Cyber Fraud Alert: मुंबई के 70 वर्षीय बुजुर्ग ने होटल बुकिंग के चक्कर में गंवाए 2.75 लाख रुपये, आप भी न करें यह गलती
डिजिटल इंडिया के इस दौर में हम सब कुछ अपनी उंगलियों के इशारे पर करना चाहते हैं। चाहे खाना ऑर्डर करना हो या छुट्टियों के लिए होटल बुक करना, हम इंटरनेट पर पूरी तरह निर्भर हैं। लेकिन यही निर्भरता कभी-कभी भारी पड़ सकती है। मुंबई के मुलुंड इलाके में रहने वाले एक 70 वर्षीय बुजुर्ग व्यवसायी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जिन्होंने एक छोटी सी ऑनलाइन बुकिंग के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई के 2.75 लाख रुपये गंवा दिए।
कैसे शुरू हुआ ठगी का यह खेल?
यह पूरी घटना 6 फरवरी की दोपहर की है। मुलुंड ईस्ट के रहने वाले यह बुजुर्ग व्यक्ति पुणे में एक होटल बुक करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने एक जाने-माने ऑनलाइन ट्रेवल पोर्टल का इस्तेमाल किया और बुकिंग के लिए 5,602 रुपये का भुगतान गूगल पे के जरिए कर दिया।
भुगतान होते ही उनके पास एक मैसेज आया कि उनकी बुकिंग अधूरी है और इसे अपडेट करने की जरूरत है। बस यही वह मोड़ था जहां से ठगों ने अपना जाल बिछाना शुरू किया।
गूगल पर 'कस्टमर केयर' नंबर ढूंढना पड़ा महंगा
परेशान होकर बुजुर्ग ने उस ट्रेवल पोर्टल का कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर सर्च किया। उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला, जिसे उन्होंने सही समझकर डायल कर दिया। दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने खुद को कंपनी का एग्जीक्यूटिव बताया और बड़ी ही शालीनता से बात करते हुए उन्हें व्हाट्सएप पर बातचीत जारी रखने को कहा।
जल्द ही उनके व्हाट्सएप पर "राहुल कुमार मिश्रा" नाम के व्यक्ति के मैसेज आने लगे। ठग ने बुजुर्ग का विश्वास जीतने के लिए पहले उनसे केवल 10 रुपये का 'वेरिफिकेशन अमाउंट' ट्रांसफर करने को कहा। बुजुर्ग को लगा कि इतनी छोटी राशि से क्या नुकसान होगा, और उन्होंने बात मान ली।
रिफंड के नाम पर साझा की गोपनीय जानकारी
ठग ने अगला कदम चलते हुए कहा कि पिछली अधूरी बुकिंग का रिफंड प्रोसेस करने के लिए उन्हें अपने डेबिट कार्ड की डिटेल्स साझा करनी होंगी। खुद को आधिकारिक कर्मचारी बताने वाले उस व्यक्ति की बातों में आकर बुजुर्ग ने अपने कार्ड की जानकारी दे दी।
जानकारी साझा करने के कुछ ही घंटों के भीतर उनके खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन हुए। पहले 10 रुपये कटे, फिर अचानक 1,90,005 रुपये और उसके बाद 85,000 रुपये साफ हो गए। कुल मिलाकर उनके खाते से 2,75,015.90 रुपये निकाल लिए गए। जब तक उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी कदम
धोखाधड़ी का पता चलते ही पीड़ित ने तुरंत नवघर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात कॉल करने वाले, राहुल कुमार मिश्रा के नाम से व्हाट्सएप चलाने वाले व्यक्ति और उस फर्जी इंटरफेस बनाने वाले के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें यह पैसा ट्रांसफर किया गया है। यह मामला आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
ऐसी ठगी से कैसे बचें? कुछ जरूरी बातें
इस घटना से हमें कुछ बेहद जरूरी सबक मिलते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है:
सर्च इंजन पर भरोसा न करें: गूगल या अन्य सर्च इंजन पर मिलने वाले कस्टमर केयर नंबर हमेशा सही नहीं होते। ठग अक्सर अपने नंबर वहां 'एसईओ' के जरिए ऊपर ले आते हैं। हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के भीतर दिए गए हेल्प सेक्शन का ही उपयोग करें।
गोपनीय जानकारी कभी न दें: कोई भी बैंक या नामी ट्रेवल पोर्टल कभी भी आपसे फोन या व्हाट्सएप पर आपके कार्ड की डिटेल्स, सीवीवी (CVV) या ओटीपी (OTP) नहीं मांगता।
व्हाट्सएप कॉल्स से बचें: आधिकारिक कंपनियां आमतौर पर आपसे प्रोफेशनल ईमेल या उनके आधिकारिक ऐप के माध्यम से ही संवाद करती हैं। व्हाट्सएप पर रिफंड की बात करना खतरे की घंटी है।
जल्दबाजी न करें: ठग हमेशा आपको डराते हैं कि आपकी बुकिंग कैंसिल हो जाएगी या पैसा डूब जाएगा। ऐसी स्थिति में शांत रहें और खुद बैंक जाकर या आधिकारिक माध्यम से ही पुष्टि करें।
मुंबई की यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल दुनिया में आपकी एक छोटी सी लापरवाही साइबर अपराधियों के लिए बड़ा मौका बन सकती है। सतर्क रहें और सुरक्षित रहें।
कैसे शुरू हुआ ठगी का यह खेल?
यह पूरी घटना 6 फरवरी की दोपहर की है। मुलुंड ईस्ट के रहने वाले यह बुजुर्ग व्यक्ति पुणे में एक होटल बुक करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने एक जाने-माने ऑनलाइन ट्रेवल पोर्टल का इस्तेमाल किया और बुकिंग के लिए 5,602 रुपये का भुगतान गूगल पे के जरिए कर दिया। भुगतान होते ही उनके पास एक मैसेज आया कि उनकी बुकिंग अधूरी है और इसे अपडेट करने की जरूरत है। बस यही वह मोड़ था जहां से ठगों ने अपना जाल बिछाना शुरू किया।
गूगल पर 'कस्टमर केयर' नंबर ढूंढना पड़ा महंगा
परेशान होकर बुजुर्ग ने उस ट्रेवल पोर्टल का कस्टमर केयर नंबर इंटरनेट पर सर्च किया। उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला, जिसे उन्होंने सही समझकर डायल कर दिया। दूसरी तरफ मौजूद व्यक्ति ने खुद को कंपनी का एग्जीक्यूटिव बताया और बड़ी ही शालीनता से बात करते हुए उन्हें व्हाट्सएप पर बातचीत जारी रखने को कहा। जल्द ही उनके व्हाट्सएप पर "राहुल कुमार मिश्रा" नाम के व्यक्ति के मैसेज आने लगे। ठग ने बुजुर्ग का विश्वास जीतने के लिए पहले उनसे केवल 10 रुपये का 'वेरिफिकेशन अमाउंट' ट्रांसफर करने को कहा। बुजुर्ग को लगा कि इतनी छोटी राशि से क्या नुकसान होगा, और उन्होंने बात मान ली।
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रिफंड के नाम पर साझा की गोपनीय जानकारी
ठग ने अगला कदम चलते हुए कहा कि पिछली अधूरी बुकिंग का रिफंड प्रोसेस करने के लिए उन्हें अपने डेबिट कार्ड की डिटेल्स साझा करनी होंगी। खुद को आधिकारिक कर्मचारी बताने वाले उस व्यक्ति की बातों में आकर बुजुर्ग ने अपने कार्ड की जानकारी दे दी। जानकारी साझा करने के कुछ ही घंटों के भीतर उनके खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन हुए। पहले 10 रुपये कटे, फिर अचानक 1,90,005 रुपये और उसके बाद 85,000 रुपये साफ हो गए। कुल मिलाकर उनके खाते से 2,75,015.90 रुपये निकाल लिए गए। जब तक उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी कदम
धोखाधड़ी का पता चलते ही पीड़ित ने तुरंत नवघर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात कॉल करने वाले, राहुल कुमार मिश्रा के नाम से व्हाट्सएप चलाने वाले व्यक्ति और उस फर्जी इंटरफेस बनाने वाले के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें यह पैसा ट्रांसफर किया गया है। यह मामला आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। ऐसी ठगी से कैसे बचें? कुछ जरूरी बातें
इस घटना से हमें कुछ बेहद जरूरी सबक मिलते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है:सर्च इंजन पर भरोसा न करें: गूगल या अन्य सर्च इंजन पर मिलने वाले कस्टमर केयर नंबर हमेशा सही नहीं होते। ठग अक्सर अपने नंबर वहां 'एसईओ' के जरिए ऊपर ले आते हैं। हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के भीतर दिए गए हेल्प सेक्शन का ही उपयोग करें।
गोपनीय जानकारी कभी न दें: कोई भी बैंक या नामी ट्रेवल पोर्टल कभी भी आपसे फोन या व्हाट्सएप पर आपके कार्ड की डिटेल्स, सीवीवी (CVV) या ओटीपी (OTP) नहीं मांगता।
व्हाट्सएप कॉल्स से बचें: आधिकारिक कंपनियां आमतौर पर आपसे प्रोफेशनल ईमेल या उनके आधिकारिक ऐप के माध्यम से ही संवाद करती हैं। व्हाट्सएप पर रिफंड की बात करना खतरे की घंटी है।
जल्दबाजी न करें: ठग हमेशा आपको डराते हैं कि आपकी बुकिंग कैंसिल हो जाएगी या पैसा डूब जाएगा। ऐसी स्थिति में शांत रहें और खुद बैंक जाकर या आधिकारिक माध्यम से ही पुष्टि करें।
मुंबई की यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल दुनिया में आपकी एक छोटी सी लापरवाही साइबर अपराधियों के लिए बड़ा मौका बन सकती है। सतर्क रहें और सुरक्षित रहें।









