मुंबई की भागती दौड़ती जिंदगी में हर दिन हजारों कहानियां जन्म लेती हैं। इन्हीं में से एक कहानी आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। यह कहानी एक ऐसी महिला की है जिसकी उम्र 89 वर्ष है। जहाँ इस उम्र में लोग सहारे की तलाश करते हैं, वहीं कमलाबेन मेहता नाम की यह बुजुर्ग महिला मुंबई की लोकल ट्रेनों में चढ़कर ब्रेसलेट बेचती हैं। उनकी आवाज में एक स्थिरता है और उनके चेहरे पर आत्मसम्मान की चमक दिखाई देती है।
स्वाभिमान के लिए संघर्ष
ट्रेन में सफर कर रहे एक यात्री ने जब इस बुजुर्ग महिला को ब्रेसलेट बेचते देखा, तो वह उनकी हिम्मत देख दंग रह गया। बातचीत के दौरान पता चला कि दादी का नाम कमलाबेन मेहता है और उनकी उम्र 89 साल है। जब उनसे काम करने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही सहजता से जवाब दिया। उन्होंने बताया कि वह अपने परिवार के साथ रहती हैं और वहां रहने के बदले वह उन्हें पैसे देती हैं। वह नहीं चाहतीं कि उनके परिवार को उनके रहने का बोझ उठाना पड़े। यही वजह है कि वह आज भी मेहनत कर रही हैं।
दशकों पुराना नाता
कमलाबेन मेहता के लिए यह काम नया नहीं है। वह पिछले लगभग 60 वर्षों से नलासोपारा और विले पार्ले के बीच लोकल ट्रेनों में सफर कर रही हैं। दोपहर के समय जब ट्रेन में भीड़ थोड़ी कम होती है, तब वह अपने हाथ से बने मोतियों के ब्रेसलेट लेकर निकल पड़ती हैं। उनके जीवन का संघर्ष बहुत पहले शुरू हो गया था। शादी के महज एक महीने बाद ही उन्होंने अपने पति को खो दिया था। तब से लेकर आज तक उन्होंने कभी हार नहीं मानी। जीवन की हर चुनौती का उन्होंने डटकर सामना किया और आज भी वह आराम करने के बजाय काम करना पसंद करती हैं।
गुमनाम रहने की इच्छा
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक खास बात गौर करने वाली थी। दादी ने अपनी पहचान तो बताई लेकिन अपने घर का पूरा पता देने से मना कर दिया। उनके मन में यह डर था कि अगर लोग उनके घर पहुंचेंगे तो उनके परिवार को शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है। वह अपनी मेहनत से कमा रही हैं और इसे ही अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं। उनकी इस सोच ने न केवल यात्रियों को बल्कि वीडियो देखने वाले लाखों लोगों को भी प्रभावित किया है।
लोगों का प्यार और सम्मान
इंटरनेट पर लोग कमलाबेन की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यात्रियों ने उनके साथ अपने अनुभव साझा किए हैं। एक यात्री ने बताया कि उसने दादी को ट्रेन में खुद से कम उम्र की एक अन्य महिला की मदद करते देखा था। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नलासोपारा जैसे व्यस्त स्टेशन से ट्रेन पकड़ना युवाओं के लिए भी मुश्किल होता है, ऐसे में दादी का यह जज्बा वाकई काबिले तारीफ है। लोग एक दूसरे से अपील कर रहे हैं कि जब भी वे दादी को देखें, तो उनसे ब्रेसलेट जरूर खरीदें। एक ब्रेसलेट की कीमत मात्र 40 रुपये है, लेकिन वह किसी के स्वाभिमान को बनाए रखने में बहुत बड़ा योगदान है।
सीख देने वाली कहानी
आज के दौर में जहाँ लोग छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेते हैं, वहां कमलाबेन मेहता एक प्रेरणा बनकर उभरी हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत करने की कोई उम्र नहीं होती। ईमानदारी की कमाई और खुद के दम पर जीने का सुख सबसे बड़ा होता है। मुंबई की लोकल ट्रेनें रोज लाखों लोगों को उनकी मंजिल तक पहुँचाती हैं, लेकिन कमलाबेन जैसी शख्सियतें हमें रुक कर सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि असली सशक्तिकरण क्या है।