होर्मुज के बाद अब एक और समुद्री रास्ता बंद करने का ऐलान, दुनिया पर मंडराया भयंकर ऊर्जा संकट
अमेरिका और ईरान के बीच मची भारी तनातनी और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की वजह से दुनिया पहले से ही एक बहुत बड़े और गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस बीच, वैश्विक व्यापार और राजनीति से जुड़ी एक बेहद डरावनी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है।
हूती विद्रोहियों की तरफ से अरब की नाकेबंदी करने की यह घोषणा तब आई है जब हाल ही में सना हवाई अड्डे पर सऊदी अरब की अगुआई में एक बड़ा हमला किया गया था। हूतियों का साफ कहना है कि वे इसी हमले के कड़े विरोध में यह आक्रामक कदम उठाने जा रहे हैं।
होर्मुज के बाद दुनिया का सबसे अहम फ्यूल रूट है बाब-अल-मंदेबलाल सागर का ‘बाब-अल-मंदेब’ जलडमरूमध्य, होर्मुज के ठीक बाद दुनिया में फ्यूल सप्लाई (ईंधन आपूर्ति) का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक रास्ता माना जाता है।
अगर यह रास्ता भी पूरी तरह से बाधित हो जाता है, तो दुनियाभर के बाजारों में हड़कंप मच जाना तय है। इस खतरनाक नाकेबंदी के ऐलान से ठीक पहले हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एक एयरपोर्ट पर जोरदार ड्रोन हमला भी किया था। हूतियों ने अपनी इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि ‘आंख के बदले आंख’ वाला जवाब हमेशा इसी तरह से दिया जाता है।सऊदी अरब के लिए क्यों है जीवन रेखा जैसा जरूरी?ईरान के साथ चल रहे युद्ध और तनाव की वजह से सऊदी अरब ने अपने कुल तेल और ईंधन का ज्यादातर निर्यात लाल सागर के इसी रास्ते से करना शुरू कर दिया था।
हालांकि हूती विद्रोहियों ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वे इस नाकेबंदी को जमीन पर कैसे लागू करेंगे, लेकिन इस धमकी के बाद से ही लाल सागर में गुजरने वाले जहाजों और व्यापारिक संगठनों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।
गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर में कमर्शियल जहाजों पर महीनों तक लगातार हुए हमलों के बाद हूतियों की तरफ से यह ताजा धमकी आई है। उस दौरान इस विद्रोही समूह ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के इलाके में लगभग 100 कमर्शियल जहाजों को अपना निशाना बनाया था।