बिहार के किसानों की बल्ले-बल्ले! फसल नुकसान पर सरकार देगी ₹20,000, जानें कैसे करें आवेदन
बिहार के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. खरीफ सीजन में प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से फसल खराब होने के चलते आर्थिक नुकसान झेल रहे राज्य के किसानों को अब चिंता करने की जरूरत नहीं है. बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बिहार राज्य फसल सहायता योजना’ के तहत ऐसे सभी प्रभावित किसानों को आर्थिक मदद मुहैया कराई जा रही है.
इस योजना के अंतर्गत जो भी पात्र किसान अपनी क्षतिग्रस्त फसल के लिए सहायता राशि पाना चाहते हैं, वे आसानी से आवेदन कर सकते हैं. बिहार सरकार ने खरीफ 2026 के लाभुक किसानों के लिए इस योजना के तहत मुआवजा राशि जारी करने की प्रक्रिया भी आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है.
फसल नुकसान के हिसाब से तय होगी सहायता राशि
बिहार सरकार ने इस योजना के तहत फसल नुकसान की अलग-अलग स्थितियों के आधार पर सहायता राशि तय की है. यदि किसी किसान की फसल को 20 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है, तो उसे 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक मदद दी जाएगी. वहीं, अगर फसल का नुकसान 20 प्रतिशत से अधिक होता है, तो किसानों को 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है.
नियमों के अनुसार, एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर तक के फसल नुकसान पर ही इस योजना का लाभ मिल सकता है. इस हिसाब से देखें तो एक पात्र किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता राशि प्राप्त हो सकती है.
आवेदन के लिए नहीं देना होगा कोई शुल्क
किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन और बिल्कुल निःशुल्क (फ्री) रखा गया है. बिहार सरकार के कृषि विभाग के मुताबिक, राज्य सरकार की ऑनलाइन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसान का विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण (Registration) होना बेहद अनिवार्य है. पहले से पंजीकृत किसान अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और मोबाइल पर आने वाले ओटीपी (OTP) की मदद से बेहद आसानी से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं.
खरीफ सीजन में फसल नुकसान से परेशान और हताश किसानों के लिए यह आर्थिक सहायता बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी. कृषि विभाग ने सलाह दी है कि सभी पात्र किसान निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना आवेदन पूरा कर लें, ताकि प्रशासनिक सत्यापन के बाद उन्हें समय पर योजना का लाभ मिल सके. यह सहायता राशि पात्रता की जांच और विभागीय सत्यापन के बाद सीधे किसान के बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) भेजी जाएगी.