लखनऊ में पिता की डांट से नाराज 3 सगी बहनें घर छोड़कर लापता, हजरतगंज पुलिस ने 24 घंटे में चारबाग स्टेशन से किया बरामद
हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की पुलिस टीम महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। इसका नया उदाहरण लखनऊ के हजरतगंज थाने की पुलिस टीम ने एक बार फिर पेश किया है। दरअसल, लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र से पिता की डांट-फटकार से आहत होकर एक ही परिवार की 21 वर्षीय रूपाली, 19 वर्षीय अंतिमा और 18 वर्षीय चित्रैना नाम की तीन सगी बहनें अचानक घर छोड़कर लापता हो गईं।

परिजनों की सूचना मिलने के बाद लखनऊ की हजरतगंज पुलिस टीम में हड़कंप मच गया। आनन फानन में हजरतगंज थाने की पुलिस ने बेहद संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए खोजबीन अभियान चलाया और महज 24 घंटे के भीतर तीनों बहनों को चारबाग रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया। प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज विक्रम सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों पर तुरंत दबिश व चेकिंग शुरू की, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।
सुबह ट्रेन से वाराणसी गई थीं तीनों
तीनों बहनों के सकुशल बरामदगी के बाद हुई पुलिस की पूछताछ और काउंसलिंग के दौरान बड़ी बहन रूपाली ने बताया कि पिता पढ़ाई को लेकर अक्सर डांटते थे और कभी-कभी पिटाई भी कर देते थे। इसी से आहत होकर तीनों बहनों ने घर छोड़ने का फैसला किया। वे शनिवार सुबह चुपचाप ट्रेन पकड़कर वाराणसी चली गईं। वहां दिनभर घूमने के बाद जब उनके पास रखे सारे पैसे खत्म हो गए, तो वे वापस लखनऊ आने वाली ट्रेन में सवार हो गईं। चारबाग स्टेशन पहुंचने के बाद उन्हें पिता की डांट और दोबारा पिटाई का डर सताने लगा, जिसके कारण वे घर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं और स्टेशन परिसर में ही बैठी रह गईं।
पुलिस ने चलाया चेकिंग अभियान
युवतियों के लापता होने की शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया। हजरतगंज पुलिस की विभिन्न टीमों ने इलाके के प्रमुख बाजारों के अलावा आलमबाग बस स्टैंड, चारबाग बस स्टैंड, अवध बस स्टैंड और चारबाग रेलवे स्टेशन पर सघन तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान रेलवे स्टेशन पर गश्त कर रही टीम को तीनों युवतियां सुरक्षित मिल गईं। बरामदगी के उपरांत पुलिसकर्मियों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पहले उन्हें भोजन कराया, स्नेहपूर्वक बातचीत कर उनका डर दूर किया और फिर हजरतगंज थाने ले आई।
थाने में बेटियों को देख रो पड़े माता-पिता
बेटियों के लापता होने के बाद से पिता विनोद, मां सुनीता और पूरा परिवार गहरे सदमे और अनहोनी की आशंका में था। जैसे ही परिजनों को उनके सकुशल मिलने की सूचना मिली, वे दौड़ते हुए थाने पहुंचे। अपनी तीनों बेटियों को सही-सलामत सामने पाकर माता-पिता भावुक हो उठे और उनकी आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। परिजनों ने पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए आभार प्रकट किया। पुलिस अधिकारियों ने युवतियों को समझाया कि भविष्य में किसी भी परेशानी में घर छोड़ने के बजाय परिजनों अथवा पुलिस से संपर्क करें। इसके बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कर तीनों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस सराहनीय बचाव अभियान में निरीक्षक संतोष पटेल, उपनिरीक्षक अमित सिंह, सुधा दीक्षित, निशा सिंह, हेमंत वर्मा, स्वतंत्र पटेल और मुख्य आरक्षी रोशन ने प्रमुख भूमिका निभाई।
परिजनों की सूचना मिलने के बाद लखनऊ की हजरतगंज पुलिस टीम में हड़कंप मच गया। आनन फानन में हजरतगंज थाने की पुलिस ने बेहद संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए खोजबीन अभियान चलाया और महज 24 घंटे के भीतर तीनों बहनों को चारबाग रेलवे स्टेशन से सकुशल बरामद कर लिया। प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज विक्रम सिंह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों पर तुरंत दबिश व चेकिंग शुरू की, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।
सुबह ट्रेन से वाराणसी गई थीं तीनों
तीनों बहनों के सकुशल बरामदगी के बाद हुई पुलिस की पूछताछ और काउंसलिंग के दौरान बड़ी बहन रूपाली ने बताया कि पिता पढ़ाई को लेकर अक्सर डांटते थे और कभी-कभी पिटाई भी कर देते थे। इसी से आहत होकर तीनों बहनों ने घर छोड़ने का फैसला किया। वे शनिवार सुबह चुपचाप ट्रेन पकड़कर वाराणसी चली गईं। वहां दिनभर घूमने के बाद जब उनके पास रखे सारे पैसे खत्म हो गए, तो वे वापस लखनऊ आने वाली ट्रेन में सवार हो गईं। चारबाग स्टेशन पहुंचने के बाद उन्हें पिता की डांट और दोबारा पिटाई का डर सताने लगा, जिसके कारण वे घर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं और स्टेशन परिसर में ही बैठी रह गईं।
पुलिस ने चलाया चेकिंग अभियान
युवतियों के लापता होने की शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया। हजरतगंज पुलिस की विभिन्न टीमों ने इलाके के प्रमुख बाजारों के अलावा आलमबाग बस स्टैंड, चारबाग बस स्टैंड, अवध बस स्टैंड और चारबाग रेलवे स्टेशन पर सघन तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान रेलवे स्टेशन पर गश्त कर रही टीम को तीनों युवतियां सुरक्षित मिल गईं। बरामदगी के उपरांत पुलिसकर्मियों ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पहले उन्हें भोजन कराया, स्नेहपूर्वक बातचीत कर उनका डर दूर किया और फिर हजरतगंज थाने ले आई।
थाने में बेटियों को देख रो पड़े माता-पिता
बेटियों के लापता होने के बाद से पिता विनोद, मां सुनीता और पूरा परिवार गहरे सदमे और अनहोनी की आशंका में था। जैसे ही परिजनों को उनके सकुशल मिलने की सूचना मिली, वे दौड़ते हुए थाने पहुंचे। अपनी तीनों बेटियों को सही-सलामत सामने पाकर माता-पिता भावुक हो उठे और उनकी आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। परिजनों ने पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए आभार प्रकट किया। पुलिस अधिकारियों ने युवतियों को समझाया कि भविष्य में किसी भी परेशानी में घर छोड़ने के बजाय परिजनों अथवा पुलिस से संपर्क करें। इसके बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कर तीनों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस सराहनीय बचाव अभियान में निरीक्षक संतोष पटेल, उपनिरीक्षक अमित सिंह, सुधा दीक्षित, निशा सिंह, हेमंत वर्मा, स्वतंत्र पटेल और मुख्य आरक्षी रोशन ने प्रमुख भूमिका निभाई।
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