पेट्रोल-डीजल-CNG की टेंशन हमेशा के लिए खत्म! गन्ने के रस से दौड़ेंगी गाड़ियां, जानिए सरकार का पूरा प्लान
नई दिल्ली। अगर आप भी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी (CNG) की आसमान छूती कीमतों और हर रोज होने वाले उतार-चढ़ाव से तंग आ चुके हैं, तो आपके लिए एक बेहद हैरान करने वाली और बड़ी खुशखबरी है। बहुत जल्द देश की सड़कों पर गन्ने के रस और मक्के से बनी ताकत यानी ‘एथेनॉल’ (Ethanol) से गाड़ियां सरपट दौड़ती नजर आने वाली हैं। केंद्र सरकार देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह बदलने और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ (Flex-Fuel) वाहनों को तेजी से सड़कों पर उतारने का मेगा प्लान तैयार कर चुकी है।
आम जनता के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर ये E85 और E100 क्या बला हैं। दरअसल, E85 का सीधा सा मतलब है ऐसा ईंधन जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और मात्र 15 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया गया हो।
वहीं दूसरी तरफ, E100 का मतलब पूरी तरह से 100 प्रतिशत शुद्ध एथेनॉल ईंधन है। पेट्रोलियम मंत्रालय, देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और ऑटोमोबाइल सेक्टर की सबसे बड़ी संस्था सियाम (SIAM) के बीच हाल ही में एक हाई-लेवल मीटिंग हुई है। इस बैठक में ऑटो कंपनियों ने साफ कर दिया कि सिर्फ गाड़ियों की तकनीक बदल देने भर से शोरूमों में भीड़ नहीं उमड़ेगी।असल में, एथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले ऊर्जा (Energy Density) थोड़ी कम होती है, जिसका सीधा असर गाड़ी के माइलेज पर पड़ता है। यानी एथेनॉल से गाड़ी का माइलेज थोड़ा कम हो सकता है।
ऑटो कंपनियों ने इस समस्या को सुलझाने के लिए सीधे ब्राजील का सटीक उदाहरण सरकार के सामने रखा है। ब्राजील में एथेनॉल की कीमत पेट्रोल से बहुत ज्यादा कम है, यही वजह है कि वहां के लोग फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां धड़ल्ले से खरीदते हैं। भारत की कंपनियों का भी यही कहना है कि जब तक भारतीय ग्राहकों को अपने फ्यूल बिल में सीधी और बड़ी बचत नहीं दिखेगी, तब तक वे E20 (20% एथेनॉल) वाले मौजूदा ईंधन से ही काम चलाते रहेंगे और नई कारों पर पैसा नहीं फंसाएंगे। नई तकनीक से बढ़ सकती है गाड़ियों की कीमत, कंपनियों ने मांगी टैक्स में छूटमौजूदा समय में इन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर भी आम पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तरह ही 18 से लेकर 40 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैक्स लगता है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर सरकार पेट्रोल-डीजल को छोड़कर फ्लेक्स-फ्यूल पर इतना जोर क्यों दे रही है? इसका सीधा और सटीक जवाब देश की तिजोरी और सुरक्षा से जुड़ा है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल (Crude Oil) दूसरे देशों से आयात करता है, जिसके लिए हर साल 120 अरब डॉलर से भी ज्यादा की मोटी विदेशी मुद्रा बाहर भेजनी पड़ती है। भारत के तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) से आता है, जहां अक्सर युद्ध और आपसी तनाव के चलते सप्लाई रुकने का खतरा बना रहता है।
सरकारी आंकड़ों को देखें तो देश में पेट्रोल की कुल मांग का लगभग 95 से 98 प्रतिशत और डीजल का 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर हमारे ट्रांसपोर्ट सेक्टर यानी गाड़ियों में खर्च होता है। ऐसे में अगर देश के भीतर ही गन्ने और मक्के से तैयार होने वाले एथेनॉल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू हो जाता है, तो इससे देश के लाखों करोड़ रुपये बचेंगे और भारत कच्चे तेल के लिए किसी दूसरे देश का मोहताज नहीं रहेगा।
100% एथेनॉल का सपना और पर्यावरण की बड़ी चुनौतीदेश में इस बड़े बदलाव के लिए जमीन तैयार हो चुकी है।
वहीं दूसरी ओर, देश में एथेनॉल का उत्पादन भी रिकॉर्ड रफ्तार से बढ़ा है।