खुले गड्ढे ने ली थी मासूम की जान; दिल्ली हाई कोर्ट ने DJB को सुनाई खरी खरी, मुआवजा बढ़ाकर किया 30 लाख से अधिक
नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि दिल्ली जल बोर्ड ( DJB ) अपनी खाली जमीन पर सुरक्षित हालात बनाए रखने और जरूरी सावधानियां बरतने की अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा, जिसके चलते नौ साल के एक बच्चे की दुखद मौत हो गई।
हाई कोर्ट ने जल बोर्ड को लगाई फटकार
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने 29 मई को सुनाए गए फैसले में टिप्पणी की कि एजेंसी का किसी खुले गड्ढे के चारों ओर बैरिकेड न लगाना या उसे सुरक्षित न करना, कर्तव्य का साफ उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुआवजा 'न्यायसंगत, निष्पक्ष और यथार्थवादी' होना चाहिए।

कोर्ट ने DJB की दलील को किया खारिज
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि 'महंगाई के असर और पैसे की कीमत में गिरावट' को आर्थिक नुकसान की गणना में शामिल किया जाना चाहिए, भले ही मरने वाला बच्चा कोई कमाई न करता हो। कोर्ट ने DJB की इस दलील को खारिज कर दिया कि किसी बच्चे की मौत के मामले में भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर मुआवजा तय करना 'अन्यायपूर्ण लाभ' होगा।
क्या था मामला ?
इसके बजाय, कोर्ट ने कहा कि पैसे की घटती कीमत के असर को बेअसर करने के लिए ऐसे कारक जरूरी हैं। यह मामला 20 जुलाई, 2016 की एक घटना से जुड़ा है। उस दिन 9 साल का मास्टर जस्टिन/जॉय, बुराड़ी में DJB की खाली जमीन पर पतंग का पीछा करते हुए पानी से भरे एक गड्ढे में गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
बच्चे के माता पिता ने कोर्ट से की थी मांग
बच्चे के माता-पिता ने दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुरुआत में एक सिंगल जज ने 22 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन डिविजन बेंच ने माता-पिता की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कुल मुआवजे की राशि बढ़ाकर 30,78,947 कर दी। कुल मुआवजा राशि पर घटना की तारीख से प्रभावी, 6% की दर से साधारण ब्याज भी लगेगा।
हाई कोर्ट ने जल बोर्ड को लगाई फटकार
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने 29 मई को सुनाए गए फैसले में टिप्पणी की कि एजेंसी का किसी खुले गड्ढे के चारों ओर बैरिकेड न लगाना या उसे सुरक्षित न करना, कर्तव्य का साफ उल्लंघन है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुआवजा 'न्यायसंगत, निष्पक्ष और यथार्थवादी' होना चाहिए।
कोर्ट ने DJB की दलील को किया खारिज
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि 'महंगाई के असर और पैसे की कीमत में गिरावट' को आर्थिक नुकसान की गणना में शामिल किया जाना चाहिए, भले ही मरने वाला बच्चा कोई कमाई न करता हो। कोर्ट ने DJB की इस दलील को खारिज कर दिया कि किसी बच्चे की मौत के मामले में भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर मुआवजा तय करना 'अन्यायपूर्ण लाभ' होगा।
क्या था मामला ?
इसके बजाय, कोर्ट ने कहा कि पैसे की घटती कीमत के असर को बेअसर करने के लिए ऐसे कारक जरूरी हैं। यह मामला 20 जुलाई, 2016 की एक घटना से जुड़ा है। उस दिन 9 साल का मास्टर जस्टिन/जॉय, बुराड़ी में DJB की खाली जमीन पर पतंग का पीछा करते हुए पानी से भरे एक गड्ढे में गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
बच्चे के माता पिता ने कोर्ट से की थी मांग
बच्चे के माता-पिता ने दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुरुआत में एक सिंगल जज ने 22 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन डिविजन बेंच ने माता-पिता की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कुल मुआवजे की राशि बढ़ाकर 30,78,947 कर दी। कुल मुआवजा राशि पर घटना की तारीख से प्रभावी, 6% की दर से साधारण ब्याज भी लगेगा।
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