दिल्ली में बेटियों की पढ़ाई और उनके बेहतर भविष्य के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। लखपति बिटिया योजना के जरिए दिल्ली की हजारों बेटियों के बैंक खातों में पैसे भेजने का काम शुरू हो गया है। 2 मार्च को राजधानी में एक खास कार्यक्रम रखा गया, जहाँ इस योजना का औपचारिक आगाज हुआ। सरकार का मानना है कि ये सिर्फ पैसों की मदद नहीं है, बल्कि बेटियों को ऊँची शिक्षा दिलाने और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की तरफ एक मजबूत कदम है। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी मौजूद रहीं और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि बड़ी संख्या में लाभार्थी बेटियों को सीधे उनके खातों में पैसा मिला है।
कितने पैसे मिलेंगे?
इस योजना के तहत दिल्ली सरकार ने एक बड़ा बजट तैयार किया है। करीब 40,642 ऐसी बेटियाँ हैं जिनके खातों में 100 करोड़ रुपये की राशि भेजी जा रही है। सरकार के नियमों के हिसाब से हर बेटी के नाम पर अलग-अलग समय पर कुल 56,000 रुपये जमा किए जाते हैं। ये पैसा पढ़ाई के अलग-अलग लेवल पर दिया जाता है। चूंकि बहुत सी लड़कियों का रजिस्ट्रेशन जन्म के समय न होकर बाद में हुआ है, इसलिए हर किसी के खाते में जमा होने वाली रकम अलग हो सकती है। ये पैसा बैंक में जमा रहता है और इस पर ब्याज भी मिलता रहता है।
लाड़ली योजना में क्या बदलाव हुआ?
साल 2008 में दिल्ली में लाड़ली योजना शुरू की गई थी। इसका मकसद ये था कि पैसों की कमी की वजह से किसी भी बेटी की पढ़ाई न रुके। उस समय नियम था कि जन्म के समय एक तय रकम जमा होगी और फिर पहली, छठी, नौवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा में पहुँचने पर किस्तें दी जाएंगी। अब इसी योजना को और भी बेहतर बनाकर लखपति बिटिया योजना का नाम दे दिया गया है। नई व्यवस्था में कुल 56,000 रुपये जमा होते हैं। जब बेटी 21 साल की होती है, तब तक ब्याज जुड़कर ये पूरी रकम 1 लाख रुपये से भी ज्यादा हो जाती है।
किसे मिलेगा योजना का फायदा?
इस योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी शर्तें रखी हैं। सबसे पहली शर्त ये है कि परिवार की सालाना कमाई 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। साथ ही वो परिवार पिछले तीन सालों से दिल्ली में रह रहा हो। योजना का फायदा उसी बेटी को मिलेगा जिसका जन्म दिल्ली में हुआ हो। एक परिवार की ज्यादा से ज्यादा दो बेटियाँ ही इस सुविधा का लाभ उठा सकती हैं। इसके लिए रजिस्ट्रेशन या तो जन्म के एक साल के अंदर कराना होता है या फिर तय की गई क्लास में एडमिशन के वक्त कराना जरूरी होता है।
शिक्षा के लिए बड़ी मदद
सरकार का मुख्य उद्देश्य बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना की मदद से गरीब परिवारों को अपनी बेटियों को स्कूल भेजने में मदद मिलती है। जब बेटी 18 साल की हो जाती है, तब वो अपनी पढ़ाई के लिए इस पैसे का इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि, पूरे पैसे निकालने के लिए 21 साल की उम्र और पढ़ाई से जुड़ी शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है। इससे बेटियों को कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने में आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता और वे समाज में अपनी एक अलग पहचान बना पाती हैं।