'आस्था के साथ नहीं खेल सकते', उज्जैन में संतों ने दिखाई ताकत और प्रशासन को दी चुनौती, कहा- खड़े हनुमान जी यहां से नहीं हटेंगे
उज्जैन: खड़े हनुमान जी को लेकर उज्जैन में संतों ने सबसे बड़ा प्रदर्शन किया है। इनके अह्वान पर बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों का जुटान हुआ। इस दौरान खड़े हनुमान जी मंदिर के आसपास की सड़कें भीड़ से पट गई हैं। एक सुर में सबकी यही मांग थी कि खड़े हनुमान जी को यही पर रहने दिया जाए। साथ ही नए मंदिर के निर्माण की मांग उठी है।
15 दिनों से चल रहा आंदोलनखड़े हनुमान मंदिर को लेकर पिछले 15 दिनों से आंदोलन चल रहा है। बुधवार को यह आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया है। खड़े हनुमान मंदिर के पास साधु संतों और हिंदूवादी संगठनों का जमावड़ा देखा गया। यहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और भक्त एकत्रित हुए। अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।

उग्र आंदोलन की चेतावानीसंतों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि प्रतिमा को हटाया गया तो उग्र आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की ही होगी। वहीं, सबसे खास बात यह रही है कि बाबा महाकाल को भी ज्ञापन सौंपा है।
सिंहस्थ को लेकर हटाया जा रहादरअसल, उज्जैन के चमत्कारिक खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों देश ही नहीं विदेशों तक में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सिंहस्थ-2028 के लिए विकास कार्यों के तहत सड़क मार्ग और चौराहा का चौड़ीकरण किया जा रहा है । इसी चौड़ीकरण की जद में जो भी धर्मस्थल आ रहा है, उन्हें हटाया जा रहा है । इसी क्रम में कई धार्मिक स्थल हटाए जा चुके हैं।
मंदिर को हटा दिया गयावहीं, खड़े हनुमान जी मंदिर को तोड़ दिया गया है। सिर्फ वहां प्रतिमा बची है, जिसे प्रशासन नहीं हटा पाया है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह बताया जा रहा है कि जिस शीला पर प्रतिमा बनी है। इस शिला का करीब 5 फीट हिस्सा जमीन में अन्य शिला के माध्यम से इंटरलॉक हैं। इसलिए चारों ओर से खुदाई की जाएगी फिर प्रतिमा बाहर निकले।
चमत्कारिक मंदिर है यहवहीं, साधु-संतों का कहना है कि यह चमत्कारिक मंदिर है। 200 वर्ष पुरानी यह प्रतिमा है। खुद हनुमान जी यहां से हटाना नहीं चाहते हैं इसलिए यहां प्रतिमा नहीं हटाई जाना चाहिए। संतों ने कहा कि अगर रात के अंधेरे में प्रतिमा हटाने की कोशिश की गई तो शासन-प्रशासन को इसका खामियाजा भुगतना होगा। साथ ही कहा कि खड़े हनुमान जी यहां नहीं हटेंगे।
हर दिन हो रहे हैं धार्मिक आयोजनहिंदू समाज की तरफ से यहां हर दिन धार्मिक आयोजन हो रहा है। बुधवार का आंदोलन सबसे बड़ा था। मौके पर सुंदरकांड और भंडारे का आयोजन हुआ है। इस दौरान साधु संत, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य सामाजिक संगठनों के लोग एकत्रित हुए। साथ ही एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है।
15 दिनों से चल रहा आंदोलनखड़े हनुमान मंदिर को लेकर पिछले 15 दिनों से आंदोलन चल रहा है। बुधवार को यह आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया है। खड़े हनुमान मंदिर के पास साधु संतों और हिंदूवादी संगठनों का जमावड़ा देखा गया। यहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और भक्त एकत्रित हुए। अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
उग्र आंदोलन की चेतावानीसंतों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि प्रतिमा को हटाया गया तो उग्र आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की ही होगी। वहीं, सबसे खास बात यह रही है कि बाबा महाकाल को भी ज्ञापन सौंपा है।
सिंहस्थ को लेकर हटाया जा रहादरअसल, उज्जैन के चमत्कारिक खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों देश ही नहीं विदेशों तक में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सिंहस्थ-2028 के लिए विकास कार्यों के तहत सड़क मार्ग और चौराहा का चौड़ीकरण किया जा रहा है । इसी चौड़ीकरण की जद में जो भी धर्मस्थल आ रहा है, उन्हें हटाया जा रहा है । इसी क्रम में कई धार्मिक स्थल हटाए जा चुके हैं।
मंदिर को हटा दिया गयावहीं, खड़े हनुमान जी मंदिर को तोड़ दिया गया है। सिर्फ वहां प्रतिमा बची है, जिसे प्रशासन नहीं हटा पाया है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह बताया जा रहा है कि जिस शीला पर प्रतिमा बनी है। इस शिला का करीब 5 फीट हिस्सा जमीन में अन्य शिला के माध्यम से इंटरलॉक हैं। इसलिए चारों ओर से खुदाई की जाएगी फिर प्रतिमा बाहर निकले।
चमत्कारिक मंदिर है यहवहीं, साधु-संतों का कहना है कि यह चमत्कारिक मंदिर है। 200 वर्ष पुरानी यह प्रतिमा है। खुद हनुमान जी यहां से हटाना नहीं चाहते हैं इसलिए यहां प्रतिमा नहीं हटाई जाना चाहिए। संतों ने कहा कि अगर रात के अंधेरे में प्रतिमा हटाने की कोशिश की गई तो शासन-प्रशासन को इसका खामियाजा भुगतना होगा। साथ ही कहा कि खड़े हनुमान जी यहां नहीं हटेंगे।
हर दिन हो रहे हैं धार्मिक आयोजनहिंदू समाज की तरफ से यहां हर दिन धार्मिक आयोजन हो रहा है। बुधवार का आंदोलन सबसे बड़ा था। मौके पर सुंदरकांड और भंडारे का आयोजन हुआ है। इस दौरान साधु संत, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अन्य सामाजिक संगठनों के लोग एकत्रित हुए। साथ ही एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है।
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