UP Farmer Scheme Update: दुर्घटना सहायता के 5 लाख रुपये अब सीधे बैंक खाते में, जानें नया नियम
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को अब पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब किसी अनहोनी की स्थिति में पीड़ित किसान परिवार को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं होगी। सरकार की इस पहल से सहायता राशि सीधे जरूरतमंदों के हाथों में जल्द से जल्द पहुँच सकेगी।
सरकार का यह डिजिटल कदम न केवल गवर्नेंस को बेहतर बनाएगा बल्कि उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों के जीवन में एक नई उम्मीद और भरोसा भी पैदा करेगा।
फरवरी 2026 तक पूरा होगा डिजिटलीकरण
राज्य सरकार के अनुसार इस पूरी योजना को फरवरी 2026 तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। एक बार यह व्यवस्था लागू हो जाने के बाद किसान के परिवार को किसी भी शारीरिक दस्तावेज को जमा करने के लिए तहसील या जिला कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और इसे घर बैठे या पास के जन सुविधा केंद्र से पूरा किया जा सकेगा।भागदौड़ और कागजी झंझटों से मिलेगी आजादी
अब तक की व्यवस्था में पीड़ित परिवारों को आवेदन करने के लिए कई अधिकारियों के पास जाना पड़ता था और कागजी कार्रवाई पूरी करने में काफी समय बर्बाद होता था। डिजिटल सिस्टम आने के बाद किसान की मृत्यु या दुर्घटना से जुड़ी जानकारी का सत्यापन ऑनलाइन ही किया जाएगा। सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच भी डिजिटल माध्यम से होगी। जैसे ही सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होगी सहायता राशि बिना किसी देरी के सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।You may also like
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5 लाख रुपये की आर्थिक सुरक्षा
यह योजना उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। किसी दुर्घटना में किसान की मृत्यु होने या स्थाई विकलांगता होने पर सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि उस कठिन समय में परिवार को संभलने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद करती है।पारदर्शिता और रफ्तार पर जोर
साल 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना था। पहले आवेदन से लेकर पैसा मिलने तक महीनों का समय लग जाता था लेकिन अब डिजिटल होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। बिचौलियों का हस्तक्षेप खत्म होगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो जाएगी।हजारों परिवारों को मिला सहारा
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर 2025 तक लगभग 29,394 किसानों या उनके परिवारों को इस योजना के तहत आर्थिक मदद दी जा चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में कितनी प्रभावशाली रही है। अब इसके डिजिटल होने से लाभार्थियों की संख्या और सेवा की गति दोनों में सुधार होगा।किन स्थितियों में मिलता है लाभ?
इस योजना का दायरा काफी व्यापक है। इसमें केवल खेती से जुड़ी दुर्घटनाएं ही नहीं बल्कि कई अन्य आपदाएं भी शामिल हैं। जैसे:- आकाशीय बिजली गिरना या बाढ़ में बह जाना
- आग लगना या करंट लगना
- पेड़ के नीचे दबना या मकान गिरना
- जंगली जानवरों का हमला
- सड़क या रेल यात्रा के दौरान दुर्घटना
- लूटपाट या किसी हिंसा में मृत्यु
सरकार का यह डिजिटल कदम न केवल गवर्नेंस को बेहतर बनाएगा बल्कि उत्तर प्रदेश के करोड़ों किसानों के जीवन में एक नई उम्मीद और भरोसा भी पैदा करेगा।









