इंस्टाग्राम पर 'राधा कृष्णा' बनकर आतंक की साजिश रच रहा था शाकिब, वॉट्सऐप पर बनाया 'MUSLIM ARMY GROUP'
लखनऊ: देश में रेलवे ट्रैक और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों पर आतंकी हमलों की साजिश रचने वाला शाकिब उर्फ डेविल इंस्टाग्राम पर 'RADHA KRISHNA' नाम से आईडी बनाकर जिहादियों को जोड़ रहा था। इसके लिए उसने वॉट्सऐप पर 'MUSLIM ARMY GROUP' भी बना रखा था। इंस्टाग्रम पर उसकी KING DEVIL 315 नाम की भी आईडी थी। शाकिब और उसके साथी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के निर्देश पर दिल्ली-एनसीआर से लेकर लखनऊ तक आगजनी और तोड़फोड़ कर दहशत फैलाने की तैयारी में थे।

पाकिस्तानी हैंडलर से सीधा कनेक्शनएटीएस द्वारा बरामद मोबाइल फोन की जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी हैंडलर भारत में 'मुसलमानों पर जुल्म' का नरेटिव बनाकर सरकारी संपत्तियों और सार्वजनिक सुविधाओं को आग के हवाले करने के लिए उकसाता था। शुरुआती चरण में 'छोटी आगजनी' कर भरोसा जीतने और फिर 'बड़ी घटना' अंजाम देने की योजना बताई गई। जांच में खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी हैंडलर गूगल मैप के जरिए टारगेट की स्क्रीन रेकॉर्डिंग भेजता था। इन्हें शाकिब अपने साथियों विकास उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ पपला पंडित और अरबाब तक पहुंचाता था।
अलीगढ़ के कार शोरूम को बनाया टारगेट इस तरह दिल्ली, अलीगढ़, गजियाबाद और लखनऊ में अलग-अलग ठिकानों की रेकी करवाई गई। बरामद डिजिटल साक्ष्यों में मेरठ बाईपास स्थित 'ऑटो टाइटन्स' शोरूम (राज्जनगर एक्सटेशन, गाजियाबाद) की लोकेशन विडियो, शालीमार गार्डन साहिबाबाद इलाके की रेकी तस्वीरें, और अन्य संवेदनशील जगहों के मैन व क्लिप शामिल हैं। अलीगढ़ में एक कार शोरूम को टारगेट के रूप में चुना गया था।
खड़े ट्रकों को आग लगाने को लेकर हुई हैंडलर से बातएटीएस को आरोपितों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान ऐसी ऑडियो और चैट मिली, जिनसे स्पष्ट होता है कि गिरोह सड़क किनारे खड़े ट्रकों को आग लगाने की साजिश बना रहे थे। इसके अलावा आरोपित लोकेश उर्फ पपला पंडित ने पूछताछ में बताया कि उसने चार मार्च को गाजियाबाद में सड़क किनारे खड़े ट्रकों का विडियो बनाकर विकास उर्फ रौनक को भेजा था और उसके बाद पूछा था- 'क्या इन ट्रकों में आग लगा दें?'
हैंडलर ने भेजे ऑडियो संदेशइन बातचीतों से यह साफ होता है कि गिरोह योजनाबद्ध तरीके से ऐसे ठिकानों को चुन रहा था, जहां सुरक्षा कम हो और आगजनी से अधिक दहशत व नुकसान पैदा किया जा सके। इसके अलावा बातचीत में 'विडियो बनाकर भेजो', 'लोकेशन मिली या नहीं', और 'अगर तुम नहीं करोगे तो दूसरा शोरूम फूंका जाएगा' जैसे वाक्य सामने आए। एक ऑडियो में बाजार/शोरूम को को किस तरह आग के हवाले करने की 'तरतीब' बताने का जिक्र है। पांच दिन की कस्टडी रिमांड के दौरान शाकिब और रौनक ने पुष्टि की कि ये पाकिस्तानी हैंडलर के भेजे ऑडियो संदेश है।
'जुल्म और अत्याचार का जवाब देना हमारा हक'एटीएस को शाकिब और उसके साथियों के पास से हिंदी भाषा में छपे हुए पंफ्लेट मिले थे। इन पंफ्लेटों का उद्देश्य घटना के बाद इलाके में दहशत और आतंक का माहौल बनाना था। पंपलेट में लिखा संदेश इस प्रकार था 'हम यह एलान करते हैं कि जो जुल्म और अत्याचार हमारे लोगों पर किए जा रहे हैं, उनका जवाब देना हमारा हक है। हम अपने मकसद से पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने रास्ते पर चलते रहेंगे। यह केवल एक शुरुआत है, आगे और भी कदम उठाए जाएंगे।'
एक रेकी के लिए भेजे 13 हजार रुपये एटीएस की पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे वारदात को अंजाम देने के बाद ऐसे पम्पलेट घटनास्थल के आसपास फेंकते थे, ताकि लोगों में भय फैले। इसके साथ-साथ पम्पलेट फेंकने और आगजनी की पूरी घटना का विडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा जाता था, जिससे वहां बैठे साजिशकर्ताओं को यह संदेश जा सके कि उनके निर्देशों र काम किया गया है। पूछताछ में यह भी उजागर हुआ कि गाजियाबाद की एक रेकी के लिए हैंडलर ने क्यूआर कोड के जरिए 13,000 भेजे थे।
पाकिस्तानी हैंडलर से सीधा कनेक्शनएटीएस द्वारा बरामद मोबाइल फोन की जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तानी हैंडलर भारत में 'मुसलमानों पर जुल्म' का नरेटिव बनाकर सरकारी संपत्तियों और सार्वजनिक सुविधाओं को आग के हवाले करने के लिए उकसाता था। शुरुआती चरण में 'छोटी आगजनी' कर भरोसा जीतने और फिर 'बड़ी घटना' अंजाम देने की योजना बताई गई। जांच में खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी हैंडलर गूगल मैप के जरिए टारगेट की स्क्रीन रेकॉर्डिंग भेजता था। इन्हें शाकिब अपने साथियों विकास उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ पपला पंडित और अरबाब तक पहुंचाता था।
अलीगढ़ के कार शोरूम को बनाया टारगेट इस तरह दिल्ली, अलीगढ़, गजियाबाद और लखनऊ में अलग-अलग ठिकानों की रेकी करवाई गई। बरामद डिजिटल साक्ष्यों में मेरठ बाईपास स्थित 'ऑटो टाइटन्स' शोरूम (राज्जनगर एक्सटेशन, गाजियाबाद) की लोकेशन विडियो, शालीमार गार्डन साहिबाबाद इलाके की रेकी तस्वीरें, और अन्य संवेदनशील जगहों के मैन व क्लिप शामिल हैं। अलीगढ़ में एक कार शोरूम को टारगेट के रूप में चुना गया था।
खड़े ट्रकों को आग लगाने को लेकर हुई हैंडलर से बातएटीएस को आरोपितों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान ऐसी ऑडियो और चैट मिली, जिनसे स्पष्ट होता है कि गिरोह सड़क किनारे खड़े ट्रकों को आग लगाने की साजिश बना रहे थे। इसके अलावा आरोपित लोकेश उर्फ पपला पंडित ने पूछताछ में बताया कि उसने चार मार्च को गाजियाबाद में सड़क किनारे खड़े ट्रकों का विडियो बनाकर विकास उर्फ रौनक को भेजा था और उसके बाद पूछा था- 'क्या इन ट्रकों में आग लगा दें?'
हैंडलर ने भेजे ऑडियो संदेशइन बातचीतों से यह साफ होता है कि गिरोह योजनाबद्ध तरीके से ऐसे ठिकानों को चुन रहा था, जहां सुरक्षा कम हो और आगजनी से अधिक दहशत व नुकसान पैदा किया जा सके। इसके अलावा बातचीत में 'विडियो बनाकर भेजो', 'लोकेशन मिली या नहीं', और 'अगर तुम नहीं करोगे तो दूसरा शोरूम फूंका जाएगा' जैसे वाक्य सामने आए। एक ऑडियो में बाजार/शोरूम को को किस तरह आग के हवाले करने की 'तरतीब' बताने का जिक्र है। पांच दिन की कस्टडी रिमांड के दौरान शाकिब और रौनक ने पुष्टि की कि ये पाकिस्तानी हैंडलर के भेजे ऑडियो संदेश है।
'जुल्म और अत्याचार का जवाब देना हमारा हक'एटीएस को शाकिब और उसके साथियों के पास से हिंदी भाषा में छपे हुए पंफ्लेट मिले थे। इन पंफ्लेटों का उद्देश्य घटना के बाद इलाके में दहशत और आतंक का माहौल बनाना था। पंपलेट में लिखा संदेश इस प्रकार था 'हम यह एलान करते हैं कि जो जुल्म और अत्याचार हमारे लोगों पर किए जा रहे हैं, उनका जवाब देना हमारा हक है। हम अपने मकसद से पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने रास्ते पर चलते रहेंगे। यह केवल एक शुरुआत है, आगे और भी कदम उठाए जाएंगे।'
एक रेकी के लिए भेजे 13 हजार रुपये एटीएस की पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे वारदात को अंजाम देने के बाद ऐसे पम्पलेट घटनास्थल के आसपास फेंकते थे, ताकि लोगों में भय फैले। इसके साथ-साथ पम्पलेट फेंकने और आगजनी की पूरी घटना का विडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा जाता था, जिससे वहां बैठे साजिशकर्ताओं को यह संदेश जा सके कि उनके निर्देशों र काम किया गया है। पूछताछ में यह भी उजागर हुआ कि गाजियाबाद की एक रेकी के लिए हैंडलर ने क्यूआर कोड के जरिए 13,000 भेजे थे।
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