Gold-Silver Price Fall: सोना-चांदी खरीदने वालों की निकल पड़ी! एक झटके में ₹11,700 से ज्यादा गिरे दाम
भारतीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार का दिन निवेशकों और आम खरीदारों के लिए बड़ी हलचल लेकर आया है। सोने और चांदी की कीमतों में आज ऐसी गिरावट देखी गई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। दोनों कीमती धातुओं के दाम में ₹11,700 तक की भारी और चिंताजनक कमी आई है। बाजार में इस जोरदार गिरावट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत को माना जा रहा है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर धातुओं की कीमतों में गिरावट का यह दौर लगातार बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है, जिससे भारतीय निवेशकों के बीच चिंता का माहौल है। जानकारों का कहना है कि दुनिया भर में डॉलर के मजबूत होने से सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ रही है। विशेषज्ञ इसे कमोडिटी बाजार में आने वाले एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
सोने की कीमतों में दिखी सुस्तीसोने के भाव में आज काफी नरमी दर्ज की गई है।
MCX पर 05 जून 2026 के सोने का कॉन्ट्रैक्ट ₹1,60,790 पर खुला, जो पिछले बंद भाव ₹1,61,978 के मुकाबले ₹1,188 सस्ता था। दिन के दौरान सोना ₹1,60,355 के निचले स्तर तक भी गिरा। खबर लिखे जाने तक सोना लगभग 0.89% यानी ₹1,438 की गिरावट के साथ ₹1,60,540 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। चांदी के भाव धड़ाम, ₹11,000 से ज्यादा की गिरावटचांदी की बात करें तो यहाँ गिरावट और भी भयानक है। 3 जुलाई 2026 के चांदी कॉन्ट्रैक्ट में भारी कमजोरी आई है। यह ₹2,91,102 की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले सीधे ₹11,102 (3.81%) गिरकर ₹2,80,000 पर खुला।
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी सोने-चांदी को बड़ा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 1.54% गिरकर 4,615 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है, जबकि चांदी 4.47% की भारी गिरावट के साथ 81.49 डॉलर प्रति औंस पर पहुँच गई। डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती ने बड़े निवेशकों में निराशा भर दी है।
कीमतों में इस बड़ी गिरावट का सबसे मुख्य कारण ‘डॉलर इंडेक्स’ का बढ़ना है। डॉलर इंडेक्स फिलहाल 0.23% बढ़कर 98.955 के स्तर पर है, जो पिछले पांच हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर है। यह इंडेक्स दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाता है। जब-जब डॉलर मजबूत होता है, तब-तब सोने और चांदी जैसी धातुओं पर दबाव बढ़ता है और कीमतें गिरने लगती हैं।