PM Modi Salary: भारत के प्रधानमंत्री को हर महीने कितना मिलता है वेतन? जानिए पूरा हिसाब-किताब
दुनिया के अलग-अलग देशों में राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों को मिलने वाले वेतन में काफी बड़ा और चौंकाने वाला अंतर देखने को मिलता है. जहां एक तरफ कुछ देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को करोड़ों रुपये का सालाना पैकेज दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के कई सबसे बड़े और शक्तिशाली देशों के शीर्ष नेताओं का आधिकारिक वेतन इसके मुकाबले काफी कम है.
इस पूरे मामले में सिंगापुर सबसे अलग और अनोखा नजर आता है, जहां के प्रधानमंत्री को किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ (CEO) जैसा कॉरपोरेट स्तर का वेतन दिया जाता है. सिंगापुर सरकार लंबे समय से यह तर्क देती आ रही है कि नेताओं को आकर्षक और बेहतरीन वेतन मिलने से प्राइवेट सेक्टर की योग्य और प्रतिभावान हस्तियों को राजनीति व प्रशासन में आने के लिए प्रोत्साहन मिलता है. सरकार का मानना है कि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और देश में बेहतर प्रशासन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है. आइए जानते हैं कि दुनिया के कुछ सबसे प्रमुख नेताओं की सालाना सैलरी कितनी है और इस लिस्ट में भारत के प्रधानमंत्री कहां खड़े हैं.
1. सिंगापुर: लॉरेंस वोंग की सैलरी सबसे ज्यादा
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग को पूरी दुनिया में सबसे अधिक वेतन पाने वाले सरकारी प्रमुखों में गिना जाता है. उन्हें सालाना करीब 2.2 मिलियन सिंगापुर डॉलर का वेतन दिया जाता है, जो भारतीय मुद्रा में देखा जाए तो लगभग 18 से 20 करोड़ रुपये के आसपास बैठता है.
सिंगापुर में नेताओं और मंत्रियों के इतने भारी-भरकम वेतन को लेकर समय-समय पर बहस भी होती रही है. खुद प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग भी यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि आम नागरिकों की कमाई की तुलना में यह रकम काफी अधिक है. हालांकि, उनका मानना और तर्क है कि देश की तेज आर्थिक प्रगति और बेहतर राजनीतिक नेतृत्व को बनाए रखने के लिए इस तरह की वेतन व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण है.
2. हांगकांग: जॉन ली भी टॉप पर काबिज
हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली भी दुनिया के सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले राजनीतिक नेताओं में शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी सालाना आय करीब 7,19,000 अमेरिकी डॉलर है, जो भारतीय रुपये में लगभग 6.8 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है.
भले ही हांगकांग अपने आप में एक पूरी तरह संप्रभु देश नहीं है, लेकिन वहां के शीर्ष प्रशासनिक पद पर बैठे नेता को मिलने वाली यह सैलरी दुनिया के कई बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षों के वेतन से काफी ज्यादा है.
3. स्विट्जरलैंड: अलग राजनीतिक व्यवस्था, फिर भी बड़ा वेतन
स्विट्जरलैंड की शासन प्रणाली बाकी दुनिया के देशों से काफी अलग है. यहां पूरी सत्ता किसी एक राष्ट्रपति के हाथों में केंद्रित नहीं होती, बल्कि सात सदस्यों वाली एक ‘फेडरल काउंसिल’ मिलकर पूरे देश का संचालन करती है. इन सात सदस्यों में से ही किसी एक को हर साल बारी-बारी से ‘फेडरल प्रेसिडेंट’ के रूप में चुना जाता है.
फेडरल काउंसिल के सदस्यों और राष्ट्रपति का सालाना वेतन करीब 5 लाख स्विस फ्रैंक बताया जाता है. भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 5.7 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है. इस लिहाज से देखा जाए तो स्विट्जरलैंड के शीर्ष राजनीतिक पद का वेतन अमेरिका के राष्ट्रपति से भी अधिक है.
4. अमेरिका: डोनाल्ड ट्रंप को सालाना मिलते हैं 4 लाख डॉलर
अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक वेतन लंबे समय से एक तय व्यवस्था के तहत फिक्स है. अमेरिकी राष्ट्रपति को सालाना 4 लाख अमेरिकी डॉलर दिए जाते हैं, जो भारतीय रुपये में करीब 3.3 करोड़ रुपये के बराबर होता है.
इसके अलावा, राष्ट्रपति को सालाना 50,000 डॉलर का विशेष खर्च भत्ता, 1 लाख डॉलर का गैर-कर योग्य (Non-taxable) यात्रा भत्ता और मनोरंजन से जुड़ी कई अतिरिक्त सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं. हालांकि, अगर केवल मूल वेतन की तुलना की जाए तो अमेरिका के राष्ट्रपति की सैलरी सिंगापुर के प्रधानमंत्री के मुकाबले काफी कम ठहरती है.
5. ब्रिटेन: केअर स्टारमर को मिलती है दोहरी सैलरी
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टारमर को एक सांसद (MP) के रूप में मिलने वाले वेतन के साथ-साथ प्रधानमंत्री पद का अतिरिक्त वेतन भी प्राप्त होता है. इन दोनों को मिलाकर उनकी कुल सालाना आय करीब 1.67 लाख ब्रिटिश पाउंड बताई जाती है.
देखा जाए तो अमेरिका और ब्रिटेन जैसे महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं की सैलरी सिंगापुर के प्रधानमंत्री की तुलना में काफी कम है. हालांकि, प्रधानमंत्री पद से जुड़ी तमाम आधिकारिक सुविधाएं, आवास और सुरक्षा व्यवस्थाएं उन्हें अलग से दी जाती हैं.
6. चीन: शी जिनपिंग का आधिकारिक वेतन बेहद कम
चीन के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी जिनपिंग का आधिकारिक मूल वेतन दुनिया के कई प्रमुख नेताओं की तुलना में काफी कम दिखाई देता है. वर्ष 2015 में चीन में सिविल सर्विस वेतन ढांचे में बड़ा सुधार किया गया था, जिसके बाद राष्ट्रपति का मासिक मूल वेतन बढ़कर करीब 11,385 युआन तय हुआ था.
इस आंकड़े के आधार पर उनका सालाना मूल वेतन केवल 22,000 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 18 से 20 लाख भारतीय रुपये के आसपास ही बैठता है. हालांकि, चीनी राष्ट्रपति को सरकार की तरफ से आलीशान आधिकारिक आवास, विश्वस्तरीय सुरक्षा, भोजन और अन्य सभी जरूरी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं.
7. भारत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सालाना सैलरी करीब 20 लाख रुपये
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आधिकारिक वेतन भी दुनिया के कई बड़े देशों के नेताओं की तुलना में काफी कम है. प्रधानमंत्री को हर महीने करीब 1.66 लाख रुपये वेतन और अलग-अलग भत्ते मिलते हैं. इस हिसाब से उनकी सालाना कमाई का आंकड़ा लगभग 20 लाख रुपये के आसपास ही बैठता है.
प्रधानमंत्री के वेतन में अलग-अलग मदें जुड़ी होती हैं. इनमें करीब 50,000 रुपये का मासिक मूल वेतन, 45,000 रुपये का संसदीय भत्ता और 3,000 रुपये का व्यय भत्ता शामिल है. इसके अलावा, संसद सत्र के दौरान या किसी आधिकारिक यात्रा पर रहने के दौरान दैनिक भत्ता भी दिया जाता है.
सैलरी की इस रेस में भारत कहां खड़ा है?
दुनिया भर के प्रमुख नेताओं की आधिकारिक सैलरी पर नजर डालें तो भारत के प्रधानमंत्री का वेतन शीर्ष अमीर देशों की तुलना में काफी नीचे नजर आता है. एक तरफ जहां सिंगापुर में प्रधानमंत्री को सालाना करीब 18 से 20 करोड़ रुपये दिए जाते हैं, वहीं भारत में प्रधानमंत्री का आधिकारिक सालाना वेतन करीब 20 लाख रुपये ही है.
इस सीधी तुलना से यह साफ हो जाता है कि किसी भी देश के नेता की सैलरी केवल उस देश की अर्थव्यवस्था के आकार या उसकी आबादी पर निर्भर नहीं करती. हर देश अपनी विशेष राजनीतिक व्यवस्था, प्रशासनिक ढांचे और सार्वजनिक सेवा के मूल्यों को ध्यान में रखते हुए अपनी वेतन नीतियां तय करता है.