Petrol Diesel Crisis : क्या देश में बढ़ रहा ईंधन संकट? सरकार ने बताया- देश में कितने दिनों का स्टॉक मौजूद
अमेरिका इजराइल-ईरान युद्ध छिड़ने के बाद से भारत का समुद्री व्यापार, विशेषकर ऊर्जा क्षेत्र में, बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई है। भारत की ईंधन आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों और पश्चिम एशियाई देशों से आता था। इस बीच देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की लंबी कतारों तथा राशनिंग की खबरों को लेकर सोमवार को संसद की एक समिति की बैठक में तीखी चर्चा हुई। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों से विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर सवाल पूछे। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि देश कच्चे तेल का भंडार कितना मौजूद है।
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पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति को बताया कि देश के पास अगले 78 दिनों के लिए पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। सूत्रों के अनुसार, परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में पश्चिम एशिया संकट का समुद्री व्यापार पर असर विषय पर चर्चा हुई।
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अधिकारियों ने समिति को भरोसा दिलाया कि सरकार ईंधन की कमी न होने देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध कब खत्म होगा, इसे लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। बैठक में विपक्षी सांसदों ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कथित कमी का मुद्दा भी उठाया। कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़े साझा नहीं किए।ALSO READ: NEET paper leak : डॉक्टर बनने का सपना बना बोझ? 12 दिनों में 5 स्टूडेंट्स ने दी जान, सिर्फ जांच और गिरफ्तारियां, जिम्मेदार मौन
विपक्षी सांसदों ने यह सवाल भी उठाया कि जब यह पहले से स्पष्ट था कि पश्चिम एशिया का युद्ध जल्दी खत्म नहीं होगा, तो सरकार ने पहले से जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए। सांसदों ने कहा कि आम लोगों को महंगे तेल और उर्वरकों की मार से बचाने के लिए पहले से योजना बनानी चाहिए थी। उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों ने संसदीय समिति को आश्वस्त किया कि खरीफ बुवाई से पहले देश में खाद की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
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13 जहाज अभी भी फंसेसूत्रों के अनुसार शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति को बताया कि मार्च महीने में पश्चिम एशिया में 37 भारतीय जहाज फंसे थे, जिनमें से अब भी 13 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण अटके हुए हैं। Edited by : Sudhir Sharma