Crude Oil Crash: एक महीने में 23% सस्ता हुआ कच्चा तेल, जानिए अब आपके शहर में कब घटेगा पेट्रोल-डीजल का दाम

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अंतरराष्ट्रीय और विदेशी बाजारों में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में लगातार बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. मंगलवार को भी वैश्विक बाजार बंद होने के बाद कच्चे तेल के दाम करीब एक फीसदी की कमजोरी के साथ बंद हुए थे. अगर बीते महज एक महीने के कारोबारी आंकड़ों पर नजर डालें तो कच्चे तेल की कीमतों में 23 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है.

इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि देश में आखिरी बार जब पेट्रोल-डीजल यानी फ्यूल के दामों में बढ़ोतरी की गई थी, तब से लेकर अब तक खाड़ी देशों और अमेरिकी क्रूड के दाम में 20 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा की बड़ी गिरावट आ चुकी है.

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रॉयटर्स (Reuters) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 4 महीने के सबसे निचले स्तर (लोअर लेवल) पर आ गई हैं. यह इस बात का संकेत है कि कीमतें अब प्री-वॉर लेवल (युद्ध से पहले के स्तर) के बेहद करीब पहुंच रही हैं, जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था (ग्लोबल इकोनॉमी) के लिए बहुत ही शुभ और अच्छा संकेत माना जा रहा है.

वास्तव में देखा जाए तो पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भारी भू-राजनीतिक तनाव काफी हद तक कम हुआ है.

अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरान को अगले दो महीने तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कच्चा तेल बेचने के लिए विशेष लाइसेंस (प्रतिबंधों में ढील) दे दिया है. इसके साथ ही दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग यानी होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के भी पूरी तरह से सुचारू रूप से खुलने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं. इसके अलावा, खाड़ी के अन्य प्रमुख देशों ने भी बाजार में तेल की सप्लाई और प्रोडक्शन (उत्पादन) बढ़ाने पर अपनी आपसी सहमति जताई है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मंदी के रूप में साफ देखने को मिल रहा है.

हालांकि, बाजार के बड़े जानकार और विशेषज्ञ इसे फिलहाल एक फौरी राहत मानकर चल रहे हैं. उनका कहना है कि ईरान और यूएस के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत में अभी भी कुछ अहम प्वाइंट्स ऐसे फंसे हुए हैं, जिनपर अनिश्चिता के काफी गहरे बादल मंडरा रहे हैं. आइए आपको विस्तार से समझाते हैं कि आखिर कच्चे तेल की कीमतों के ताजा आंकड़े इस समय किस तरह की कहानी बयां कर रहे हैं.

एक महीने में 23 फीसदी तक टूटा कच्चा तेल

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में बीते करीब एक महीने के दौरान 23 फीसदी की जोरदार गिरावट दर्ज की गई है.

अगर सरकारी और कारोबारी आंकड़ों को देखें तो खाड़ी देशों के कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम बीते 26 मई को 99.58 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गए थे, जो कि अब भारी गिरावट के साथ 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से भी नीचे आ चुके हैं. 24 जून को कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमत फिसलकर 75.97 डॉलर प्रति बैरल पर देखी गई.

इसका मतलब यह हुआ कि इस तय अवधि के दौरान कच्चे तेल की कीमत में 23.61 डॉलर प्रति बैरल की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड आखिरी बार 2 मार्च को 75.75 के स्तर पर दिखाई दिया था, जिससे साफ है कि कीमतें अब करीब 4 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं.

दूसरी ओर, अमेरिकी क्रूड यानी डब्ल्यूटीआई (WTI) के दामों में भी इस दौरान बहुत बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अगर बात 24 जून के कारोबारी सत्र की करें तो अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत में 0.57 फीसदी की दैनिक गिरावट देखने को मिल रही है और यह 72.73 डॉलर पर पहुंच गया है, जबकि आज के लाइव ट्रेडिंग सेशन के दौरान यह एक समय फिसलकर 72.36 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक भी चला गया था.

इसके विपरीत, पिछले महीने 26 मई को इसी अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 93.89 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई थी. तब से लेकर अब तक अमेरिकी क्रूड के दाम में भी लगभग 23 फीसदी की भारी कटौती देखी जा चुकी है.

इससे पहले 3 मार्च को अमेरिकी तेल 70 डॉलर के स्तर के आसपास दिखाई दिया था, जिससे स्पष्ट है कि डब्ल्यूटीआई भी इस समय अपने 4 महीने के सबसे निचले पायदान पर ट्रेड कर रहा है.

आखिर क्यों अचानक आई कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट?

सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच हुई शुरुआती शांति वार्ता के बाद, अमेरिका की तरफ से ईरान को 60 दिनों के लिए आर्थिक प्रतिबंधों में बड़ी छूट मिलने और लेबनान में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत युद्ध व लड़ाई में कमी आने की खबरों से बाजार का सेंटिमेंट बदला.

इन खबरों के आते ही कीमतों में एक ही दिन में 3% की भारी गिरावट आई और मंदी का यह रुख लगातार जारी है.

मंगलवार को ओमान और ईरान के शीर्ष अधिकारियों के बीच होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन (जहाजों के आवागमन) के फ्यूचर मैनेजमेंट को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति बनी. इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ होने वाले किसी भी अंतिम समझौते के तहत ईरान इस बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग (होर्मुज स्ट्रेट) से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का टोल टैक्स नहीं वसूल पाएगा, क्योंकि ऐसी कोई भी व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पूरी तरह से उल्लंघन मानी जाएगी.

विदित हो कि ईरान वॉर के कारण यह स्ट्रेट (जो पूरी दुनिया की कुल तेल और एलएनजी आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है) पिछले तीन महीने से भी अधिक समय तक पूरी तरह बंद रहा था, जिससे दुनिया को लाखों बैरल तेल और गैस की आपूर्ति का भारी नुकसान उठाना पड़ा था. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे खराब स्थिति के दौरान वैश्विक बाजार में प्रति दिन 14 मिलियन बैरल (bpd) से अधिक का तेल उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया था, जो दुनिया की कुल तेल मांग का लगभग 14 फीसदी हिस्सा है.

अब दुनिया भर के बड़े निवेशक और तेल व्यापारी बेहद सावधानी के साथ इस बात पर नजर रख रहे हैं कि युद्ध से हुए इस भारी नुकसान के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के बड़े तेल उत्पादक देश कितनी जल्दी अपने तेल उत्पादन और निर्यात को दोबारा पूरी क्षमता से शुरू कर पाते हैं, और क्या इस अशांत क्षेत्र में अब और अधिक व्यापारिक जहाज आएंगे.

ईरान के एक सैन्य सूत्र ने फार्स समाचार एजेंसी को गोपनीय जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नेवी के साथ कड़े समन्वय के तहत अब हर दिन सीमित संख्या में अंतरराष्ट्रीय जहाजों को इस स्ट्रेट से शांतिपूर्वक गुजरने की अनुमति दी जा रही है.

इसके अलावा, आधुनिक जहाज-ट्रैकिंग डेटा से यह साफ पता चला है कि मंगलवार को खाड़ी में फंसे तीन बड़े सुपरटैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट से गुजरे हैं, जबकि हाल के हफ्तों में कतर से जुड़े सात पूरी तरह खाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर भी इसमें प्रवेश कर चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र (UN) की शिपिंग एजेंसी ने भी इस पर राहत जताते हुए कहा कि अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते के लागू होने के बाद खाड़ी के समुद्री इलाके में फंसे 11,000 नाविकों वाले सैकड़ों मालवाहक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें स्ट्रेट से गुजारने में सक्षम बनाने के लिए एक विस्तृत निकासी योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद ट्वीट कर कहा कि सोमवार को अकेले इस स्ट्रेट से रिकॉर्ड 19 मिलियन बैरल तेल सुरक्षित बाहर निकला है.

उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में वैश्विक बाजार में तेल की गिरती कीमतों की ओर इशारा करते हुए अपनी पीठ थपथपाई. फिर भी, SEB रिसर्च के बाजार विश्लेषक ओले ह्वाल्बी का मानना है कि अल्पावधि (शॉर्ट टर्म) में, प्रतिबंधों में मिली इस ढील का कीमतों पर बहुत ज्यादा स्थायी असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ यह समझौता ज्ञापन (MoU) अभी बेहद नया और बहुत नाजुक है.

स्ट्रेट में बिछी बारूदी सुरंगें अभी भी बनी हैं बड़ी बाधा

PVM ऑयल एसोसिएट्स के मुख्य विश्लेषक टामस वर्गा ने बाजार की चिंताओं को सामने रखते हुए कहा कि बड़े जहाज मालिकों और ऑपरेटरों को सबसे पहले इस बात का पक्का भरोसा चाहिए कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Landmines) से होने वाले सुरक्षा खतरे अब पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं.

युद्ध के कारण क्षतिग्रस्त हुए बंदरगाह, पानी में तैर रहा मलबा और बंदरगाहों पर मची भारी भीड़भाड़, समुद्री ट्रैफिक को बिना किसी शर्त के सामान्य रूप से बढ़ाने में अतिरिक्त तकनीकी बाधाएं पैदा कर रहे हैं.

इराक के दो वरिष्ठ तेल अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि खाड़ी के एक्सपोर्ट टर्मिनल पर विदेशी टैंकरों की लगी लंबी कतार को देखते हुए इराक ने अपने दक्षिणी तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर अब लगभग 2.1 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) के स्तर पर पहुंचा दिया है.

दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में तेल की यह सप्लाई में बढ़ोतरी हर जगह एक जैसी नहीं देखी गई.

जॉइंट ऑर्गनाइजेशन्स डेटा इनिशिएटिव (JODI) द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, ओपेक (OPEC) के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब में अप्रैल के महीने में लगातार दूसरे महीने कच्चे तेल का एक्सपोर्ट गिरकर अपने ऐतिहासिक और रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है.

रॉयटर्स के शुरुआती सर्वे और समीक्षा से यह भी पता चला है कि पिछले हफ्ते अमेरिका के घरेलू बाजारों में कच्चे तेल, गैसोलीन और डीजल के कुल स्टॉक में काफी कमी दर्ज की गई है. यह कमी तब सामने आई है जब पिछले हफ्ते ही अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने आधिकारिक तौर पर कहा था कि अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में कच्चे तेल का कुल आपातकालीन स्टॉक जून 1983 के बाद से यानी पिछले कई दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर आ चुका है.

एनर्जी कंसल्टेंसी फर्म गेल्बर एंड एसोसिएट्स ने अपने एक विश्लेषणात्मक नोट में लिखा है कि हालांकि बड़े सटोरियों द्वारा अपनी ‘लॉन्ग पोजीशन’ को तेजी से बाजार में खत्म (स्क्वायर ऑफ) करने से तेल की कीमतें अपने पिछले रिकॉर्ड ऊंचे स्तर से काफी नीचे आ गई हैं, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व का ऐतिहासिक रूप से इस बेहद कम स्तर पर होना आने वाले हफ्तों में बाजार की कीमतों को एक मजबूत निचला आधार (स्ट्रक्चरल फ्लोर) प्रदान करेगा, जिससे कीमतें एक सीमा से नीचे नहीं गिरेंगी.

भारत में आम जनता के लिए कब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस ऐतिहासिक और भारी गिरावट के बाद अब देश के घरेलू बाजार में यह बड़ा सवाल तेजी से उठने लगा है कि आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी कब देखने को मिलेगी. देश के लिहाज से सबसे खास बात तो यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह वैश्विक कमी भारत में ठीक पिछले महीने यानी मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में घरेलू स्तर पर करीब 7.5 फीसदी की भारी बढ़ोतरी करने के बाद आई है.

देश की सरकारी तेल कंपनियों ने बीते 25 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में आखिरी बार बड़ा इजाफा किया था.

उसके बाद से कंपनियों की ओर से घरेलू स्तर पर फ्यूल की कीमतों पर पूरी तरह से ‘फ्रीज बटन’ दबाया हुआ है यानी दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. काफी सालों के लंबे अंतराल के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम 100 रुपए प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गए थे. ऐसे में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी कमी के बाद अब देश भर में फ्यूल की कीमतों को घटाने की मांग और आवाजें तेजी से उठने लगी हैं.

बाजार के जानकारों और आर्थिक विशेषज्ञों की मानें तो देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ी कटौती तब तक देखने को नहीं मिलेगी, जब तक कि देश की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों को पिछले महीनों में हुए भारी नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो जाती.

हाल ही में केंद्रीय पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी का भी इस पर एक बड़ा आधिकारिक बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि देश की रिफाइनरीज में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार से कम कीमत वाला सस्ता कच्चा तेल वास्तव में आने लगेगा और कंपनियों का बहीखाता सुधरेगा, उसके तुरंत बाद आम लोगों को इसका पूरा लाभ (राहत) ट्रांसफर कर दिया जाएगा.

जानिए देश के प्रमुख महानगरों में आज क्या हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?

वैसे अगर देखा जाए तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में पिछले करीब 30 दिनों से कोई भी नया इजाफा देखने को नहीं मिला है.