खुशखबरी: भारत को मिला सोने का 'महा-खजाना', अगले महीने से होगी डॉलर की बारिश
नई दिल्ली: भारत में सोने की चमक किसे नहीं भाती? हमारी शादियों से लेकर निवेश तक, सोना हमेशा से भारतीयों की पहली पसंद रहा है। फिलहाल भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा खरीदार है और हम हर साल विदेशों से करीब 800 टन से भी ज्यादा सोना मंगाते हैं। लेकिन अब इस निर्भरता को खत्म करने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे देश को जोश से भर दिया है।
आंध्र प्रदेश के कर्नूल में भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खदान यानी ‘जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट’
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नूल के जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पागिदिरायी गांवों के पास करीब 598 हेक्टेयर इलाके में सोने का विशाल भंडार छिपा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां करीब 13.1 टन प्रमाणित सोना है, जिसके 42.5 टन तक पहुंचने की पूरी संभावना है। जब यह खदान अपनी पूरी क्षमता से काम करना शुरू करेगी, तो यहां से हर साल 1,000 किलो शुद्ध सोना निकाला जा सकेगा। सबसे खास बात यह है कि अगले 15 सालों तक यहां से लगातार सोना निकलता रहेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
400 करोड़ का निवेश और आधुनिक तकनीकइस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने के लिए 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया गया है। इसे त्रिवेणी अर्थमूवर्स और डेक्कन गोल्ड जैसी बड़ी कंपनियों का साथ मिला है। हालांकि, भारत की 800 टन की सालाना जरूरत के मुकाबले यह उत्पादन कम लग सकता है, लेकिन सरकारी खदानों जैसे ‘हुट्टी गोल्ड माइंस’ की तुलना में यह बहुत बड़ा कदम है। बता दें कि कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF) साल 2000 में ही बंद हो चुकी है, ऐसे में प्राइवेट सेक्टर का यह प्रयास भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
रिकॉर्ड समय में तैयार हुआ प्लांटहैरानी की बात यह है कि इस विशाल प्रोसेसिंग प्लांट को महज 13 महीनों के रिकॉर्ड समय में तैयार कर लिया गया है। खदान में इन दिनों आधुनिक मशीनों और नियंत्रित धमाकों के साथ काम जोरों पर है। कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल भारत को सोना देगा, बल्कि भविष्य में अन्य कीमती खनिजों के खनन के लिए भी निजी कंपनियों के लिए दरवाजे खोल देगा। अब भारत को सोने के लिए सिर्फ विदेशों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा।