ईरान युद्ध और महंगाई के बीच अचानक क्यों औंधे मुंह गिरे सोने और चांदी के भाव? पढ़ें पूरी सच्चाई
सोने और चांदी के बाजार में पिछले कुछ दिनों से जो हुआ है, उसने खरीदारों को हैरान कर दिया है। सोमवार से लेकर गुरुवार तक लगातार 4 दिनों तक सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। इस छोटी सी अवधि में चांदी करीब 7,000 रुपये तक टूट चुकी है, जबकि सोना भी लगभग 2,500 रुपये सस्ता हो गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी या फिर आने वाले दिनों में करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से पहले सोने-चांदी के भाव फिर से आसमान छूने लगेंगे?
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को भी गिरावट का यह सिलसिला जारी रहा। इस दौरान 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,231 रुपये सस्ता होकर 1.51 लाख रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं दूसरी ओर, एक किलो चांदी में 4,518 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह लुढ़ककर 2.28 लाख रुपये पर पहुंच गई।
क्या सोने-चांदी में यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी?कीमतों में आई इस अचानक गिरावट के बाद निवेशकों के मन में यह सवाल है कि क्या यह मंदी लंबी चलने वाली है? इस पर ऑस्ट्रेलिया के जाने-माने हेज फंड मैनेजर राफेल लैम का मानना है कि सोने में हालिया गिरावट केवल एक अस्थायी (Temporary) झटका है। उनका लॉन्ग-शॉर्ट गोल्ड फंड पिछले साल लॉन्च होने के बाद से निवेशकों को 200% से ज्यादा का शानदार नेट रिटर्न दे चुका है। लैम का साफ तर्क है कि सोने की लंबी अवधि की तेजी (Long-term Bull Run) को समर्थन देने वाले मुख्य कारण अभी भी पूरी तरह मजबूत बने हुए हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, लैम का कहना है कि दुनिया के बड़े बाजारों की वित्तीय हालत ठीक नहीं है, खासकर अमेरिकी सरकार पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज हो चुका है। इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की जा रही खरीदारी मीडियम से लॉन्ग टर्म में सोने की कीमतों को जबरदस्त सपोर्ट देगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में कीमतें मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान युद्ध की स्थिति, रियल ब्याज दरों और महंगाई के नए आंकड़ों के आधार पर तय होंगी।
ईरान युद्ध और ब्याज दरों का सोना पर दबावआपको बता दें कि जनवरी में अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर को छूने के बाद से ही सोने पर लगातार दबाव बना हुआ है। ग्लोबल मार्केट में एनर्जी की कीमतें बढ़ने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की अटकलों ने सोने जैसी ब्याज न देने वाली कीमती धातुओं को प्रभावित किया है। फरवरी के आखिर में जब से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तब तक सोने की कीमतों में करीब 16% की गिरावट आ चुकी है।
राफेल लैम ने एक इंटरव्यू में कहा कि “ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने के बाजार के सामने कुछ मुश्किलें जरूर खड़ी हुई हैं, लेकिन हमारे आकलन के मुताबिक ये बाधाएं बहुत ही अस्थायी हैं। सोने की मांग को बढ़ावा देने वाले ज्यादातर बुनियादी कारक मध्यम अवधि में न केवल बने रहेंगे, बल्कि और अधिक मजबूत होंगे।”
सिडनी में सोने का भाव और एक्सपर्ट्स की रणनीतिगुरुवार को शाम के समय सिडनी में सोना 4,286.01 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। इस गिरावट के बीच बड़े निवेशकों की क्या रणनीति रही, इस पर लैम ने बताया कि जब सोने की कीमत 4,000 डॉलर के नीचे गई थी, तो उनके फंड ने अपनी लॉन्ग पोजीशन को काफी आक्रामक तरीके से बढ़ाना शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्होंने अपनी पोजीशन को लो-टू-मिड 60% नेट लॉन्ग पर बरकरार रखा है। यदि भविष्य में सोने की कीमतों में और अधिक तेजी की उम्मीदें सच साबित होती हैं, तभी उनका फंड अपनी लॉन्ग पोजीशन घटाने पर विचार करेगा।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सिर्फ मार्केट ट्रेंड और एक्सपर्ट्स के विचारों पर आधारित है। किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से पूरी चर्चा जरूर कर लें।)