अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने साल 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बड़ा कदम उठाते हुए इसमें 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 4 प्रतिशत की लक्ष्य सीमा में पहुंचा दिया गया है। आगामी 15-16 सितंबर को संपन्न हुई एफओएमसी (FOMC) की महत्वपूर्ण बैठक में यह फैसला देश में लगातार ऊंचे बने हुए महंगाई के आंकड़ों के बीच लिया गया है।
आपको बता दें कि हाल ही में अगस्त महीने में अमेरिका की उपभोक्ता महंगाई दर सालाना आधार पर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जो कि फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के तय लक्ष्य से अभी भी काफी ज्यादा ऊपर है।
ग्लोबल मार्केट में धड़ाम हुए सोना और चांदी
फेडरल रिजर्व के इस बड़े फैसले के आते ही इसका असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में देखने को मिलने लगा। सेबी रजिस्टर्ड मार्केट और कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, फेडरल रिजर्व का यह फैसला लगभग बाजार की उम्मीदों के मुताबिक ही रहा है, जहां एफओएमसी ने ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इन्हें 4 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है।
हालांकि, यह कदम फिलहाल ग्लोबल मार्केट के लिए काफी दबाव वाला साबित हो रहा है, जिसका सबसे बुरा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है। फेड का फैसला सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दोनों औंधे मुंह गिर पड़े। सोना अचानक 80 डॉलर की भारी गिरावट के साथ 4288 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि चांदी भी फिसलकर सीधे 63 डॉलर प्रति औंस के लेवल पर आ गई।
विशेषज्ञ अनुज गुप्ता का कहना है कि ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी से अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड को जबरदस्त सपोर्ट मिला है, जिसकी वजह से डॉलर में कीमत तय होने वाली सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर भयंकर बिकवाली का दबाव बन गया है।
इस फैसले के तुरंत बाद डॉलर इंडेक्स में भी जोरदार रिकवरी दर्ज की गई और यह करीब 111.97 के आसपास पहुंच गया। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी 10-ईयर बॉन्ड यील्ड करीब 4.05 प्रतिशत और 30-ईयर बॉन्ड यील्ड करीब 4.11 प्रतिशत के इर्द-गिर्द बनी रही। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई इस तेजी को हमेशा से ही सोने के लिए एक बड़ी चुनौती माना जाता है।
आगे कैसी रहेगी चाल और भारतीय बाजारों पर असर?
कीमती धातुओं के जानकारों का कहना है कि अब सोने और चांदी की आगे की चाल पूरी तरह से कुछ अहम तकनीकी स्तरों पर टिकी होगी।
अनुज गुप्ता के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के लिए 4200 डॉलर का स्तर एक बहुत बड़ा और मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि चांदी के लिए 62 डॉलर का सपोर्ट सबसे ज्यादा अहम रहने वाला है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेड के इन तीखे नतीजों के बाद आज भारतीय शेयर बाजार और घरेलू सर्राफा बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।
ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी के बाद अब पूरी दुनिया के निवेशकों की नजरें फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों पर टिक गई हैं। इतना ही नहीं, फेड ने साल 2026 में आगे भी दरों में और बढ़ोतरी करने की संभावना का संकेत दे दिया है।
ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में अमेरिकी डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड के आंकड़े और वहां की महंगाई दर के नए आंकड़े ही यह तय करेंगे कि ग्लोबल और भारतीय बाजार में सोना-चांदी किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।