BJP-चुनाव आयोग पर वार, मोदी पर कटाक्ष, EVM की पैरवी, SIR से इनकार, उद्धव-राज ठाकरे के 'गर्जना मार्च' में क्या हुआ?

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मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की अगुवाई में निकाले गए विरोध मार्च को मुंबईकरों का जबरदस्त समर्थन मिला। मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ यह मार्च बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) परिसर में एक जनसभा के साथ संपन्न हुआ। सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने चुनाव आयोग और सत्ताधारी बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कई अहम मांगें रखीं। इनमें एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करना और चुनावों में ईवीएम की जगह फिर से बैलेट पेपर का इस्तेमाल शुरू करना शामिल है।
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मेक इन इंडिया' के नाम पर पैदा हुई तानाशाही को खत्म कर देंगे: उद्धव ठाकरे

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के कामकाज पर सीधा हमला बोला। ठाकरे ने पीएम मोदी की 'मेक इन इंडिया' पहल का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे पहली बार प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने 'मेक इन इंडिया' की घोषणा की। हमने उस विजन का समर्थन किया। लेकिन अगर आप 'मेक इन इंडिया' के नाम पर तानाशाही पैदा कर रहे हैं, तो हम आज यहां उस तानाशाही को दफनाने के लिए खड़े हैं। 'मेक इन इंडिया' के तहत बाकी सब ठीक है, लेकिन अगर आप तानाशाह बनने की कोशिश करते हैं, तो समझ लीजिए कि आपकी तानाशाही दफन हो गई है।

जल्द ही सड़कों पर उतर सकता है जनता का असंतोष

उद्धव ठाकरे ने व्यवस्थित चुनावी धांधली और लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार और ईसीआई पर तीखा हमला किया। उन्होंने इस प्रदर्शन को भारत के संवैधानिक ढांचे और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान के रूप में परिभाषित किया और चेतावनी दी कि यदि संस्थागत अतिक्रमण जारी रहा तो जनता का असंतोष जल्द ही सड़कों पर उतर सकता है। उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची में हेराफेरी को लेकर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारी भीड़ से पूछा कि यह आंकड़ा महाराष्ट्र की पूरी आबादी के बराबर है। क्या यह मनमाना नाम हटाना आपको स्वीकार्य है?

चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

उन्होंने अधिकारियों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं को चुपके से मतदाता सूची से हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाता, जिनमें अकेले महाराष्ट्र में दो करोड़ मतदाता शामिल हैं, या तो लापता हैं या उन्हें मताधिकार से वंचित कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु में 70 लाख और पश्चिम बंगाल में 30 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि आगामी उपचुनावों से ठीक पहले कई अमान्य मतदाता आवेदनों को वैध घोषित कर दिया गया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर उठाए सवाल

कानूनी देरी की आलोचना करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई तत्काल याचिकाओं की सुनवाई मतदान से ठीक एक दिन पहले क्यों होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सुनवाई 5 तारीख को होती है और मतदान 6 तारीख को है, तो बहाल किए गए मतदाता अपने अधिकारों का प्रयोग कैसे कर पाएंगे? सत्ताधारी सरकार ने हर स्वतंत्र संस्था पर कब्जा कर लिया है। उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की विश्वसनीयता और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए, चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को विधायी रूप से हटाए जाने की आलोचना की।

वोट चोर के खिलाफ भारत आंदोलन की ओर मुड़ा

उन्होंने बताया कि तीन सदस्यीय समिति में अब प्रधानमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि समिति में गृह मंत्री अमित शाह के होने से सत्ताधारी सरकार को स्वतः ही 2-1 का बहुमत मिल जाता है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी की औपचारिक असहमति के बावजूद, निर्धारित अदालती सुनवाई का इंतजार किए बिना ज्ञानेश कुमार को नियुक्त कर दिया गया। उनकी नियुक्ति पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि जहां बीजेपी ने कभी कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया था, वहीं वर्तमान में देश भर में जनभावना वोट चोर के खिलाफ भारत आंदोलन की ओर मुड़ गई है।

बीजेपी पर बोला हमला

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निंदा करते हुए उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि पार्टी शासन करने में असमर्थ है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन और भाजपा एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। आप जो चला रहे हैं वह प्रशासन नहीं है, बल्कि सरासर राजनीतिक प्रतिशोध है। उन्होंने अनुमान लगाया कि मौजूदा गति से शेष विवादित मतदाता आवेदनों के सत्यापन में लगभग 146 महीने लगेंगे। महाराष्ट्र में सत्ताधारी प्रशासन की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उद्धव ठाकरे ने ठाणे में शिवसेना पदाधिकारी प्रदीप पूर्णेकर की हाल ही में हुई हत्या का हवाला दिया। उन्होंने पूछा कि आपकी पुलिस और गृह मंत्री अब कहां हैं? क्या यही आपका हिंदुत्व का रूप है? उन्होंने आगे कहा कि 'भाजपा' और 'प्रशासन' शब्द विरोधाभासी हो गए हैं और मौजूदा प्रशासन को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया।

बालासाहेब ठाकरे का हवाला

शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बालासाहेब ने लोकतंत्र के ऐसे 'दयनीय और प्रतिशोधी' स्वरूप को लगातार खारिज किया था। उन्होंने पूछा कि "जब पूरे देश में महिलाओं और नागरिकों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, तब आपकी हिंदुत्व सरकार कहां है? सत्ताधारी दल को सीधी चेतावनी देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि आपने भले ही संस्थाओं और प्रशासनों पर कब्जा कर लिया हो, लेकिन सड़कें जनता की हैं। एक दिन ऐसा आएगा जब आपको इन सार्वजनिक सड़कों पर चलना भी मुश्किल लगेगा।

अवैध एसआईआर अभियान हो रद्द: राज ठाकरे

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने 'गरजना मोर्चा' रैली के दौरान भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को अल्टीमेटम दिया और दो प्रमुख मांगें रखीं। इसमें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को तत्काल रद्द करना और भविष्य के सभी चुनावों के लिए कागजी मतपत्रों को फिर से लागू करने की मांग की है। विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने चल रही एसआईआर प्रक्रिया की वैधता सवाल उठाए। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह द्वारा पहले व्यक्त की गई कानूनी राय का हवाला देते हुए मनसे प्रमुख ने घोषणा की कि विशिष्ट वैधानिक समर्थन के बिना राष्ट्रव्यापी एसआईआर अभियान चलाना पूरी तरह से अवैध है।

देशभर में दो करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए

राज ठाकरे ने मतदाता गणना में गंभीर विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूचियों में कृत्रिम रूप से बढ़ोतरी की गई थी, वहीं मौजूदा मतदाता सूची संशोधन अभियान के कारण देशभर में दो करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने पूछा कि ये दो करोड़ नागरिक कौन हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं? क्या ये हमारे मतदाता हैं? उन्हें किस आधार पर मताधिकार से वंचित किया जा रहा है? उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से मतदाता सूची संशोधन अभियान को तत्काल रोकने की मांग में एकजुट होने का आग्रह किया।

ईवीएम को हटाकर मतपत्र लाएं

उन्होंने लोकतांत्रिक परिणामों में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए चल रहे सभी विशेष गहन पुनरीक्षण अभ्यासों को रद्द करने, उन्हें असंवैधानिक और अनधिकृत घोषित करने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को समाप्त करने और भौतिक मतपत्र मतदान पर लौटने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को भारी बहुमत मिलने के बावजूद चुनाव के बाद जश्न मनाने के बजाय पूरे महाराष्ट्र में एक अस्वाभाविक सन्नाटा छाया हुआ है।

महायुति की जीत पर उठाए सवाल

उन्होंने याद दिलाया कि वे 2017-2018 से ही ईवीएम में हेराफेरी और मतदाता सूची में अनियमितताओं के बारे में चेतावनी देते आ रहे थे। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने सोनिया गांधी और ममता बनर्जी सहित शीर्ष राष्ट्रीय विपक्षी नेताओं से मिलकर इन मुद्दों को उठाया था और उस समय सुझाव दिया था कि सच्चाई को उजागर करने का एकमात्र तरीका चुनावों का एकजुट बहिष्कार है। मतदाता सूची में जनसांख्यिकीय उछाल पर गंभीर आपत्ति जताते हुए, एमएनएस प्रमुख ने सवाल उठाया कि लोकसभा चुनावों के बाद छह महीने की छोटी अवधि में महाराष्ट्र में 40 से 60 लाख मतदाता कैसे जुड़ गए।

चुनाव आयोग की आलोचना

उन्होंने उन आरोपों की ओर इशारा किया कि भाजपा ने देशभर में मतदाता सूची से लगभग दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए। चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही की मांग की और 2024 के आम चुनाव और विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूची में सुनियोजित हेरफेर का आरोप लगाया। अपने भाषण के समापन में राज ठाकरे ने तर्क दिया कि पारदर्शी और निर्विवाद चुनाव सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका कागजी मतपत्रों को बहाल करना है। उन्होंने कहा कि यदि ये दोनों मांगें पूरी हो जाती हैं, तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। उसके बाद, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन जीतता है या सत्ता में आता है, क्योंकि जनादेश वैध होगा।

विरोध मार्च में हजारों समर्थक केवल भारतीय तिरंगे के साथ मार्च करते हुए दिखाई दिए

मेट्रो सिनेमा से लेकर सीएसएमटी स्थित बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) मुख्यालय तक फैले विरोध मार्च में हजारों समर्थक केवल भारतीय तिरंगे के साथ मार्च करते हुए दिखाई दिए और उन्होंने पार्टी के झंडों का कड़ाई से त्याग किया। इस रैली में विपक्षी दलों का एक व्यापक गठबंधन एकजुट हुआ, जिसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), कांग्रेस, किसान एवं मजदूर पार्टी ऑफ इंडिया (पीडब्ल्यूपी), वामपंथी दलों के साथ-साथ एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। यह हाई-प्रोफाइल संयुक्त रैली महाराष्ट्र में एक बड़े राजनीतिक टकराव का संकेत देती है, जो चुनाव आयोग को चुनौती देने के लिए विरोधी राजनीतिक गुटों को एक साथ लाती है।(इनपुट एजेंसी)