E-KYC नहीं कराया तो तगड़ा झटका देगा एलपीजी सिलिंडर

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ई-केवाईसी नहीं कराने पर महंगा मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

अगर आपके पास भी रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) कनेक्शन है और आपने अभी तक अपनी ई-केवाईसी (E-KYC) पूरी नहीं कराई है, तो अब आपकी मुश्किलें काफी बढ़ने वाली हैं। जानकारी सामने आई है कि केवाईसी न करवाने वाले उपभोक्ताओं को बहुत जल्द बाजार के निर्धारित मूल्य पर सिलिंडर खरीदना पड़ेगा, जिससे आपकी जेब पर सीधा भारी असर पड़ सकता है।

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10 साल के बाद देश में फिर से लागू होगी दोहरी कीमत व्यवस्था

बीते शुक्रवार को देश की प्रमुख तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) ने सभी गैस एजेंसियों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत अब पूरे 10 साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर से ‘दोहरी कीमत व्यवस्था’ (Dual Pricing System) को दोबारा लागू किया जाने वाला है, जिसकी आधिकारिक तारीख का ऐलान बहुत जल्द किया जाएगा।

जानिए क्या है जिले के आंकड़ों का पूरा गणित

अगर एक जिले के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वहां कुल 13.57 लाख एलपीजी उपभोक्ता मौजूद हैं, जिनमें अकेले साढ़े छह लाख उपभोक्ता सिर्फ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के अंतर्गत आते हैं। नियमों के मुताबिक अब कोई भी उपभोक्ता मात्र 25 दिनों के भीतर ही अपने नए सिलिंडर की बुकिंग आसानी से करा सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में सिंगल कीमत व्यवस्था चल रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अकेले उसी जिले में 75 हजार से ज्यादा ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्होंने अभी तक अपनी ई-केवाईसी नहीं कराई है, हालांकि ग्राहकों को इसके लिए लगातार कई मौके भी दिए जा चुके हैं।

केवाईसी न होने पर चुकानी होगी बिना सब्सिडी वाली पूरी कीमत

ऑल इंडिया इंडेन वितरक संघ के मंडल अध्यक्ष विपुल पुरोहित ने इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में एलपीजी सिलिंडर की कीमत 952 रुपये है, जिसमें 12 रुपये की सरकारी सब्सिडी भी शामिल होती है। लेकिन बहुत जल्द ऑयल कंपनियां दोहरी कीमत व्यवस्था को धरातल पर उतारने जा रही हैं, जिसके तहत घरेलू सिलिंडरों के दो अलग-अलग रेट तय होंगे। जो उपभोक्ता ई-केवाईसी नहीं कराएंगे और जो गैर-उज्ज्वला योजना के उपभोक्ता होंगे, उन्हें बिना किसी सब्सिडी के सीधे बाजार के पूरे रेट पर सिलिंडर खरीदना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ठीक यही दोहरी कीमत व्यवस्था आज से लगभग 10 साल पहले भी लागू थी, जिसे अब एक बार फिर से वापस लाया जा रहा है।