दिवाली से पहले पुराना सोना बदलना है? ज्वैलर के पास जाने से पहले ये नियम जान लीजिए

Newspoint

त्योहारी सीजन में सोने की चमक बढ़ जाती है और बहुत से लोग पुराने गहने बदलकर नए डिजाइन लेना चाहते हैं — लेकिन ज्वैलर की दुकान पर पहुंचने से पहले अगर कुछ जरूरी नियम न पता हों, तो अच्छा-खासा नुकसान हो सकता है। दरअसल, पुराने सोने की असली कीमत उसके वजन और शुद्धता के बारीक हिसाब पर तय होती है, जिसे इंटरनेट पर लोग old gold exchange rules india के नाम से भी खोज रहे हैं।

पुराने सोने को बदलते वक्त असली खेल उसकी शुद्धता और वजन के इर्द-गिर्द ही घूमता है।

Hero Image
दुकानों में 14, 18 और 22 कैरेट — यानी अलग-अलग प्योरिटी वाला सोना बिकता है। भारतीय मानक ब्यूरो के मुताबिक, हॉलमार्क का निशान ही खराब क्वालिटी से बचाने का सबसे भरोसेमंद तरीका है। असली हॉलमार्क वाले गहने पर HUID — यानी छह अक्षर-अंकों वाला एक खास कोड — अंकित होता है, जिसे ‘BIS Care’ ऐप पर कोई भी खुद जांच सकता है।

भारत में सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य है, और नए नियमों के बाद बिना HUID वाले पुराने गहनों की जांच करवाना और भी जरूरी हो गया है। बहुत से घरों में दशकों पुराने गहने रखे होते हैं, जिन पर हॉलमार्क नहीं होता — ऐसे में एक्सचेंज से पहले शुद्धता की पुष्टि करवाना समझदारी है।

कुल वजन ही शुद्ध वजन नहीं होता, पहले ये हिसाब समझिए

एक बात जो अक्सर लोग भूल जाते हैं — तराजू पर दिखा कुल वजन ही सोने का असली वजन नहीं होता। बहुत से गहनों में हीरे-मोती जैसे पत्थर या दूसरी धातुएं जड़ी होती हैं; इन्हें अलग करने के बाद ही पता चलता है कि गहने में सोना दरअसल कितना है। अपने पुराने गहनों की प्योरिटी को लेकर अगर कोई संदेह है, तो BIS से मान्यता प्राप्त असेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर में एक तय फीस देकर जांच करवाई जा सकती है, जहां से लिखित रिपोर्ट भी मिलती है।

पुराना सोना बदलते वक्त दुकान के बोर्ड पर लिखा भाव सिर्फ एक शुरुआती अंदाजा होता है।

आपके हाथ में आने वाली असली रकम इस बात पर निर्भर करती है कि गहने में शुद्ध सोना कितना है और उस दुकानदार के अपने नियम क्या हैं।

मेकिंग चार्ज वापस नहीं मिलता, पुराना बिल जरूर साथ रखें

एक और जरूरी बात — गहना खरीदते समय बनवाई के नाम पर जो मेकिंग चार्ज चुकाया था, वो एक्सचेंज की कीमत में शामिल नहीं होता; यानी वो रकम वापस नहीं मिलेगी। इसलिए दुकान पर जाने से पहले खरीद का पुराना बिल या इनवॉइस संभालकर साथ रखें। ये बिल इस बात का सबूत होता है कि गहना किस दुकान से और किस कीमत पर लिया गया था, और इससे सौदेबाजी में भी मदद मिलती है।

एक और बात — हर दुकानदार के एक्सचेंज के नियम एक जैसे नहीं होते। कोई पुराने गहनों पर ज्यादा कटौती करता है, कोई कम; कोई दूसरी दुकान का सोना नहीं लेता, तो कोई ले लेता है। इसलिए एक ही दुकान पर भरोसा करने से पहले 2-3 जगह भाव जरूर पूछ लें। अगर आप सोना बेचकर नकद लेना चाहते हैं बजाय एक्सचेंज के, तो आमतौर पर एक्सचेंज में बेहतर वैल्यू मिलती है, क्योंकि नकद बिक्री पर ज्वैलर ज्यादा कटौती करता है।

डील फाइनल करने से पहले ज्वैलर से ये सवाल जरूर पूछें

डील पक्की करने से पहले दुकानदार से साफ-साफ ये पूछें: क्या एक्सचेंज के लिए खरीद का मूल बिल दिखाना जरूरी है? क्या वो ऐसी ज्वैलरी भी लेगा जो किसी दूसरी दुकान से खरीदी गई हो? और क्या एक्सचेंज में कोई अतिरिक्त या छिपी कटौती तो नहीं लगाई जा रही?

इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही फैसला करें। याद रखें, पुराने गहनों के बदले वाजिब दाम पाने का सबसे सीधा तरीका यही है — शुद्धता की जांच, सही वजन का हिसाब, बिल की मौजूदगी और दुकानदार की शर्तों की साफ जानकारी। त्योहारी सीजन में जल्दबाजी में की गई डील अक्सर पछतावे में बदल जाती है, इसलिए थोड़ा समय निकालकर पूरी जानकारी के साथ ही दुकान पर जाएं।