अक्टूबर में क्रेडिट कार्ड से जमकर खरीदारी कर डाली? बिल आने से पहले इतना पैसा अलग रख लें

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अक्टूबर त्योहारों का महीना रहा — उपहार, नए कपड़े, घर की सजावट और घूमने-फिरने का खर्च। इनमें से काफी खरीदारी क्रेडिट कार्ड से हुई होगी, क्योंकि पैसा उस समय जेब से जाता महसूस नहीं होता। असली झटका तब लगता है जब नवंबर में बिल आता है और रकम उम्मीद से कहीं ज्यादा निकलती है। अगर आप आज, 31 अक्टूबर को ही अपने कार्ड के पूरे बकाये का हिसाब बनाकर पैसा अलग रख लें, तो बिल की तारीख पर न घबराहट होगी और न ही भारी ब्याज देना पड़ेगा।

पहले पूरे बकाये का सही हिसाब निकालें

सबसे पहले अपने बैंक के मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग में जाकर कार्ड का कुल बकाया देखें। सिर्फ पिछले बिल की रकम पर मत रहिए — उसके बाद की गई खरीदारी, किस्तों में बदली रकम और कोई नकद निकासी भी जुड़ चुकी होगी। सारी रकम जोड़कर एक आंकड़ा बनाएं और उतनी ही राशि अपने बचत या वेतन खाते में अलग रख दें, जैसे वह पैसा खर्च हो चुका हो। अगर पूरी रकम एक साथ जुटाना मुश्किल लगे तो नवंबर की सैलरी से पहला हिस्सा और घर के अन्य खर्च घटाकर बचने वाली राशि का हिसाब लगाएं। जब तक पुराना बकाया साफ न हो, कार्ड से नई गैर-जरूरी खरीदारी रोक देना ही समझदारी है, वरना कर्ज का पहाड़ बढ़ता ही जाएगा।

एक आम गलती लोग यह करते हैं कि बिल आने पर सिर्फ न्यूनतम देय राशि भर देते हैं। बैंक यह सुविधा इसलिए देता है ताकि आप चूककर्ता न कहलाएं, लेकिन बची हुई रकम पर ब्याज और शुल्क जुड़ता रहता है और कर्ज महीनों तक खत्म नहीं होता। यह ब्याज आमतौर पर काफी ऊंचा होता है, इसलिए न्यूनतम राशि को पूरी चुकौती समझना सबसे महंगी भूल साबित होती है।

भुगतान की तारीख और किस्त का फैसला सोचकर लें

अपने बिल की अंतिम तारीख कैलेंडर में अलग से नोट कर लें और कोशिश करें कि भुगतान तारीख से दो-तीन दिन पहले ही हो जाए, ताकि तकनीकी देरी से विलंब शुल्क न लगे।

अगर रकम बहुत बड़ी है और एक साथ चुकाना संभव नहीं, तो बैंक किस्त में बदलने का विकल्प देता है, लेकिन उसकी शर्तें, प्रोसेसिंग शुल्क और कुल चुकाई जाने वाली अतिरिक्त राशि पहले अच्छी तरह पूछ लें — कई बार किस्त की कुल लागत उम्मीद से ज्यादा निकलती है। तुलना करके ही फैसला लें और हो सके तो तय किस्त से ज्यादा भरकर अवधि घटाते रहें।

बिल का हिसाब बनाते समय एक और बात ध्यान दें — कार्ड पर ली गई किस्त वाली खरीदारी हर महीने बिल में जुड़ती रहती है, इसलिए कई बार बिना नई खरीदारी के भी बिल भारी आता है। अपनी सारी चालू किस्तों की सूची बनाकर देखें कि कुल कितनी रकम हर महीने पहले से बंधी हुई है।

अगर किस्तों का बोझ ज्यादा लग रहा है तो आगे कोई नई किस्त वाली खरीदारी तब तक न करें जब तक पुरानी किस्तें खत्म न हो जाएं। त्योहारों के बाद के दो-तीन महीने संयम से बिताना ही कार्ड के कर्ज से बाहर निकलने का सबसे भरोसेमंद रास्ता है।

आगे के लिए एक साधारण नियम बना लें — कार्ड से उतनी ही खरीदारी करें जितनी रकम उसी महीने चुकाने की क्षमता हो। हर बड़े खर्च से पहले खुद से पूछें कि क्या यह खरीदारी अगले महीने के बजट में भी ठीक बैठेगी। याद रखें, बिल की राशि, ब्याज दर और शुल्क हर बैंक और कार्ड के हिसाब से अलग होते हैं, इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले अपने कार्ड का विवरण, बिल और शर्तें बैंक के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट पर जरूर जांच लें।