Airtel या Vi: बॉम्बे हाई कोर्ट के बड़े फैसले के बाद किस शेयर में आएगी रॉकेट जैसी तेजी? ब्रोकरेज ने बताया नाम

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भारतीय एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए एक बहुत अच्छी खबर आ रही है. हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने टेलीकॉम विभाग (DoT) की वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) से जुड़ी भारी-भरकम मांगों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है. कोर्ट के इस फैसले से दोनों ही दिग्गज टेलीकॉम कंपनियों को बहुत बड़ी राहत मिली है. मशहूर ब्रोकरेज फर्म नोमुरा (Nomura) का मानना है कि यह फैसला दोनों कंपनियों के भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक है और आने वाले दिनों में इनके शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है.

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हालांकि, नोमुरा ने एयरटेल के शेयर पर अपनी ‘Buy’ (खरीदने की) रेटिंग दी है, जबकि वोडाफोन आइडिया पर ‘Neutral’ (तटस्थ) रेटिंग बरकरार रखी है.

एयरटेल पर क्यों बुलिश है नोमुरा?

ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भारतीय एयरटेल के शेयरों के लिए 2,220 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है. अगर मौजूदा स्तरों से देखा जाए तो इस शेयर में करीब 25% की संभावित बढ़त साफ नजर आती है. कंपनी की FY25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एयरटेल ने 8,410 करोड़ रुपये की मूल मांग में से 1,810 करोड़ रुपये मूल राशि और उस पर लगने वाले 9,950 करोड़ रुपये के ब्याज के लिए पहले ही प्रोविजन (प्रावधान) कर रखा है.

इसका मतलब यह है कि कंपनी लगभग 11,760 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही अपने खाते में बना चुकी है.

नोमुरा का कहना है कि अगर इस मामले में आखिरी फैसला भी कंपनी के ही पक्ष में आता है, तो एयरटेल को 11,760 करोड़ रुपये तक का संभावित राइट-बैक (Writeback) मिल सकता है. हालांकि, यह सिर्फ एक अकाउंटिंग एडजस्टमेंट होगा और इससे कंपनी के रोजाना के कैश फ्लो या वित्तीय स्थिति पर कोई बहुत बड़ा सीधा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि एयरटेल का बिजनेस मॉडल बेहद मजबूत है, कंपनी लगातार अच्छा कैश फ्लो बना रही है और इसका वैल्यूएशन भी काफी आकर्षक नजर आ रहा है.

वोडाफोन आइडिया को राहत, लेकिन चुनौतियां बरकरार

दूसरी तरफ, वोडाफोन आईडिया के लिए नोमुरा ने 12.60 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है और इसकी ‘Neutral’ रेटिंग को वैसे ही बनाए रखा है. इसका सीधा मतलब यह है कि ब्रोकरेज फर्म को निकट भविष्य में इस शेयर में कोई बहुत ज्यादा तेजी आने की उम्मीद नहीं दिख रही है. कंपनी ने इस पूरे मामले के लिए अपने पास 7,580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया हुआ है और साथ ही 3,350 करोड़ रुपये की कंटिंजेंट लाइबिलिटी भी दिखा रखी है.

हालांकि, वोडाफोन आइडिया के साथ एक बड़ी पेचीदगी जुड़ी हुई है.

हाई कोर्ट का यह ताजा फैसला केवल उनके पुराने ‘आइडिया’ (Idea) बिजनेस से जुड़े वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज पर ही लागू होता है. जबकि पुराने ‘वोडाफोन’ (Vodafone) बिजनेस से जुड़ा इसी तरह का एक मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ है. नोमुरा का मानना है कि 7,580 करोड़ रुपये का संभावित रिवर्सल वोडाफोन आईडिया के लिए बहुत अहम साबित हो सकता है, क्योंकि कंपनी पहले से ही भारी कर्ज, नेगेटिव नेटवर्थ और कमजोर कैश फ्लो जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है.

आगे किन बातों पर रहेगी निवेशकों की नजर?

बाजार के विशेषज्ञों के मुताबिक, वोडाफोन आइडिया के शेयर में आगे तेजी आने के लिए नया कर्ज जुटाना, मोबाइल टैरिफ में बढ़ोतरी होना और ग्राहकों की संख्या में सुधार होना सबसे बड़े ट्रिगर साबित होंगे. वहीं दूसरी ओर, एयरटेल के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अगर टेलीकॉम सेक्टर में कंपनियों के बीच कंपटीशन अचानक बहुत ज्यादा बढ़ता है या फिर टैरिफ बढ़ोतरी में देरी होती है, तो कंपनी की अनुमानित कमाई पर इसका असर पड़ सकता है.

निवेशकों के लिए क्या है आखिरी संदेश?

ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने निवेशकों को साफ शब्दों में समझाया है कि बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला दोनों ही कंपनियों के लिए राहत की सांस जरूर लेकर आया है, लेकिन इसे अंतिम फैसला बिल्कुल न माना जाए.

इस आदेश को टेलीकॉम विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. इसलिए, इस सेक्टर में पैसा लगाने वाले निवेशकों को आगे की कानूनी अदालती प्रक्रिया पर भी लगातार अपनी नजर बनाए रखनी चाहिए.