LPG Cylinder Rules: सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के लिए बुरी खबर! सरकार ने रातों-रात बदला ये नियम

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बिजनेस डेस्क: देश में रसोई गैस कनेक्शन को लेकर सरकार ने नियम अब काफी सख्त कर दिए हैं। अगर आप भी घर में पाइप वाली गैस (PNG) और एलपीजी सिलेंडर (LPG) दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। सरकार ने ‘एक घर, एक कनेक्शन’ की नीति को कड़ाई से लागू करने का फैसला किया है। अब एक ही पते पर दो तरह के गैस कनेक्शन रखना नियमों के खिलाफ माना जाएगा।

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सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। नए नियमों के मुताबिक, जिन घरों में पहले से PNG कनेक्शन लगा हुआ है, उन्हें अपना सब्सिडी वाला घरेलू एलपीजी कनेक्शन अब सरेंडर करना होगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह बदलाव 14 मार्च से प्रभावी हो गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से गैस की कालाबाजारी पर रोक लगेगी और सब्सिडी का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा।

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?

इस बदलाव के पीछे वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव एक बड़ी वजह है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर है—हम करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी बाहर से मंगवाते हैं। सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए सरकार गैस आपूर्ति को संतुलित करना चाहती है। अब शहरों में ऐसे घरों की पहचान शुरू कर दी गई है जो दोनों सुविधाओं का मजा ले रहे हैं।

एजेंसियों को भी मिले सख्त आदेश

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए पाइप वाली गैस पहुंच चुकी है, वहां एलपीजी सिलेंडर रखना अब गैरकानूनी माना जाएगा।

उपभोक्ताओं को अपना सिलेंडर जमा करने के लिए एक तय समय दिया जा रहा है। यही नहीं, गैस एजेंसियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे PNG वाले घरों को न तो नया कनेक्शन दें और न ही पुराने सिलेंडर रिफिल करें।

43,000 ग्राहकों ने छोड़ा कनेक्शन

सरकारी आंकड़ों की मानें तो अब तक 43,000 से ज्यादा लोग खुद आगे आकर अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर चुके हैं। सरकार का मुख्य लक्ष्य उन गरीब परिवारों को प्राथमिकता देना है जिनके पास अभी तक पाइप गैस की सुविधा नहीं पहुंची है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया के तनाव के कारण सप्लाई रूट प्रभावित हो रहे हैं, जिसका असर होटलों और फैक्ट्रियों पर भी पड़ रहा है।

ऐसे में संसाधनों का सही प्रबंधन बहुत जरूरी हो गया है।