8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की लग गई लॉटरी! अब 50% नहीं, सीधे 100% मिलेगी पेंशन?
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इस बार केवल फिटमेंट फैक्टर या महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की ही बात नहीं हो रही, बल्कि रिटायर हो चुके कर्मचारियों की किस्मत बदलने के लिए पेंशन के नियमों में एक बहुत बड़ा फेरबदल करने की तैयारी चल रही है। सरकार इस बार रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए एक नई और धांसू पेंशन व्यवस्था शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
अब 50 नहीं, सीधे 67 फीसदी मिलेगी पेंशन!नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NCJCM) ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे अपने ज्ञापन में कर्मचारियों की पेंशन बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है। काउंसिल का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद कम से कम दो लोगों के परिवार का गुजारा सम्मानजनक तरीके से हो सके, इसके लिए मौजूदा 50 फीसदी पेंशन के नियम को बदला जाना चाहिए। नई मांग के मुताबिक, अब रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को ‘आखिरी बेसिक सैलरी का 67 फीसदी’ या फिर ‘पिछले 10 महीनों की सैलरी का औसत’ तय किया जाना चाहिए।
हर 5 साल में बढ़ेगी पेंशन, 90 की उम्र में मिलेगी 100% सैलरीइस बार के प्रस्ताव में एक संसदीय स्थायी समिति की बेहद खास सिफारिश का भी जिक्र किया गया है। इस सिफारिश के अनुसार, कर्मचारियों के रिटायर होने के बाद हर पांच साल में उनकी पेंशन में 5 फीसदी की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जानी चाहिए। अगर इस फॉर्मूले को हरी झंडी मिलती है, तो बढ़ती उम्र के साथ पेंशन का गणित कुछ इस तरह बदल जाएगा:
- 65 साल की उम्र होने पर: आखिरी वेतन का 70 फीसदी
- 70 साल की उम्र होने पर: आखिरी वेतन (LPD) का 75 फीसदी
- 75 साल की उम्र होने पर: आखिरी वेतन (LPD) का 80 फीसदी
- 80 साल की उम्र होने पर: आखिरी वेतन (LPD) का 85 फीसदी
- 85 साल की उम्र होने पर: आखिरी वेतन (LPD) का 90 फीसदी
- 90 साल की उम्र होने पर: आखिरी वेतन (LPD) का पूरा 100 फीसदी
पेंशन को लेकर चल रही इस बहस के बीच एक और शानदार प्रस्ताव सामने आया है, जिसने कर्मचारियों की खुशी दोगुनी कर दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार कर्मचारियों को अपनी जरूरत और सहूलियत के हिसाब से अपनी पसंदीदा पेंशन स्कीम चुनने की पूरी आजादी दे सकती है। कर्मचारी खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें पुरानी पेंशन योजना (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या फिर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से किसमें जाना है।
आपको बता दें कि ओपीएस (OPS) एक फिक्स्ड पेंशन की गारंटी देती है, जिसका पूरा खर्च सरकार उठाती है और कर्मचारियों को अपनी जेब से कुछ नहीं देना पड़ता। वहीं एनपीएस (NPS) एक कंट्रीब्यूशन बेस्ड मॉडल है, जहां कर्मचारी और सरकार दोनों मिलकर फंड में पैसा जमा करते हैं और फाइनल पेंशन बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है। इसी बाजार के जोखिम को खत्म करने के लिए यूपीएस (UPS) लाया गया है, जो एनपीएस की तरह कंट्रीब्यूशन भी लेता है और साथ ही एक निश्चित पेंशन की गारंटी भी देता है।
क्यों देश के 1.1 करोड़ लोगों की टिकी हैं इस पर नजरें?8वां वेतन आयोग देश के लिए इसलिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके लागू होने से देश के लगभग 1.1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के जीवन पर सीधा असर पड़ने वाला है। भारत में वेतन आयोग का एक लंबा इतिहास रहा है, जहां पहला वेतन आयोग जनवरी 1946 में गठित किया गया था। तब से लेकर अब तक हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग बनाने की परंपरा रही है। इसी कड़ी में 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था, और अब इसके तहत होने वाले बड़े बदलावों का इंतजार हर कोई कर रहा है।