दिल्ली में कदम रखते ही पुतिन ने मचाया तहलका, क्यों बेचैन हुए डोनाल्ड ट्रंप?

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आज पूरी दिल्ली छावनी में तब्दील है क्योंकि ब्रिक्स (BRICS) समिट के लिए भव्य मंच सज चुका है और पूरी दुनिया की नजरें भारत में आयोजित हो रहे इस ऐतिहासिक सम्मेलन पर टिकी हैं। इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत की धरती पर कदम रख चुके हैं।

जिस दौरान पुतिन दिल्ली पहुंचे, उनका कड़ा और अभेद्य सुरक्षा घेरा देखकर पूरी दुनिया दंग रह गई।

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एयरपोर्ट पर पुतिन का केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने जोरदार और गर्मजोशी से स्वागत किया। आपको बता दें कि ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए तमाम बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष यहां पहुंच चुके हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा नजरें पुतिन और शी जिनपिंग पर ही टिकी हुई हैं। जब भारत, रूस और चीन जैसी तीन बड़ी शक्तियां एक टेबल पर एक साथ बैठेंगी, तो जाहिर तौर पर अमेरिका जैसे देशों की नींद उड़ना तय है। यही वजह है कि जैसे ही ब्रिक्स नेताओं का भारत आगमन शुरू हुआ, डोनाल्ड ट्रंप बेचैन और परेशान नजर आने लगे।

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आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अहम द्विपक्षीय मुलाकात होने वाली है। इस समिट और द्विपक्षीय बातचीत में ऊर्जा, रक्षा सहयोग से लेकर व्यापार, निवेश और जमीनी स्तर पर भागीदारी बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।

गौरतलब है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद किसी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पुतिन की यह पहली विदेश यात्रा है। यानी युद्ध के इस दौर में पुतिन पहली बार भारतीय दौरे पर आए हैं।

इस बैठक के दौरान पीएम मोदी और पुतिन भारत-रूस संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे।

यह दौरा 31 अगस्त को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद हो रहा है। किर्गिस्तान के बिश्केक में हुई उस बैठक में दोनों नेताओं ने राजनीतिक संबंधों, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की थी, साथ ही पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में जारी संघर्षों पर भी गंभीर चर्चा की थी।

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पुतिन का यह दिल्ली दौरा एक ऐसे नाजुक समय पर हो रहा है जब भारत और रूस अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं। लेकिन दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप लगातार इसमें टांग अड़ाने की कोशिश करते दिखे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के नाम पर ट्रंप ने कई जतन किए—कभी भारत पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की तो कभी रूस से संबंध तोड़ने की धमकियां दीं। इसके बावजूद भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंध वक्त के साथ और भी मजबूत होते चले गए हैं।

पुतिन का यह दौरा रणनीतिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है।

यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से रूस पर भू-राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने पहले ही यह जानकारी दी थी कि दोनों देश रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और भारत को अत्याधुनिक ‘सुखोई एसयू-57’ (Su-57) स्टील्थ फाइटर जेट बेचने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। मॉस्को से एक वर्चुअल ब्रीफिंग के दौरान पेसकोव ने स्पष्ट किया था कि राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी के बीच तय द्विपक्षीय बैठक में सबसे पहले द्विपक्षीय एजेंडे, व्यापार और आर्थिक सहयोग के विशाल दायरे पर बात होगी।

इसके साथ ही, इस ऐतिहासिक दौरे के सबसे प्रमुख एजेंडों में भारत को रूस के 5वीं पीढ़ी के एसयू-57 स्टील्थ फाइटर जेट्स की संभावित बिक्री भी शामिल हो सकती है।