो पहले दोनों शाखाओं, पुरानी और नई, से लिखित में स्थिति पूछें। समस्या फिर भी न सुलझे तो बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय या बैंक की शिकायत व्यवस्था का सहारा लें। पेंशन से जुड़ी शिकायतों के लिए सरकार का केंद्रीकृत शिकायत पोर्टल भी उपलब्ध है, जहां ऑनलाइन शिकायत दर्ज करके उसकी स्थिति देखी जा सकती है। शिकायत करते समय आवेदन की तारीख, पावती और पीपीओ नंबर साथ रखें।

अंत में यही सलाह है कि प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपनी शाखा के पेंशन डेस्क से पूरी जानकारी लिखित या स्पष्ट रूप में ले लें, क्योंकि हर बैंक की आंतरिक व्यवस्था में थोड़ा अंतर संभव है।