‘ब्लड मून’ चंद्र ग्रहण 2025: भारत में कब दिखेगा और क्या होगा असर, जानें क्या बरतें सावधानियां

आसमान के प्रेमियों के लिए सितंबर का महीना एक शानदार खगोलीय घटना लेकर आ रहा है। साल का अंतिम चंद्र ग्रहण, जो एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (टोटल लूनर एक्लिप्स) होगा, इस सप्ताह के अंत में आसमान में दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का होकर 'ब्लड मून' में बदल जाएगा। यह ग्रहण भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा, जिसके कारण इसका सूतक काल भी मान्य होगा।
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चंद्र ग्रहण 2025 का समय ( Lunar Eclipse 2025 Timing in India)


ग्रहण प्रारंभ: 7 सितंबर 2025, रात 9:57 बजे
पूर्ण ग्रहण (खग्रास): रात 12:28 बजे से सुबह 03:56 बजे तक
ग्रहण समाप्ति: 8 सितंबर 2025, रात 1:26 बजे

ग्रहण का प्रभाव


ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टि से, चंद्र ग्रहण का प्रभाव मानव मस्तिष्क और समुद्र पर अधिक देखने को मिलता है। कहा जाता है कि ऐसे समय में राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ जाती है और प्रशांत महासागर में समुद्री हलचल तेज हो जाती है। यह भी माना जाता है कि "चंद्र ग्रहण से समुद्र के भीतर भूकंप आते हैं और सूर्य ग्रहण से धरती पर।"
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान चंद्रमा लाल-नारंगी रंग का दिखाई देता है, जिसे Blood Moon कहा जाता है।


धार्मिक मान्यताएं और चंद्र ग्रहण


हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले आरंभ हो जाता है। इस कारण, भारत में सूतक काल 7 सितंबर को दोपहर 12:57 बजे से शुरू होगा और 8 सितंबर को ग्रहण समाप्त होने के बाद ही खत्म होगा। सूतक काल के दौरान, मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और पूजा-पाठ जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाएंगे। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों की शुद्धि की जाएगी।हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए इस दौरान:
भोजन पकाना और ग्रहण करना वर्जित है।
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान टाले जाते हैं।
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और पूजा का महत्व है।

कहां-कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?


यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिसके कारण इसका सूतक काल मान्य होगा। भारत के अलावा, यह खग्रास चंद्र ग्रहण संपूर्ण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, न्यूजीलैंड, पश्चिमी और उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, और दक्षिण अमेरिका के पूर्वी क्षेत्रों में भी दिखाई देगा। माना जा रहा है कि यह ग्रहण दुनिया के 7 अरब से अधिक लोगों द्वारा देखा जा सकेगा।