अब एटीएम से निकलेंगे कड़क और मजबूत प्लास्टिक नोट! आम आदमी की जेब पर इसका क्या पड़ेगा असर
अगर सब कुछ तय योजनाओं के मुताबिक चला, तो आने वाले नए साल में आप अपनी जेब में कागज के नहीं बल्कि प्लास्टिक या पॉलिमर से बने नोट देख सकेंगे। इस दिशा में देश के केंद्रीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पूरी तरह से कमर कस ली है और वह एक्शन मोड में आ चुका है। सरकार ने आरबीआई को 10 रुपये और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट लाने की हरी झंडी दे दी है। फिलहाल, पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसके करीब दो अरब नोट छापने की अनुमति मिली है, लेकिन इस बड़े बदलाव को लागू करने के रास्ते में कुछ तकनीकी चुनौतियां और खर्चे भी खड़े हैं।
एक बड़े सरकारी बैंक के सीनियर अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरबीआई के इस पॉलिमर नोट वाले प्लान पर काफी खर्च आने वाला है। इसकी मुख्य वजह यह है कि एटीएम मशीनों के अंदर कैश संभालकर रखने वाली ‘कैसेट’ (Cassette) को बदलना पड़ेगा। बिना कैसेट बदले मौजूदा ऑटोमेटेड टेलर मशीनों (ATM) में इन प्लास्टिक के नोटों को लोड नहीं किया जा सकता। हालांकि, बैंकों ने अभी तक इसका सटीक आंकड़ा तय नहीं किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में कुल कितना खर्च आएगा।
बैंकर के मुताबिक, एक पूरा एटीएम बदलने का खर्च लगभग 2 लाख रुपये तक बैठता है, जबकि सिर्फ कैसेट बदलने का खर्च उससे कुछ कम होगा। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि देश में फिलहाल ऐसी कोई कंपनी नहीं है जो इन खास कैसेट का निर्माण करती हो, इसलिए इन्हें विदेशों से मंगाने को लेकर भी लंबी चर्चा करनी होगी। जानकारों का कहना है कि शुरुआती दौर में पॉलिमर नोटों को अपनाना काफी खर्चीला साबित होता है। जब कुछ साल पहले देश में करेंसी नोटों का आकार बदला गया था, तो बैंकों को सभी एटीएम की कैसेट अपडेट करने में करीब एक साल का लंबा समय लग गया था।
यदि सब कुछ ठीक ठाक और योजना के अनुसार आगे बढ़ा, तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत तक देश के आम लोगों के हाथों में प्लास्टिक के ये नए नोट पहुंच जाएंगे। हाल ही में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जानकारी दी थी कि शुरुआत में इन नोटों को केवल पायलट परीक्षण (Pilot Testing) के तौर पर लाया जाएगा। यदि यह शुरुआती परीक्षण सफल रहता है, तो इसका दायरा और तेजी से बढ़ाया जाएगा।
आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि यदि सब कुछ प्लान के मुताबिक चला, तो अगले वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में इसे जनता के बीच उतारने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए फिलहाल पॉलिमर के खास कागज (सब्सट्रेट) के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस पर कई तरह के तकनीकी परीक्षण किए जाएंगे, सुरक्षा संबंधी तमाम मंजूरियां ली जाएंगी क्योंकि इसमें कई प्रकार के आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स शामिल होते हैं। समय आने पर इन सभी चीजों की आधिकारिक जानकारी जनता के साथ साझा की जाएगी।
सरकार और आरबीआई द्वारा प्लास्टिक के नोट लाने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े उद्देश्य बताए जा रहे हैं। पहला सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे करेंसी नोटों की उम्र (Life Span) कई गुना बढ़ जाती है। यह बात खासतौर पर 10 रुपये और 20 रुपये जैसे कम मूल्य के नोटों पर सबसे ज्यादा लागू होती है, जो एक हाथ से दूसरे हाथ में बहुत तेजी से घूमते हैं और जल्दी फट या घिस जाते हैं।
दुनिया के कई देशों में पिछले 30 सालों से प्लास्टिक के इन नोटों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है।