सरकारी कर्मचारियों की हुई चांदी! सरकार ने दोबारा खोले पुरानी पेंशन के दरवाजे, आदेश हुआ जारी

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ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर देश भर के सरकारी कर्मचारियों के बीच पिछले लंबे समय से एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। जहां एक तरफ तमाम कर्मचारी संगठन आगामी 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने पुरानी पेंशन को पूरी तरह से बहाल करने की अपनी मांग पर मजबूती से अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक खास वर्ग के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन के दरवाजे दोबारा खोल दिए हैं।

सरकार का यह ताजा फैसला उन प्रभावित परिवारों के लिए एक बहुत बड़ी राहत बनकर आया है, जो पिछले कई सालों से अपनी पेंशन के स्टेटस को लेकर गहरे असमंजस और चिंता में डूबे हुए थे। केंद्र सरकार के इस नए आदेश के बाद अब कुछ विशेष कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के बजाय ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के तहत लाभ पाने के पूरी तरह से पात्र हो सकते हैं।

ओल्ड पेंशन को लेकर क्या नई खबर आई है?

बीती 22 जून 2026 को पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने एक नया और बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत 1 जनवरी 2004 के बाद सरकारी सेवा में भर्ती हुए कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को अब नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से बाहर निकालकर ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) का बड़ा फायदा दिया जाएगा।

इस नए आदेश में साफ तौर पर स्पष्ट किया गया है कि अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के विशेष मामलों में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की पात्रता तय करने के लिए नौकरी ज्वाइन करने की तारीख को आधार नहीं माना जाएगा, बल्कि नौकरी के लिए दिए गए आवेदन की तारीख को मुख्य आधार माना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर किसी पीड़ित परिवार ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए 31 दिसंबर 2003 या उससे पहले ही अपना आवेदन जमा कर दिया था, लेकिन सरकारी दफ्तरों की प्रशासनिक देरी के कारण उन्हें ज्वाइनिंग लेटर 1 जनवरी 2004 के बाद मिला, तो ऐसे सभी मामलों को अब पुरानी पेंशन योजना के तहत शामिल करने के लिए विचार किया जा सकता है।

सरकार ने बरसों पुराने नियम में क्या बड़ा बदलाव किया?

इस पूरे मामले और इसके महत्व को गहराई से समझने के लिए हमें थोड़ा इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। भारत सरकार ने देश में 1 जनवरी 2004 से बरसों से चली आ रही पुरानी पेंशन योजना को पूरी तरह से बंद करके एक नई बाजार आधारित पेंशन योजना (NPS) लागू कर दी थी। इस कट-ऑफ तारीख के बाद जितने भी लोगों की सरकारी विभागों में ज्वाइनिंग हुई, उन सभी को अनिवार्य रूप से एनपीएस के दायरे में रखा गया था। लेकिन इस बड़े नीतिगत फेरबदल के दौरान कई पीड़ित लोग सरकारी दफ्तरों की लेटलतीफी और प्रशासनिक देरी का बुरी तरह से शिकार हो गए थे, जिसे अब सुधारा गया है।

ओल्ड पेंशन योजना को लेकर जारी हुआ नया नियम क्या कहता है?

आवेदन की तारीख ही अब होगी मुख्य आधार

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सरकार ने यह बड़ा और न्यायपूर्ण फैसला किया है कि अब प्रभावित परिवारों को ओल्ड पेंशन का हकदार तय करने के लिए उनके द्वारा ‘नौकरी ज्वाइन करने की तारीख’ को नहीं देखा जाएगा, बल्कि उनके द्वारा ‘नौकरी के लिए पहली बार आवेदन करने की तारीख’ को ही असली आधार माना जाएगा।

सरकारी दफ्तरों की लेटलतीफी का नुकसान अब जनता को नहीं देश में कई मामले ऐसे अटके पड़े थे, जहां किसी सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान अचानक मृत्यु या मेडिकल ग्राउंड पर असमय रिटायरमेंट के बाद उनके आश्रित परिवार ने साल 2004 से पहले ही अनुकंपा नौकरी के लिए अर्जी दे दी थी। लेकिन सरकारी दफ्तरों की कछुआ चाल और लंबी कागजी कार्रवाई के चक्कर में उन्हें ज्वाइनिंग लेटर मिलने में देरी हुई और वह तारीख 1 जनवरी 2004 के पार चली गई, जिससे वे ओल्ड पेंशन से वंचित रह गए थे।

31 दिसंबर 2003 की तय की गई कट-ऑफ तारीख