बिहार चुनाव: तरापुर से भाजपा प्रत्याशी सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी ने कहा, 'मैंने दंगे रोके, अब बेटा जनता का प्यार जीतेगा'

उन्होंने अपने पुराने योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने क्षेत्र में जातीय तनाव खत्म किया और दंगों को शांत रखा। शकुनी जी ने कहा कि 1989 और 2002 के दंगों में उन्होंने किसी की जान नहीं जाने दी। इस वजह से लोगों का प्यार आज भी उनके दिल में बसा है। अब वे चाहते हैं कि बेटा सम्राट को और ज्यादा समर्थन मिले।
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शकुनी चौधरी का पुराना इतिहास: दंगों में शांति का पैगाम


तरापुर, बिहार में शकुनी चौधरी ने एक सभा में अपनी बात रखी। उन्होंने बताया, "तरापुर में पहले बहुत जातीय तनाव था। मैंने उसे खत्म किया। फिर 1989 का दंगा और 2002 का दंगा एक साथ हुए। मैंने किसी को नुकसान नहीं होने दिया। सबको सुरक्षित रखा। लोगों ने मुझे इतना प्यार दिया कि आज भी याद है।" शकुनी जी ने कहा कि सम्राट को बचपन से देखा है। लोग उन्हें पहचानते हैं। सम्राट हर मुद्दे पर जनता से जुड़े रहते हैं, इसलिए उनका प्यार बढ़ता जा रहा है। यह बयान भाजपा की रैली में दिया गया, जहां समर्थक जोरदार तालियां बजा रहे थे। शकुनी जी का यह बयान दिखाता है कि परिवार का पुराना प्रभाव चुनाव में कितना बड़ा रोल निभा सकता है। तरापुर जैसे इलाके में जहां जाति और सुरक्षा के मुद्दे गर्म रहते हैं, ऐसे बयान वोटरों को जोड़ते हैं।

प्रशांत किशोर पर तीखा प्रहार: 'पीके का दिमाग खराब, शराब पीकर बोलते हैं'


शकुनी चौधरी ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) पर सीधी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "हमको लगता है कि पीके का दिमाग ठीक नहीं है। उन्हें शर्मिंदगी नहीं आती। अगर थोड़ी ईमानदारी होती या जनता से जुड़ाव होता, तो सम्राट जी पर आरोप न लगाते। पहले दस्तावेज देख लेते। पीके शराब पीकर बोलते हैं।" यह बयान बिहार चुनाव में सियासी बहस को और तेज कर देगा। प्रशांत किशोर ने हाल ही में सम्राट चौधरी पर कुछ आरोप लगाए थे, जिसका जवाब शकुनी जी ने इस तरह दिया। भाजपा समर्थक इसे मजबूत काउंटर मान रहे हैं। तरापुर में पीके की जन सुराज पार्टी नई चुनौती पेश कर रही है, लेकिन शकुनी जी का यह हमला उनके प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश लगता है। बिहार की राजनीति में ऐसे व्यक्तिगत हमले आम हैं, जो वोटरों को पक्ष चुनने पर मजबूर करते हैं।