ज्वेलर्स को लगेगा तगड़ा झटका! सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच इस साल 15% तक घट जाएगी गहनों की बिक्री, आई बड़ी रिपोर्ट
नई दिल्ली: अगर आप भी सोना खरीदने या शादी-ब्याह के लिए भारी-भरकम ज्वेलरी बनवाने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है. सोने की लगातार बढ़ती कीमतों और सरकार द्वारा आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाए जाने का असर अब देश के ज्वेलरी कारोबार पर साफ दिखने लगा है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स (CRISIL Ratings) की एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में गोल्ड ज्वेलरी की बिक्री में 13 से 15 फीसदी तक की भारी गिरावट आ सकती है.
इस महंगाई का असर ग्राहकों की पसंद पर भी पड़ रहा है. लोग अब भारी-भरकम गहनों की जगह हल्के वजन वाले और कम कैरेट के आभूषणों की तरफ रुख कर रहे हैं. हालांकि, इस पूरी तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि भले ही गहनों की बिक्री कम हो रही हो, लेकिन ऊंची कीमतों के चलते ज्वेलर्स की तिजोरी खाली नहीं रहने वाली है और उनकी मोटी कमाई की उम्मीद अब भी बनी हुई है.
रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दाम, कस्टम ड्यूटी ने बढ़ाई और आफत क्रिसिल की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सोने के दाम इस समय अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं. इसके ऊपर से सरकार द्वारा हाल ही में गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी कर दिया गया है. इस सरकारी फैसले के बाद सोने के गहने आम आदमी की पहुंच से और दूर यानी बेहद महंगे हो गए हैं, जिसका सीधा और सीधा असर ग्राहकों की जेब और उनकी खरीदारी की क्षमता पर पड़ रहा है.हालांकि, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि बिक्री की मात्रा (वॉल्यूम) घटने के बावजूद ज्वेलर्स की कमाई बढ़ने की पूरी उम्मीद है.
इसकी मुख्य वजह सोने की ऊंची कीमतें ही हैं. रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वित्त वर्ष में संगठित (Organized) ज्वेलर्स का राजस्व यानी रेवेन्यू 20 से 25 फीसदी तक बढ़ सकता है. यानी बिक्री कम होने के बाद भी महंगे सोने के दम पर मुनाफा बरकार रहेगा. भारी गहनों से तौबा, अब हल्के और कम कैरेट वाले आभूषणों का बढ़ा क्रेजसोने की बेतहाशा महंगाई के कारण अब ग्राहकों के ट्रेंड में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अब लोग शादी-ब्याह या त्योहारों में भारी गहनों की जगह हल्के वजन वाले और कम कैरेट के ज्वेलरी आइटम खरीदने में समझदारी दिखा रहे हैं.
दूसरी तरफ, निवेश (Investment) के लिहाज से लोग अब गहनों के बजाय गोल्ड बार और गोल्ड कॉइन (सिक्के) खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. यही वजह है कि पिछले दो सालों के भीतर देश में गोल्ड बार और सिक्कों की कुल बिक्री में 50 फीसदी से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
भारत ने किया रिकॉर्ड तोड़ इंपोर्ट, सरकार ने उठाया सख्त कदमरिपोर्ट के अनुसार, बीते वित्त वर्ष 2026 में भारत ने करीब 720 टन सोने का आयात (Import) किया था, जिसकी वजह से देश से 72 अरब डॉलर की भारी-भरकम विदेशी मुद्रा बाहर चली गई.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन ऊंची कीमतों और बढ़े हुए आयात शुल्क की वजह से इस साल गोल्ड ज्वेलरी की कुल बिक्री घटकर महज 620 से 640 टन तक ही सिमट कर रह सकती है. अगर ऐसा होता है, तो यह स्तर पिछले एक दशक में सबसे कम माना जाएगा. हालांकि, खुद को बाजार में टिकाए रखने के लिए बड़े और संगठित ज्वेलर्स अब छोटे शहरों में फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए तेजी से अपने पैर पसार रहे हैं.