बांकीपुर के नतीजे से बिहार की सियासत में होंगे कई बदलाव, क्या प्रशांत किशोर के लिए चक्रव्यूह रच रही है BJP?

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पटना: बिहार बीजेपी के रणनीतिकारों के सामने प्रशांत किशोर फिलहाल सबसे बड़े टारगेट बन कर सामने खड़े हैं। वजह भी सामने है। अभी तक जिस व्यवस्था में रह कर कांग्रेस, राजद या अन्य दलों के हमले बीजेपी झेल रही हैं। वह दल भी उसी व्यवस्था में रह कर विरोध का परचम लहरा रही है। लेकिन जन सुराज व्यवस्था बदलने की राजनीति को तरहीज देते, ऐसा जनमत तैयार करना चाहती है जो न तो बीजेपी को और न ही राजद की राजनीति को पसंद करते हो।
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इसलिए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव बीजेपी लिए एक विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव भर नहीं है बल्कि यह चुनाव जन सुराज की राजनीति को बेपटरी करने की है। बीजेपी क्यों ऐसा चाहती है और कैसे करती है।


'बीजेपी लगातार चुनावी मोड में रहती है'
भारतीय जनता पार्टी संभवतः देश की इकलौती पार्टी होगी जो वर्ष के 365 दिन चुनावी मूड में रहती है। इस चुनावी मूड में बीजेपी टारगेटेड वर्क करती है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे जेपी नड्डा ने बिहार की एक जनसभा को संबोधित करते कहा था कि यदि भाजपा अपनी विचारधारा पर चलती रही, तो देश की सभी क्षेत्रीय पार्टियां धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।

बिहार में जन सुराज एक नए विकल्प की वकालत करते ज्यादा ध्यान जन संपर्क को दे रही है। चुनाव में उतरने के पहले पूरे बिहार को यात्रा के मतलब से समझने की कोशिश भी की। प्रारंभ में यह प्रभावित होते दिखा भी। लेकिन वर्ष 2025 चुनाव में मिली असफलता जन सुराज के लिए एक बड़ा झटका था। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर खुद को चुनावी जंग में उतारकर अपनी राजनीति को आवाज दे रहे हैं।


जातीय तानाबाना बने रहे
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का महत्व इस बात से समझिए कि बीजेपी ने जातीय कद्दावर नेताओं की फौज बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उतार दी है। भरत तिवारी एनकाउंटर में फजीहत झेल रही वर्तमान सरकार ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में ब्राह्मण मतों के बिखराव रोकने को पांच पांडव को उतारा है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे, केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दूबे, भोजपुरी गायक मनोज तिवारी, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और पूर्व स्वास्थ मंत्री मंगल पांडेय को उतारा है।

भूमिहार की कमान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह,कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा जैसे दिग्गज संभाल रहे है। ये तो चंद बानगी है। बीजेपी के टॉप चालीस स्टार प्रचारकों में अन्य जाति के कद्दावर नेता शामिल है जो प्रशांत किशोर के जातिविहीन समाज की कल्पना को तार तार करने में जुटे हैं।


दलों को कमजोर करना
बीजेपी जब चुनावी जंग में उतरती है तो यह कोशिश भी होती है कि कैसे प्रतिद्वंद्वी दल को कमजोर किया जाए। बीजेपी के रणनीतिकार प्रतिद्वंदी दल के महत्वाकांक्षी नेताओं पर डोरे डालेंगे और उन्हें प्रलोभन दे कर पार्टी से तोड़ लेंगे और अपनी पार्टी में शामिल कर लेंगे। केसी सिन्हा, बिट्टू सिंह के साथ अन्य नेताओं को भाजपा की सदस्यता दिलाना एक उदाहरण भी है।