साइबर अपराध पर बड़ा शिकंजा! मनी लॉन्ड्रिंग-टेरर फंडिंग पर दो एजेंसियों का संयुक्त एक्शन
नई दिल्ली: देश में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन स्कैम, UPI फ्रॉड, फिशिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसे साइबर अपराधों पर अब बड़ा एक्शन देखने को मिल रहा है। डिजिटल दौर में बढ़ती ठगी की घटनाओं ने एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सरकार ने इन नेटवर्क्स पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज कर दी है।
इसी कड़ी में भारत की प्रमुख साइबर एजेंसी I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) और वित्तीय खुफिया इकाई एफआईयू ( Financial Intelligence Unit ) ने मिलकर बड़ा कदम उठाया है। दोनों एजेंसियों के बीच समझौता (MOU) हुआ है, जिसके तहत अब साइबर अपराधों से जुड़ी खुफिया जानकारी रियल टाइम में साझा की जाएगी।

पब्लिक, पुलिस को मिलेगा सपोर्टरियल-टाइम खुफिया जानकारी से बैंक ट्राजैक्शन और साइबर शिकायतों का डेटा तेजी से शेयर होगा। फ्रॉड के बाद एक्शन लेना आसान होगा। इससे गोल्डन आवर्स में
पैसे सुरक्षित करने का ज्यादा चांस है। इससे पैसे को जल्दी फ्रीज/रिकवर किया जा सकेगा। पैसों में ब्लैक एंड वाइट की पूरी चैन पकड़ना आसान होगा।
इसी कड़ी में भारत की प्रमुख साइबर एजेंसी I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) और वित्तीय खुफिया इकाई एफआईयू ( Financial Intelligence Unit ) ने मिलकर बड़ा कदम उठाया है। दोनों एजेंसियों के बीच समझौता (MOU) हुआ है, जिसके तहत अब साइबर अपराधों से जुड़ी खुफिया जानकारी रियल टाइम में साझा की जाएगी।
- इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य अवैध डिजिटल ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना और मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसे बड़े नेटवर्क्स का पर्दाफाश करना है। इससे संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी और अपराधियों तक तेजी से पहुंच बनाई जा सकेगी।
- सूत्रों के मुताबिक, इस अहम समझौते पर FIU-IND के निदेशक अमित मोहन गोविल और I4C के सीईओ राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए हैं। FIU-IND, वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर नजर रखती है, जबकि I4C गृह मंत्रालय के अधीन देश में साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच के लिए जिम्मेदार है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा। इससे न सिर्फ डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगेगी, बल्कि आम लोगों का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन सिस्टम पर भरोसा भी बढ़ेगा। आने वाले समय में ऐसे और कड़े कदम देखने को मिल सकते हैं।
पब्लिक, पुलिस को मिलेगा सपोर्टरियल-टाइम खुफिया जानकारी से बैंक ट्राजैक्शन और साइबर शिकायतों का डेटा तेजी से शेयर होगा। फ्रॉड के बाद एक्शन लेना आसान होगा। इससे गोल्डन आवर्स में
पैसे सुरक्षित करने का ज्यादा चांस है। इससे पैसे को जल्दी फ्रीज/रिकवर किया जा सकेगा। पैसों में ब्लैक एंड वाइट की पूरी चैन पकड़ना आसान होगा।
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