छोटे कारोबार के लिए बिजनेस अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर लेना फायदेमंद है या एक्सेल से काम चल सकता है? फैसला करने से पहले जानें ये अंतर

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छोटे कारोबार में हिसाब रखने के लिए सबसे पहला सवाल यही आता है। क्या एक्सेल से काम चल जाएगा, या अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर लेना चाहिए। कई कारोबारी सालों से एक्सेल पर ही हिसाब रखते आ रहे हैं और उन्हें लगता है कि सॉफ्टवेयर पर पैसा खर्च करना फिजूल है। दूसरी तरफ कुछ लोग सॉफ्टवेयर लेने के बाद कहते हैं कि पहले ही ले लेना चाहिए था। सच यह है कि दोनों के अपने फायदे और सीमाएं हैं। सही फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि कारोबार कितना बड़ा है, कितने लेनदेन होते हैं और हिसाब कितना जटिल है।

अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर कहां बेहतर पड़ता है

अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में लेनदेन एक बार दर्ज करने पर वह अपने आप सही जगह पहुंच जाता है। बिक्री दर्ज करते ही स्टॉक घटता है, ग्राहक का बकाया बढ़ता है और कुल बिक्री का आंकड़ा अपडेट हो जाता है। जीएसटी से जुड़े कामों में भी यह मदद करता है। बिल बनाते समय जीएसटी अपने आप जुड़ता है और रिटर्न के लिए आंकड़े तैयार मिलते हैं। जीएसटी रिटर्न में देरी पर सामान्य शुल्क 50 रुपये प्रतिदिन और शून्य रिटर्न पर 20 रुपये प्रतिदिन लगता है, जिसकी सीमा तय है। सॉफ्टवेयर से आंकड़े समय पर तैयार होने पर इस तरह की देरी से बचा जा सकता है।

सॉफ्टवेयर की एक और खूबी है रिपोर्ट। एक क्लिक पर पता चल जाता है कि किस ग्राहक से कितना बकाया है, किस सामान पर कितना मुनाफा हुआ और महीने का कुल खर्च कितना है। एक्सेल में यही रिपोर्ट बनाने में घंटों लग सकते हैं। अगर कारोबार में कई कर्मचारी हैं, तो सॉफ्टवेयर में हर व्यक्ति को अलग अधिकार दिया जा सकता है। कोई सिर्फ बिल बना सकता है, तो कोई सिर्फ रिपोर्ट देख सकता है। इससे गलती और गड़बड़ी दोनों कम होती हैं।

एक्सेल कब तक काफी है

अगर कारोबार बहुत छोटा है, दिन में 10 से 20 लेनदेन होते हैं, ग्राहक सीमित हैं और जीएसटी से जुड़े काम कम हैं, तो एक्सेल से काम चल सकता है।

लेकिन इसके लिए भी अनुशासन चाहिए। हर दिन लेनदेन दर्ज करना, फाइल का बैकअप रखना और महीने के अंत में हिसाब मिलाना, ये तीन आदतें जरूरी हैं। अगर ये आदतें नहीं हैं, तो एक्सेल भी उतना ही बेकार है जितना बिना लिखा रजिस्टर। कई छोटे कारोबारी एक्सेल से शुरुआत करते हैं और जब लेनदेन बढ़ जाते हैं, तब सॉफ्टवेयर पर आ जाते हैं। यह तरीका भी गलत नहीं है।

सॉफ्टवेयर लेने का खर्च भी एक सवाल है। कुछ सॉफ्टवेयर सालाना शुल्क लेते हैं, तो कुछ एक बार का शुल्क। खर्च तय करते समय सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि समय की बचत भी देखें।

अगर सॉफ्टवेयर से हर महीने 10 घंटे बचते हैं और वह समय बिक्री बढ़ाने में लगता है, तो वह खर्च वसूल हो जाता है। लेकिन अगर कारोबार इतना छोटा है कि हिसाब में ही 1 घंटा लगता है, तो महंगा सॉफ्टवेयर लेना समझदारी नहीं है।

फैसला करने से पहले ये 5 सवाल पूछें

पहला सवाल है कि दिन में कितने लेनदेन होते हैं। दूसरा है कि क्या जीएसटी रिटर्न और बिल बनाने का काम ज्यादा है। तीसरा है कि क्या कई लोग हिसाब संभालते हैं। चौथा है कि क्या उधार और बकाया का हिसाब अक्सर गड़बड़ होता है। पांचवां है कि क्या महीने के अंत में रिपोर्ट बनाने में बहुत समय लगता है।

अगर इनमें से ज्यादातर सवालों का जवाब हां है, तो सॉफ्टवेयर लेना फायदेमंद हो सकता है। अगर ज्यादातर जवाब ना हैं, तो एक्सेल से काम चल सकता है।

किसी एक सॉफ्टवेयर को सबसे अच्छा घोषित करना सही नहीं होगा, क्योंकि हर कारोबार की जरूरत अलग है। फैसला लेने से पहले कुछ विकल्पों की तुलना करें, उनकी कीमत, सुविधाएं और सहायता सेवा देखें। कई सॉफ्टवेयर मुफ्त परीक्षण भी देते हैं, जिससे खरीदने से पहले अनुभव किया जा सकता है। चाहे एक्सेल चुनें या सॉफ्टवेयर, सबसे जरूरी बात यही है कि हिसाब रोज दर्ज हो और महीने के अंत में मिलाया जाए।

बिना इस आदत के कोई भी साधन काम नहीं करेगा। किसी भी शंका पर अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें।