IT सेक्टर में बड़ा धमाका: Cognizant निकालेगी 15,000 कर्मचारी, आपकी नौकरी कितनी सुरक्षित?

Newspoint

नई दिल्ली: ग्लोबल आईटी सेक्टर से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने टेक जगत में सनसनी फैला दी है। दिग्गज आईटी कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी कर रही है। कंपनी अपने बिजनेस को फिर से पटरी पर लाने और खर्चों में कटौती करने के लिए अपने वर्कफोर्स को छोटा करने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस छंटनी का सबसे बड़ा झटका भारत में काम कर रहे कर्मचारियों को लग सकता है।

Hero Image
दुनियाभर में 15,000 नौकरियों पर संकट

खबरों की मानें तो कॉग्निजेंट अपने पुनर्गठन (Restructuring) अभियान के तहत दुनियाभर में करीब 12,000 से 15,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है। कंपनी अपने ऑपरेशन्स को और अधिक कुशल और किफायती बनाने की कोशिश कर रही है। आईटी इंडस्ट्री में इस समय डिमांड काफी धीमी है और कंपटीशन बढ़ता जा रहा है, यही वजह है कि कंपनियां अब गैर-जरूरी खर्चों को कम करने और नई टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाने के लिए छंटनी का सहारा ले रही हैं।

भारतीय कर्मचारियों पर क्यों गिरी गाज?

भारत कॉग्निजेंट के लिए सबसे बड़ा हब है। कंपनी के कुल 3,57,000 कर्मचारियों में से 2,50,000 से ज्यादा कर्मचारी अकेले भारत में काम करते हैं। यही कारण है कि जब भी कंपनी ग्लोबल लेवल पर कटौती की बात करती है, तो उसका सबसे ज्यादा असर भारतीय वर्कफोर्स पर पड़ता है। रिपोर्ट में यह भी अंदेशा जताया गया है कि मिड और सीनियर लेवल के अधिकारियों पर इसकी गाज सबसे ज्यादा गिर सकती है, क्योंकि कंपनियां अब ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रही हैं।

क्या है कंपनी का ‘Project Leap’?

यह पूरी छंटनी कंपनी की एक नई पहल ‘प्रोजेक्ट लीप’ (Project Leap) का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी ने रीस्ट्रक्चरिंग के लिए 230 मिलियन से 320 मिलियन डॉलर का बजट रखा है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा (लगभग 200 से 270 मिलियन डॉलर) उन कर्मचारियों को मुआवजे (Severance) के तौर पर दिया जाएगा जिन्हें निकाला जा रहा है। भारत में कर्मचारियों को निकालना कंपनी के लिए इसलिए भी “सस्ता” पड़ता है क्योंकि यहाँ विकसित देशों के मुकाबले वेतन और मुआवजे की लागत कम होती है।

कंपनी की भविष्य की रणनीति

कॉग्निजेंट अब अपनी पुरानी कार्यप्रणाली को छोड़कर नई रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी का मुख्य फोकस अब लागत कम करना, कम मुनाफे वाले बिजनेस से हाथ खींचना और ऑटोमेशन व AI में भारी निवेश करना है। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में अन्य आईटी कंपनियां भी इसी राह पर चल सकती हैं, जो भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए चिंता का विषय है।