होर्मुज के बाद अब एक और समुद्री रास्ता बंद करने का ऐलान, दुनिया पर मंडराया भयंकर ऊर्जा संकट

Newspoint
Newspoint

अमेरिका और ईरान के बीच मची भारी तनातनी और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की वजह से दुनिया पहले से ही एक बहुत बड़े और गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस बीच, वैश्विक व्यापार और राजनीति से जुड़ी एक बेहद डरावनी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है।

Hero Image
सऊदी अरब को सबक सिखाने और उसे चारों तरफ से घेरने के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के संगठन ‘अंसार अल्लाह’ ने एक और अहम समुद्री रास्ते की नाकेबंदी करने का खुला ऐलान कर दिया है।

हूती विद्रोहियों की तरफ से अरब की नाकेबंदी करने की यह घोषणा तब आई है जब हाल ही में सना हवाई अड्डे पर सऊदी अरब की अगुआई में एक बड़ा हमला किया गया था। हूतियों का साफ कहना है कि वे इसी हमले के कड़े विरोध में यह आक्रामक कदम उठाने जा रहे हैं।

होर्मुज के बाद दुनिया का सबसे अहम फ्यूल रूट है बाब-अल-मंदेब

लाल सागर का ‘बाब-अल-मंदेब’ जलडमरूमध्य, होर्मुज के ठीक बाद दुनिया में फ्यूल सप्लाई (ईंधन आपूर्ति) का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक रास्ता माना जाता है।

अगर यह रास्ता भी पूरी तरह से बाधित हो जाता है, तो दुनियाभर के बाजारों में हड़कंप मच जाना तय है। इस खतरनाक नाकेबंदी के ऐलान से ठीक पहले हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एक एयरपोर्ट पर जोरदार ड्रोन हमला भी किया था। हूतियों ने अपनी इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा है कि ‘आंख के बदले आंख’ वाला जवाब हमेशा इसी तरह से दिया जाता है।

सऊदी अरब के लिए क्यों है जीवन रेखा जैसा जरूरी?

ईरान के साथ चल रहे युद्ध और तनाव की वजह से सऊदी अरब ने अपने कुल तेल और ईंधन का ज्यादातर निर्यात लाल सागर के इसी रास्ते से करना शुरू कर दिया था।

सऊदी अरब की दिग्गज तेल कंपनी ‘अरामको’ अपने 70 फीसदी तेल का निर्यात 746 मील लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए करती है। यह खास पाइपलाइन सऊदी अरब के कच्चे तेल को फारस की खाड़ी से गुजरे बिना ही सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए जहाजों में लोड करने की सुविधा देती है, जिसे पेट्रोलीन कहा जाता है। इस पाइपलाइन के जरिए ही तेल को लाल सागर तक पहुंचाया जाता है, यही वजह है कि सऊदी अरब के लिए लाल सागर का यह रास्ता बहुत ज्यादा जरूरी है।

क्या अब सचमुच आसमान छूएंगे कच्चे तेल और गैस के दाम?

हालांकि हूती विद्रोहियों ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वे इस नाकेबंदी को जमीन पर कैसे लागू करेंगे, लेकिन इस धमकी के बाद से ही लाल सागर में गुजरने वाले जहाजों और व्यापारिक संगठनों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।

इतिहास गवाह है कि हूती विद्रोही पहले भी लगातार कार्गो जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। बाब-अल-मंदेब का दक्षिणी प्रवेश द्वार बेहद संकरा है, और यदि यहां पूरी तरह नाकेबंदी हो जाती है, तो किसी भी जहाज के लिए वहां से निकलना नामुमकिन हो जाएगा। ऐसे में दुनिया के सामने बेहद विकट और भयानक परिस्थिति पैदा हो सकती है।

गाजा संघर्ष और पुरानी धमकियों का काला इतिहास

गाजा संघर्ष के दौरान लाल सागर में कमर्शियल जहाजों पर महीनों तक लगातार हुए हमलों के बाद हूतियों की तरफ से यह ताजा धमकी आई है। उस दौरान इस विद्रोही समूह ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के इलाके में लगभग 100 कमर्शियल जहाजों को अपना निशाना बनाया था।