अमेरिका का बड़ा एक्शन: H-1B वीजा में धांधली की जांच शुरू, क्या अब मुश्किल में हैं भारतीय?

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अमेरिका में नौकरी करने और डॉलर कमाने का सपना देखने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहद जरूरी खबर सामने आई है। अमेरिकी सरकार ने H-1B और PERM (ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला चरण) वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और नियमों के दुरुपयोग को लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इस कार्रवाई की जद में आईटी की दिग्गज कंपनी ‘कॉग्नीजेंट’ (Cognizant) का नाम भी सामने आया है, जिसने भारतीय आईटी सेक्टर में हलचल मचा दी है।

क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है हड़कंप?

यह सख्त जांच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाली ‘टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड’ की निगरानी में की जा रही है। अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने खुलासा किया है कि कई व्हिसलब्लोअर्स की शिकायत के बाद यह कदम उठाया गया है। जांच का मुख्य फोकस वीजा प्रक्रिया में हो रहे कथित फर्जीवाड़े, वेज-किकबैक (वेतन का हिस्सा वापस लेने), विदेशी कर्मचारियों के शोषण और अमेरिकी श्रमिकों को दरकिनार कर सस्ते विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने जैसे गंभीर आरोपों पर है।

हालांकि, यह साफ करना जरूरी है कि अभी तक कॉग्नीजेंट के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं और न ही किसी अदालत ने कंपनी को दोषी माना है। जांच अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन अमेरिकी सरकार का यह रुख भविष्य के लिए कड़े संकेतों की तरह देखा जा रहा है।

भारतीय आईटी सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर?

अमेरिका के टेक सेक्टर में भारतीय इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स का दबदबा है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B वीजा में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय थे। ऐसे में अगर जांच और सख्त होती है, तो इसके कई बड़े असर देखने को मिल सकते हैं:

  • ऑनसाइट अवसरों में कमी: कंपनियां अब नए H-1B वीजा स्पॉन्सर करने में फूंक-फूंक कर कदम रखेंगी, जिससे अमेरिका जाने के मौके कम हो सकते हैं।
  • भारत में बढ़ेगी हायरिंग: अमेरिका में नियम सख्त होने के कारण आईटी कंपनियां ‘ऑफशोर मॉडल’ यानी भारत से रिमोट वर्किंग पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं।
  • हाई-स्किल प्रोफाइल्स को प्राथमिकता: सरकार की पैनी नजर कम वेतन वाले आवेदनों पर है। ऐसे में जो प्रोफेशनल्स हाई-स्किल और बेहतर वेतन वाली भूमिकाओं में हैं, उन्हें भविष्य में भी स्पॉन्सरशिप मिलने की संभावना मजबूत बनी रह सकती है।

फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी एजेंसियों की जांच और उसके नतीजों पर टिकी हैं। आने वाले महीनों में ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह नियामक सख्ती कॉग्नीजेंट और अन्य आईटी कंपनियों के काम करने के तरीके को कितना बदलती है और भारतीय टेक प्रोफेशनल्स की लाइफ पर इसका कितना गहरा प्रभाव पड़ता है।

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