कर्मचारियों की किस्मत पलटने वाला है 8वां वेतन आयोग! जानिए फिटमेंट फैक्टर पर क्या है यूनियनों की मांग
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। हाल ही में बेंगलुरु में हुई आयोग की बैठक खत्म हो चुकी है और अब अगली बैठक 22 अक्टूबर से मुंबई में शुरू होने जा रही है। इससे पहले आयोग चंडीगढ़, जयपुर, पुड्डुचेरी और दिल्ली जैसी जगहों पर भी बैठकें कर चुका है। इन सभी बैठकों में मुख्य तौर पर फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और पेंशन में सुधार को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। देश भर के अलग-अलग कर्मचारी संगठनों और यूनियनों ने अपने-अपने सुझाव सौंप दिए हैं, जिसके बाद कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा?
आखिर क्या होता है यह फिटमेंट फैक्टर?सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि इस फिटमेंट फैक्टर को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है। दरअसल, फिटमेंट फैक्टर वह मुख्य गुणक (Multiplier) है जिसके आधार पर मौजूदा बेसिक पे और पेंशन में बढ़ोतरी की जाती है। यह सिर्फ मिनिमम सैलरी ही तय नहीं करता, बल्कि इसका सीधा असर कर्मचारी की पेंशन, बेसिक सैलरी और पूरे सैलरी स्ट्रक्चर पर पड़ता है। यही वजह है कि कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और स्टेकहोल्डर्स के लिए यह सबसे बड़ा और अहम मुद्दा बना हुआ है।
नई बेसिक सैलरी निकालने का फॉर्मूला बहुत आसान है: नई बेसिक पे = मौजूदा बेसिक पे × फिटमेंट फैक्टर
उदाहरण के लिए, मान लेते हैं कि 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 के किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.0 होता है, तो नई बेसिक सैलरी बढ़कर 54,000 रुपये हो जाएगी। वहीं, अगर फिटमेंट फैक्टर 4.0 तय होता है, तो यही बेसिक सैलरी सीधे चार गुना बढ़कर 72,000 रुपये हो जाएगी। ध्यान रहे कि यह गणना भत्तों (Allowances) से पहले की है। जब इसमें डीए (DA), एचआरए (HRA), टीए (TA) और अन्य भत्ते जुड़ेंगे, तो फाइनल टेक-होम सैलरी का फर्क और भी बड़ा हो जाएगा।
3.833x बनाम 4x: महीने की सैलरी में कितना आएगा अंतर?विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने अपनी-अपनी मांगें रखी हैं। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने 4 के फिटमेंट फैक्टर की जोरदार मांग की है, जबकि नेशनल काउंसिल-JCM (NCJCM) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने 3.833 की मांग सामने रखी है।
अगर लेवल-1 के कर्मचारी की बेसिक पे पर इसकी गणना की जाए, तो 3.833 और 4 के फिटमेंट फैक्टर के बीच हर महीने लगभग 3,006 रुपये का अंतर बैठता है। अगर इसे सालाना आधार पर देखें, तो यह फर्क करीब 36,072 रुपये का बनता है। यह तो सिर्फ बेसिक पे का अंतर है; भत्तों और कटौतियों के बाद फाइनल टेक-होम सैलरी पर इसका प्रभाव अलग होगा। इसके अलावा, लेवल 15, 16 और उससे ऊपर के उच्च पदों वाले कर्मचारियों के लिए यह अंतर और भी ज्यादा बड़ा होगा।
किस यूनियन ने कितनी मांग की है?- BPMS: 4.0
- NCJCM और AIDEF: 3.833
- महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन: 3.8
- फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन (FNPO): 3.0 से 3.25
- ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC): कम से कम 3.0
अगर इतिहास पर नजर डालें, तो छठे वेतन आयोग (6th Pay Commission) में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था, जबकि सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) में इसे बढ़ाकर 2.57 कर दिया गया था। हालांकि, 8वें वेतन आयोग को लेकर अभी तक सरकार या आयोग की तरफ से कोई भी आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर घोषित नहीं किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2 से 4 के बीच हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम या आधिकारिक नहीं माना जाना चाहिए। जहां तक आयोग की फाइनल रिपोर्ट आने की बात है, तो जानकारों के मुताबिक यह मई-जून 2027 तक आने की संभावना है। तब तक किसी भी आंकड़े को फाइनल मानकर चलना जल्दबाजी होगी।