दिवाली के बाद गेहूं की बुवाई का बजट बना रहे हैं? बीज, खाद और उपकरणों पर खर्च का ये हिसाब जरूर देखें
दिवाली की छुट्टियां बीतते ही रबी के मौसम का सबसे बड़ा काम शुरू हो जाता है — गेहूं की बुवाई। अक्सर देखा जाता है कि किसान बीज और खाद की जल्दबाजी वाली खरीद में ही अपना बजट बिगाड़ लेते हैं और फिर सिंचाई के समय पैसे की तंगी झेलते हैं। बुवाई से पहले कागज पर बजट बना लेना इस तंगी से बचने का सबसे आसान तरीका है, क्योंकि इसमें हर मद का खर्च पहले से तय रहता है।
बीज और मिट्टी जांच: बजट की नींव यहीं पड़ती हैदूसरी और सबसे ज्यादा अनदेखी होने वाली मद है खाद। बिना जांच के अंदाज से खाद खरीदना पैसे की बर्बादी है। मिट्टी परीक्षण यानी सॉइल हेल्थ कार्ड से पता चलता है कि खेत में किस तत्व की कमी है और किसकी जरूरत ही नहीं है।
सीड ड्रिल, रोटावेटर जैसी मशीनें बुवाई को आसान बनाती हैं, लेकिन सवाल यह है कि खरीदें या किराए पर लें। छोटे खेत पर साल में कुछ ही दिन चलने वाली मशीन खरीदना पूंजी को बांध देना है। ऐसे में किराए पर लेना या गांव के कुछ किसानों के साथ साझा उपयोग करना ज्यादा समझदारी भरा माना जाता है।
बजट के साथ समय की योजना भी जुड़ी है। बुवाई का सही समय निकल जाए तो बजट का हिसाब भी बिगड़ जाता है, इसलिए बीज और खाद की खरीद त्योहार की भीड़ से पहले निपटा लेना समझदारी है। सीजन में मजदूरी महंगी और मुश्किल से मिलती है, इसलिए पड़ोस के किसानों से बात करके काम का क्रम पहले तय कर लेना चाहिए। छोटे किसानों के लिए गांव स्तर पर समूह बनाकर बीज और खाद की साझा खरीद भी लागत घटाने का एक उपयोगी तरीका माना जाता है, बशर्ते हिसाब-किताब पारदर्शी रखा जाए और सबका हिस्सा समय पर इकट्ठा हो जाए।
बजट में सिंचाई का खर्च अलग से लिखें — डीजल या बिजली, नहर का समय और मजदूरी। साथ ही मशीन खराब होने या मजदूरों की अचानक जरूरत जैसे अनजाने खर्चों के लिए छोटा हिस्सा अलग रखें। पिछले साल के अपने हिसाब-किताब को आधार बनाना सबसे विश्वसनीय तरीका है, क्योंकि हर खेत की जमीन, पानी और दूरी अलग होती है। किसी दुकानदार या पड़ोसी के बजट की नकल करने के बजाय अपना बजट खुद बनाएं। याद रखें, कागज पर बना बजट ही कर्ज से बचाता है।