Newspoint Logo

Home Loan Rules: उधारकर्ता की मृत्यु के बाद होम लोन का क्या होता है? जानिए बैंक के अधिकार और परिवार की जिम्मेदारियां

Newspoint
सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि उधारकर्ता की मृत्यु के बाद बैंक तुरंत घर या संपत्ति को जब्त नहीं करता है। बैंक का मुख्य उद्देश्य अपना पैसा वापस पाना होता है, न कि किसी को बेघर करना। इसलिए, बैंक एक प्रक्रिया का पालन करता है और परिवार को संभलने और भुगतान करने का पूरा मौका देता है।
Hero Image


1. सबसे पहले को-एप्लीकेंट (Co-applicant) से संपर्क

जब किसी उधारकर्ता की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक सबसे पहले लोन के को-एप्लीकेंट यानी सह-आवेदक से संपर्क करता है। होम लोन लेते समय अक्सर पति-पत्नी या पिता-पुत्र को सह-आवेदक बनाया जाता है। बैंकिंग नियमों के अनुसार, मुख्य उधारकर्ता की मृत्यु के बाद लोन चुकाने की पूरी जिम्मेदारी को-एप्लीकेंट की होती है। यदि को-एप्लीकेंट जीवित है और सक्षम है, तो उसे बाकी की ईएमआई (EMI) भरनी पड़ती है और लोन की शर्तें वैसी ही रहती हैं।

2. अगर को-एप्लीकेंट न हो तो गारंटर (Guarantor) की भूमिका

अगर लोन में कोई को-एप्लीकेंट नहीं है या वह भी भुगतान करने में असमर्थ है, तो बैंक उस व्यक्ति के पास जाता है जिसने लोन के लिए गारंटी दी थी। गारंटर वह व्यक्ति होता है जिसने लोन लेते समय यह लिखित वादा किया था कि यदि उधारकर्ता पैसा नहीं चुका पाता है, तो वह जिम्मेदारी लेगा। ऐसी स्थिति में बैंक गारंटर से बकाया राशि चुकाने की मांग कर सकता है।


3. कानूनी वारिस (Legal Heirs) की जिम्मेदारी

मान लीजिए कि लोन में न तो कोई को-एप्लीकेंट है और न ही कोई गारंटर। ऐसी स्थिति में बैंक मृतक के कानूनी वारिसों (जैसे पत्नी, बच्चे या माता-पिता) से संपर्क करता है। यहाँ यह समझना बहुत जरूरी है कि कानून के मुताबिक, वारिसों पर सीधे तौर पर कर्ज चुकाने की बाध्यता नहीं होती है। बैंक उन पर अपनी जेब से पैसा भरने का दबाव नहीं बना सकता।

हालांकि, अगर कानूनी वारिस मृतक की संपत्ति (जिस पर लोन लिया गया है) को अपने नाम करवाना चाहते हैं या उसका उत्तराधिकार लेना चाहते हैं, तो उन्हें उस संपत्ति पर बकाया कर्ज को चुकाना होगा। आप संपत्ति के मालिक तभी बन सकते हैं जब आप उससे जुड़े कर्ज को खत्म कर दें।


बैंक संपत्ति को कब जब्त कर सकता है?

बैंक संपत्ति को जब्त करने का कदम सबसे आखिर में उठाता है। यह तब होता है जब:

  1. को-एप्लीकेंट ईएमआई भरने से मना कर दे या असमर्थ हो।

  2. गारंटर भी भुगतान न करे।

  3. कानूनी वारिस भी कर्ज चुकाने या संपत्ति की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दें।


जब बैंक को लगता है कि पैसा वापस आने का कोई रास्ता नहीं बचा है, तो वह सरफेसी एक्ट (SARFAESI Act) के तहत कार्रवाई शुरू करता है। लेकिन इसमें भी बैंक सीधे घर पर ताला नहीं लगाता। सबसे पहले परिवार को नोटिस भेजा जाता है और उन्हें भुगतान के लिए समय दिया जाता है। अगर नोटिस अवधि खत्म होने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकलता, तो बैंक संपत्ति को अपने कब्जे में ले लेता है और उसकी नीलामी (Auction) करता है।

नीलामी के बाद पैसे का क्या होता है? अगर बैंक संपत्ति को नीलाम करता है, तो नीलामी से मिलने वाली राशि से सबसे पहले बैंक अपना बकाया लोन और ब्याज वसूलता है। अगर इसके बाद कुछ पैसा बच जाता है, तो वह राशि मृतक के कानूनी वारिसों को लौटा दी जाती है।

होम लोन इंश्योरेंस: एक वरदान

इस पूरी प्रक्रिया में एक चीज है जो परिवार को इस संकट से पूरी तरह बचा सकती है, और वह है 'होम लोन इंश्योरेंस' (Loan Protection Insurance)। अगर उधारकर्ता ने लोन लेते समय होम लोन इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, तो उसकी मृत्यु के बाद लोन चुकाने की जिम्मेदारी परिवार पर नहीं आती।

ऐसी स्थिति में, बीमा कंपनी बैंक को बाकी बची हुई पूरी लोन राशि का भुगतान करती है। इससे न केवल घर सुरक्षित रहता है, बल्कि परिवार पर ईएमआई का बोझ भी नहीं पड़ता। बैंक बीमा कंपनी से क्लेम लेकर लोन खाता बंद कर देता है और घर के कागजात परिवार को सौंप देता है। इसलिए वित्तीय सलाहकार हमेशा यही सलाह देते हैं कि बड़ा लोन लेते समय उसका बीमा जरूर करवाएं।

कानून क्या कहता है?

कानूनी तौर पर नियम स्पष्ट हैं। अगर कोई वारिस मृतक की संपत्ति स्वीकार नहीं करता है, तो वह मृतक के कर्ज के लिए भी जिम्मेदार नहीं है। लेकिन अगर वारिस ने घर या अन्य संपत्ति को अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लिया है, तो वह उस संपत्ति की कीमत की सीमा तक कर्ज चुकाने के लिए जिम्मेदार हो जाता है। इसका मतलब है कि अगर संपत्ति की कीमत 50 लाख है और लोन 60 लाख का है, तो वारिस को केवल संपत्ति की वैल्यू तक ही भुगतान करना पड़ सकता है, हालांकि व्यावहारिक रूप से बैंक पूरी वसूली की कोशिश करते हैं।


उधारकर्ता की मृत्यु एक भावनात्मक और आर्थिक संकट का समय होता है। बैंकों के पास अपने पैसे वसूलने के कानूनी अधिकार हैं, लेकिन वे मानवीय आधार पर परिवार को समय और विकल्प देते हैं। अगर आपके पास होम लोन है, तो यह सुनिश्चित करना समझदारी है कि आपने लोन इंश्योरेंस लिया हो और अपने परिवार को सभी वित्तीय दस्तावेजों (जैसे को-एप्लीकेंट डिटेल्स, बीमा पेपर्स) की जानकारी दी हो। थोड़ी सी सावधानी आपके जाने के बाद आपके परिवार को एक बड़ी मुसीबत से बचा सकती है।



Loving Newspoint? Download the app now
Newspoint