खुशखबरी: जंग के बीच होर्मुज से आई बड़ी राहत! एक हफ्ते में गुजरे 55 जहाज, क्या अब सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?

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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद से पूरी दुनिया के बाजारों में तेल और गैस के बढ़ते दामों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की वजह से भारत में भी लगातार ईंधन के दाम आम आदमी की जेब ढीली कर रहे हैं।

लेकिन इसी बीच दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइफलाइन यानी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से एक बहुत ही बड़ी और राहत भरी खुशखबरी सामने आई है।

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इस रास्ते से पिछले एक हफ्ते के भीतर जहाजों की एक बहुत बड़ी संख्या गुजरी है, जिसने वैश्विक बाजारों को थोड़ी राहत दी है। शिपिंग पर नजर रखने वाली मशहूर कंपनी ‘केपलर’ के शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या में एक बार फिर शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। समुद्री निगरानी रखने वाली एजेंसी के ताजा आंकड़ों से पता चला है कि 11 मई से 17 मई के बीच हर सप्ताह लगभग 55 बड़े मालवाहक जहाज इस बेहद संवेदनशील रास्ते से सुरक्षित गुजरे हैं। आपको बता दें कि इससे पहले जब युद्ध चरम पर था, तब सुरक्षा कारणों से यह संख्या घटकर महज 19 जहाज प्रति सप्ताह रह गई थी, जो दोनों देशों के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद का सबसे निचला और डरावना स्तर था।

दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए हमलों के बाद इस पूरे क्षेत्र में युद्ध का तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके कड़े जवाब में ईरान ने अपनी ताकत दिखाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। ईरान के इस कदम से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस के बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई थी। जहाजों की आवाजाही अचानक ठप होने से पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति (एनर्जी सप्लाई) ठप होने की चिंता सताने लगी थी। लेकिन अब सामने आए ताजा और सकारात्मक आंकड़े यह साफ संकेत दे रहे हैं कि समंदर में जहाजों का ट्रैफिक धीरे-धीरे अपनी पुरानी और सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है।

ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, वहां के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हाल के दिनों में अपनी नीतियों में थोड़ी ढील देते हुए अधिक संख्या में व्यापारिक जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति प्रदान की है।

हालात पूरी तरह सामान्य तो नहीं, पर पहले से काफी बेहतर

केपलर की रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि पिछले सप्ताह की शुरुआत में एक ही दिन के भीतर रिकॉर्ड 30 से ज्यादा जहाजों को इस रास्ते से निकलने की हरी झंडी दी गई थी। हालांकि, ईरान के बड़े प्रशासनिक अधिकारियों का अब भी यही कहना है कि क्षेत्र में हालात अभी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं।

युद्ध से पहले व्यापार की जो रफ्तार थी, उस पुरानी स्थिति को दोबारा लौटने में अभी थोड़ा और समय लग सकता है।

केपलर के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह इस रूट का इस्तेमाल करने वाले 55 जहाजों में अलग-अलग प्रकार के कार्गो और मालवाहक पोत शामिल थे। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से लगभग आधे यानी आधे से थोड़े कम जहाज केवल कच्चे तेल और अन्य लिक्विड पेट्रोलियम पदार्थ ले जाने वाले बड़े टैंकर थे। इनमें से तीन विशालकाय क्रूड ऑयल टैंकर सीधे चीन, ओमान और जापान की तरफ अपनी मंजिल के लिए रवाना हुए थे।

इसके अलावा, इस रास्ते से 15 ड्राई बल्क (ठोस माल ढोने वाले) जहाज और 16 एलपीजी (LPG) टैंकर भी पूरी सुरक्षा के साथ आगे बढ़ गए।

इस दौरान एलएनजी यानी लिक्विड नेचुरल गैस लेकर जाने वाला केवल एक बड़ा जहाज कतर से रवाना होकर पाकिस्तान की ओर गया। यह एलएनजी जहाज बीती 12 मई को होर्मुज के रास्ते से होकर गुजरा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब से यह सैन्य संघर्ष शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक इस बेहद खतरनाक बन चुके रास्ते से सिर्फ 8 एलएनजी जहाज ही अपनी जान बचाकर गुजर पाए हैं। अगर 1 मार्च से अब तक के कुल आंकड़ों पर नजर डालें, तो कुल 663 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं।

आम और सामान्य दिनों में पूरी दुनिया की कुल जरूरत का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और एलएनजी की सप्लाई इसी एकमात्र समुद्री रास्ते के भरोसे होती है।

जहाजों से मोटा टोल टैक्स वसूलने की फिराक में ईरान

समंदर में बढ़ती इस हलचल के बीच ईरान ने एक नया दांव खेल दिया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी सैन्य निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण को और ज्यादा मजबूत करने के लिए एक बिल्कुल नई संस्था (अथॉरिटी) बनाने का बड़ा एलान किया है। इस नई सरकारी संस्था का मुख्य काम इस रास्ते से गुजरने वाले विदेशी जहाजों के संचालन को देखना और उनसे एक तय शुल्क (टोल टैक्स) की वसूली करना होगा।

इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद ईरान होर्मुज से गुजरने वाले हर एक छोटे-बड़े जहाज पर ‘रीयल टाइम’ यानी पल-पल की डिजिटल निगरानी रख सकेगा।

ईरान के इस नए एलान से वैश्विक शिपिंग बाजारों और बड़ी कंपनियों में अनिश्चितता और डर का माहौल एक बार फिर बढ़ गया है। इस मामले पर ईरान का तर्क है कि वह इस कदम के जरिए समंदर में एक बेहतर व्यापारिक व्यवस्था बनाना चाहता है। इसके विपरीत, दुनिया के कई बड़े और विकसित देशों का साफ मानना है कि ईरान इस टैक्स और नई संस्था के बहाने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज के पूरे रास्ते पर अपना एकाधिकार और पूरा कब्जा जमाना चाहता है।

वहीं दूसरी ओर, वैश्विक तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के राजनयिकों के बीच चल रही पर्दे के पीछे की बातचीत अब तक किसी बड़े या ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है, जिससे सस्पेंस बरकरार है।