दिल्ली का मास्टर प्लान बदलेगा रात की तस्वीर! नाइटलाइफ का इंतजाम, 24 घंटे खुलेंगे रेस्टोरेंट-बाजार
नई दिल्ली: ड्राफ्ट मास्टर प्लान-2047 के तहत दिल्ली को लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क जैसी वैश्विक पहचान दिलाने के लिए 24x7 काम और मनोरंजन की दिशा में आगे बढ़ाने का विजन रखा गया है। योजना में हेरिटेज क्षेत्रों, सांस्कृतिक परिसरों और सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में नाइटलाइफ सर्किट विकसित करने का प्रस्ताव है। इन क्षेत्रों में रेस्टोरेंट, होटल, बाजार, रिटेल स्टोर और अन्य कमर्शियल गतिविधियां 24 घंटे संचालित हो सकेंगी। इसके साथ ही आर्थिक गतिविधियों और नाइटलाइफ को बढ़ावा देने के लिए देर रात विशेष मेट्रो लाइन और बस रूट शुरू करने का भी प्रस्ताव है।

नाइटलाइफ सर्किट में होटल-रेस्टोरेंट से लेकर मनोरंजन तकमास्टर प्लान के तहत ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां सांस्कृतिक परिसर, धरोहर स्थल और अन्य गतिविधियां मौजूद हैं। इन्हें नाइटलाइफ सर्किट के तौर पर विकसित किया जाएगा। विभिन्न विभाग मिलकर इन सर्किट की पहचान करेंगे। यहां होटल, रेस्टोरेंट, सांस्कृतिक गतिविधियों, मनोरंजन, नाइट गेम्स और रिटेल स्टोर की गतिविधियां बढ़ाने पर काम होगा। यह काम टूरिज्म डिपार्टमेंट, एमसीडी और अन्य एजेंसियां मिलकर करेंगी। इन सर्किट में रोशनी, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे। रात के समय विशेष मेट्रो लाइन और बस रूट की मंजूरी भी दी जा सकती है।
कलाकारों और वेंडरों को भी जोड़ा जाएगानाइटलाइफ सर्किट के आसपास होने वाले निर्माण और री-डेवलपमेंट को एक्टिव फ्रंट के लिए प्रमोट करने का प्रस्ताव है। इन जगहों पर सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी। इसमें कलाकारों, कल्चरल ग्रुप और वेंडर आदि को भी शामिल किया जाएगा। यहां सीजनल कल्चरल फेस्टिवल आदि आयोजित करने की भी योजना है। इस तरह मास्टर प्लान का उद्देश्य दिल्ली की रातों को रोशन करने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है।
यमुना फ्लडप्लेन को O-1 और O-2 में बांटने का प्रस्तावड्राफ्ट मास्टर प्लान-2047 में यमुना के फ्लडप्लेन यानी O-Zone में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इसे दो हिस्सों O-1 यानी कोर जोन और O-2 यानी बफर जोन में बांटने की बात कही गई है। नदी के सबसे करीब और ऐसे हिस्से, जहां 25 साल में एक बार बाढ़ आई हो, उन्हें O-1 में रखा जाएगा। इस कोर जोन को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा और यहां किसी भी तरह के निर्माण या विकास पर रोक होगी। वहीं O-2 में तय नियमों के तहत सीमित गतिविधियों की अनुमति देने का प्रस्ताव है।
यमुना किनारे नियंत्रित मनोरंजक गतिविधियां होंगीO-2 में बिना नियंत्रण के निर्माण की अनुमति देने की योजना नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां फ्लडप्लेन की पर्यावरणीय और बाढ़ नियंत्रण क्षमता को नुकसान पहुंचाए बिना सीमित मनोरंजक गतिविधियां कराई जा सकें। यहां पिकनिक, ग्रीन स्पेस और कुछ अन्य मनोरंजक गतिविधियां तय नियमों के तहत हो सकेंगी। डीडीए के अनुसार, इससे लोगों का नदी से जुड़ाव बढ़ेगा और वे यमुना के प्रति अधिक जिम्मेदार होंगे।
बाढ़ के पानी के स्टोरेज के लिए जलाशयों का होगा विकासयोजना में पुराने जलाशयों से गाद निकालकर उन्हें बहाल करने और प्राकृतिक निचले इलाकों को स्टोरेज बेसिन में बदलने का भी प्रस्ताव है। इससे बाढ़ के पानी को स्टोर करने और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अवैध निर्माण, मलबा डालने और बिना ट्रीटमेंट सीवेज छोड़ने पर निगरानी बढ़ाने की भी बात कही गई है। सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के लिए चुनिंदा स्थान तय करने का प्रस्ताव है। इन जगहों पर पूजा सामग्री, मूर्ति विसर्जन, घाट के इस्तेमाल और कचरे के निस्तारण के लिए नियम लागू होंगे, ताकि पूजा सामग्री यमुना में न जाए।
पर्यावरणविदों ने फ्लडप्लेन को लेकर जताई चिंतापर्यावरणविदों ने फ्लडप्लेन में प्रस्तावित बदलावों को लेकर चिंता जताई है। SANDRP के कोऑर्डिनेटर भौम सिंह ठका ने कहा कि फ्लडप्लेन तय करने का आधार 25 साल के बजाय 100 साल की बाढ़ को बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालिया बाढ़ से भी पता चला है कि कम डिस्चार्ज के बावजूद दिल्ली में यमुना की पानी बहन करने की क्षमता प्रभावित हुई है। एक्टिविस्ट दीकन सिंह ने कहा कि नए सिस्टम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि O-2 में मनोरंजक गतिविधियों और पार्क आदि की परिभाषा कितनी सीमित रखी जाती है और यह कैसे सुनिश्चित होगा कि इन गतिविधियों से बाढ़ के पानी को रोकने की क्षमता प्रभावित न हो।
70 गांवों में विकास और कमर्शियल गतिविधियों का रास्ताड्राफ्ट मास्टर प्लान-2047 से दिल्ली के गांवों में भी विकास की राह खुलने की उम्मीद है। योजना में करीब 70 गांवों में कमर्शियल गतिविधियों का रास्ता खोलने की बात है। इनमें टिकरी कलां, मित्राऊ, दासना के साथ महरौली, छतरपुर और सतबरी जैसे इलाके शामिल हैं। इनमें से 47 गांव ऐसे थे, जहां नए आवासीय और व्यावसायिक निर्माण पर कई तरह की पाबंदियां थीं, जबकि 20 गांवों पर इस तरह के प्रतिबंध लागू नहीं थे। योजना में इन क्षेत्रों में विकास के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क नेटवर्क पर भी फोकस किया गया है।
चौड़ी सड़कों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोरगांवों और अन्य विकास क्षेत्रों में हरित विकास के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क नेटवर्क को बेहतर करने पर जोर दिया गया है। इसके तहत 12 मीटर, 18 मीटर और 30 मीटर चौड़ी सड़कों का प्रावधान किए जाने पर फोकस है। मास्टर प्लान का उद्देश्य विकास के साथ सड़कों और बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत करना है।
पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारीमास्टर प्लान-2047 में दिल्ली के पानी के संकट का समाधान करने पर भी जोर दिया गया है। वर्ष 2047 तक पानी की मांग 1,455 एमजीडी होने का अनुमान है, जबकि 2020 में 141 एमजीडी की कमी थी। इसे सुधारने के लिए पानी की खपत को 60 से घटाकर 50 जीपीसीडी करने और ड्यूल सप्लाई के जरिए फ्लश आदि के लिए ट्रीटेड पानी उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा 242 एमजीडी अनट्रीटेड पानी को ट्रीट करने का लक्ष्य रखा गया है।
सोलर ऊर्जा से बिजली की जरूरत पूरी करने पर फोकसबिजली के क्षेत्र में भी भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर फोकस रहेगा। अगले 10 वर्षों में बिजली की पीक डिमांड दोगुनी होने और प्रति व्यक्ति 1,561 यूनिट खपत को देखते हुए सौर ऊर्जा बढ़ाने की योजना है।
बढ़ती गाड़ियों के बीच पार्किंग समस्या का समाधानदिल्ली में पार्किंग की समस्या को देखते हुए नए मास्टर प्लान में दिल्ली की पार्किंग पॉलिसी को भी शामिल किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, हर 1,000 लोगों में 643 लोगों के पास गाड़ियां हैं, जबकि 2005-06 में यह संख्या सिर्फ 17 प्रति 1,000 थी। बढ़ती वाहन संख्या को देखते हुए पार्किंग की समस्या के समाधान पर भी मास्टर प्लान में फोकस किया गया है।
व्यापारियों ने जताई नाराजगीमास्टर प्लान-2047 को लेकर डीडीए मार्केट्स की कमिटी ने भी नाराजगी जताई है। कमिटी के सीनियर एग्जीक्यूटिव मेंबर एस.एस. भाटिया ने बताया कि निकट यूज और नियमों में राहत के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा गया है।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशानाकांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकेश शर्मा ने भी मास्टर प्लान-2047 को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे जल्दबाजी में लाया गया है और इसमें दिल्ली के ग्रामीणों, शहरीकृत गांवों और आम लोगों के हितों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
नाइटलाइफ सर्किट में होटल-रेस्टोरेंट से लेकर मनोरंजन तकमास्टर प्लान के तहत ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां सांस्कृतिक परिसर, धरोहर स्थल और अन्य गतिविधियां मौजूद हैं। इन्हें नाइटलाइफ सर्किट के तौर पर विकसित किया जाएगा। विभिन्न विभाग मिलकर इन सर्किट की पहचान करेंगे। यहां होटल, रेस्टोरेंट, सांस्कृतिक गतिविधियों, मनोरंजन, नाइट गेम्स और रिटेल स्टोर की गतिविधियां बढ़ाने पर काम होगा। यह काम टूरिज्म डिपार्टमेंट, एमसीडी और अन्य एजेंसियां मिलकर करेंगी। इन सर्किट में रोशनी, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे। रात के समय विशेष मेट्रो लाइन और बस रूट की मंजूरी भी दी जा सकती है।
कलाकारों और वेंडरों को भी जोड़ा जाएगानाइटलाइफ सर्किट के आसपास होने वाले निर्माण और री-डेवलपमेंट को एक्टिव फ्रंट के लिए प्रमोट करने का प्रस्ताव है। इन जगहों पर सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी। इसमें कलाकारों, कल्चरल ग्रुप और वेंडर आदि को भी शामिल किया जाएगा। यहां सीजनल कल्चरल फेस्टिवल आदि आयोजित करने की भी योजना है। इस तरह मास्टर प्लान का उद्देश्य दिल्ली की रातों को रोशन करने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देना है।
यमुना फ्लडप्लेन को O-1 और O-2 में बांटने का प्रस्तावड्राफ्ट मास्टर प्लान-2047 में यमुना के फ्लडप्लेन यानी O-Zone में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इसे दो हिस्सों O-1 यानी कोर जोन और O-2 यानी बफर जोन में बांटने की बात कही गई है। नदी के सबसे करीब और ऐसे हिस्से, जहां 25 साल में एक बार बाढ़ आई हो, उन्हें O-1 में रखा जाएगा। इस कोर जोन को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा और यहां किसी भी तरह के निर्माण या विकास पर रोक होगी। वहीं O-2 में तय नियमों के तहत सीमित गतिविधियों की अनुमति देने का प्रस्ताव है।
यमुना किनारे नियंत्रित मनोरंजक गतिविधियां होंगीO-2 में बिना नियंत्रण के निर्माण की अनुमति देने की योजना नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां फ्लडप्लेन की पर्यावरणीय और बाढ़ नियंत्रण क्षमता को नुकसान पहुंचाए बिना सीमित मनोरंजक गतिविधियां कराई जा सकें। यहां पिकनिक, ग्रीन स्पेस और कुछ अन्य मनोरंजक गतिविधियां तय नियमों के तहत हो सकेंगी। डीडीए के अनुसार, इससे लोगों का नदी से जुड़ाव बढ़ेगा और वे यमुना के प्रति अधिक जिम्मेदार होंगे।
बाढ़ के पानी के स्टोरेज के लिए जलाशयों का होगा विकासयोजना में पुराने जलाशयों से गाद निकालकर उन्हें बहाल करने और प्राकृतिक निचले इलाकों को स्टोरेज बेसिन में बदलने का भी प्रस्ताव है। इससे बाढ़ के पानी को स्टोर करने और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिल सकती है। अवैध निर्माण, मलबा डालने और बिना ट्रीटमेंट सीवेज छोड़ने पर निगरानी बढ़ाने की भी बात कही गई है। सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के लिए चुनिंदा स्थान तय करने का प्रस्ताव है। इन जगहों पर पूजा सामग्री, मूर्ति विसर्जन, घाट के इस्तेमाल और कचरे के निस्तारण के लिए नियम लागू होंगे, ताकि पूजा सामग्री यमुना में न जाए।
पर्यावरणविदों ने फ्लडप्लेन को लेकर जताई चिंतापर्यावरणविदों ने फ्लडप्लेन में प्रस्तावित बदलावों को लेकर चिंता जताई है। SANDRP के कोऑर्डिनेटर भौम सिंह ठका ने कहा कि फ्लडप्लेन तय करने का आधार 25 साल के बजाय 100 साल की बाढ़ को बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालिया बाढ़ से भी पता चला है कि कम डिस्चार्ज के बावजूद दिल्ली में यमुना की पानी बहन करने की क्षमता प्रभावित हुई है। एक्टिविस्ट दीकन सिंह ने कहा कि नए सिस्टम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि O-2 में मनोरंजक गतिविधियों और पार्क आदि की परिभाषा कितनी सीमित रखी जाती है और यह कैसे सुनिश्चित होगा कि इन गतिविधियों से बाढ़ के पानी को रोकने की क्षमता प्रभावित न हो।
70 गांवों में विकास और कमर्शियल गतिविधियों का रास्ताड्राफ्ट मास्टर प्लान-2047 से दिल्ली के गांवों में भी विकास की राह खुलने की उम्मीद है। योजना में करीब 70 गांवों में कमर्शियल गतिविधियों का रास्ता खोलने की बात है। इनमें टिकरी कलां, मित्राऊ, दासना के साथ महरौली, छतरपुर और सतबरी जैसे इलाके शामिल हैं। इनमें से 47 गांव ऐसे थे, जहां नए आवासीय और व्यावसायिक निर्माण पर कई तरह की पाबंदियां थीं, जबकि 20 गांवों पर इस तरह के प्रतिबंध लागू नहीं थे। योजना में इन क्षेत्रों में विकास के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क नेटवर्क पर भी फोकस किया गया है।
चौड़ी सड़कों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोरगांवों और अन्य विकास क्षेत्रों में हरित विकास के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क नेटवर्क को बेहतर करने पर जोर दिया गया है। इसके तहत 12 मीटर, 18 मीटर और 30 मीटर चौड़ी सड़कों का प्रावधान किए जाने पर फोकस है। मास्टर प्लान का उद्देश्य विकास के साथ सड़कों और बुनियादी सुविधाओं को भी मजबूत करना है।
पानी की बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारीमास्टर प्लान-2047 में दिल्ली के पानी के संकट का समाधान करने पर भी जोर दिया गया है। वर्ष 2047 तक पानी की मांग 1,455 एमजीडी होने का अनुमान है, जबकि 2020 में 141 एमजीडी की कमी थी। इसे सुधारने के लिए पानी की खपत को 60 से घटाकर 50 जीपीसीडी करने और ड्यूल सप्लाई के जरिए फ्लश आदि के लिए ट्रीटेड पानी उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा 242 एमजीडी अनट्रीटेड पानी को ट्रीट करने का लक्ष्य रखा गया है।
सोलर ऊर्जा से बिजली की जरूरत पूरी करने पर फोकसबिजली के क्षेत्र में भी भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर फोकस रहेगा। अगले 10 वर्षों में बिजली की पीक डिमांड दोगुनी होने और प्रति व्यक्ति 1,561 यूनिट खपत को देखते हुए सौर ऊर्जा बढ़ाने की योजना है।
बढ़ती गाड़ियों के बीच पार्किंग समस्या का समाधानदिल्ली में पार्किंग की समस्या को देखते हुए नए मास्टर प्लान में दिल्ली की पार्किंग पॉलिसी को भी शामिल किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, हर 1,000 लोगों में 643 लोगों के पास गाड़ियां हैं, जबकि 2005-06 में यह संख्या सिर्फ 17 प्रति 1,000 थी। बढ़ती वाहन संख्या को देखते हुए पार्किंग की समस्या के समाधान पर भी मास्टर प्लान में फोकस किया गया है।
व्यापारियों ने जताई नाराजगीमास्टर प्लान-2047 को लेकर डीडीए मार्केट्स की कमिटी ने भी नाराजगी जताई है। कमिटी के सीनियर एग्जीक्यूटिव मेंबर एस.एस. भाटिया ने बताया कि निकट यूज और नियमों में राहत के लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा गया है।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशानाकांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकेश शर्मा ने भी मास्टर प्लान-2047 को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे जल्दबाजी में लाया गया है और इसमें दिल्ली के ग्रामीणों, शहरीकृत गांवों और आम लोगों के हितों के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
Next Story