महंगी कृषि मशीन खरीदी और वारंटी में मरम्मत से कंपनी ने कर दिया इनकार? किसान ऐसे लें अपना हक

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किसान लाखों रुपये की मशीन इसलिए खरीदता है कि खेती का काम समय पर और आसानी से हो जाए। लेकिन असली परीक्षा तब होती है, जब वारंटी अवधि के भीतर मशीन खराब हो जाए और कंपनी या डीलर मरम्मत करने से यह कहकर इनकार कर दे कि खराबी आपकी गलती से हुई है। ऐसी स्थिति में ज्यादातर किसान या तो जेब से पैसा लगाकर मरम्मत करा लेते हैं या मशीन खड़ी रखकर नुकसान झेलते हैं। जबकि हकीकत यह है कि ग्राहक के पास कई रास्ते मौजूद हैं, बशर्ते कदम सही क्रम में उठाए जाएं।

वारंटी में इनकार क्यों होता है और पहले क्या देखें

सबसे पहले वारंटी कार्ड और खरीद के दस्तावेज ध्यान से पढ़ें। वारंटी में यह लिखा होता है कि कौन-से हिस्से कितनी अवधि तक ढके हुए हैं और किन हालातों में वारंटी लागू नहीं होती, जैसे दुर्घटना, बिना अनुमति खुलवाई गई मशीन या गलत इस्तेमाल। कंपनी का इनकार सुनते ही बहस में समय गंवाने के बजाय यह मांग करें कि इनकार का कारण लिखित में दिया जाए। मौखिक इनकार का कोई मूल्य नहीं होता, लिखित कारण आगे की पूरी कार्यवाही का आधार बनता है।

दूसरा काम है अपने सबूत इकट्ठा करना।

खरीद की रसीद, वारंटी कार्ड, हर सर्विस का रिकॉर्ड और जॉब कार्ड की प्रतियां संभालकर रखें। जॉब कार्ड वह दस्तावेज है जो मशीन सर्विस सेंटर में जमा करते समय बनता है और उस पर खराबी की शिकायत दर्ज होती है। हर बार मशीन जमा करते समय जॉब कार्ड पर शिकायत साफ शब्दों में लिखवाएं और उसकी प्रति या फोटो अपने पास रखें। मशीन की खराबी की तस्वीरें और वीडियो भी सबूत के तौर पर काम आते हैं।

कंपनी के भीतर ही शिकायत का सही क्रम

पहला कदम डीलर और सर्विस सेंटर के बाद कंपनी की ग्राहक सेवा पर शिकायत दर्ज करना है।

शिकायत फोन, ईमेल या कंपनी की वेबसाइट से दर्ज करें और शिकायत संख्या जरूर लें। ईमेल से की गई शिकायत इसलिए बेहतर होती है, क्योंकि उसका लिखित रिकॉर्ड रहता है। यदि ग्राहक सेवा से समाधान न मिले तो कंपनी के नोडल अधिकारी या उच्च शिकायत प्रकोष्ठ तक मामला पहुंचाएं। हर स्तर पर दिया गया समय और जवाब संभालकर रखें।

कई बार कंपनी यह कहकर पल्ला झाड़ लेती है कि मशीन का गलत इस्तेमाल हुआ है। यदि आपको लगता है कि आरोप सही नहीं है, तो किसी स्वतंत्र और जानकार मैकेनिक या संस्थान से मशीन की तकनीकी जांच कराने की मांग करें या उसकी व्यवस्था करें।

स्वतंत्र जांच की रिपोर्ट उपभोक्ता आयोग के सामने आपके पक्ष को मजबूत करती है, क्योंकि फिर फैसला सिर्फ कंपनी की बात पर नहीं, तकनीकी सबूत पर होता है।

बात न बने तो उपभोक्ता आयोग का रास्ता

कंपनी स्तर पर समाधान न मिले तो उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उपभोक्ता आयोग में शिकायत की जा सकती है। अब यह शिकायत ई-दाखिल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन भी दर्ज होती है, जिससे जिला आयोग के चक्कर कम हो जाते हैं। शिकायत में खरीद के दस्तावेज, वारंटी कार्ड, जॉब कार्ड, कंपनी से हुआ पत्र-व्यवहार और स्वतंत्र जांच रिपोर्ट जैसे सबूत लगाएं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है और मार्गदर्शन मिल सकता है।

ध्यान रखें, शिकायत की प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है, इसलिए फसल के मौसम को देखते हुए मशीन की अस्थायी व्यवस्था भी साथ-साथ सोचें। लेकिन अपना हक छोड़ देना सही रास्ता नहीं है। दस्तावेज पूरे हों और शिकायत सही क्रम में की जाए तो वारंटी का लाभ मिलना किसान का अधिकार है और कंपनी को अपनी लिखी शर्तों का पालन करना ही पड़ता है।