जंतर मंतर प्रोटेस्ट: पुलिसकर्मियों की नेम प्लेट गायब? दिल्ली पुलिस ने बताई वजह
नई दिल्लीः जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों की वर्दी पर नेमप्लेट नजर नहीं आने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में प्रदर्शनकारी पुलिसवालों से उनका नाम और पहचान पूछते दिखे। इस बीच दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने कहा है कि जवानों को नेमप्लेट नहीं लगाने का कोई आदेश नहीं दिया गया था। हालांकि, कुछ अधिकारियों ने इसकी गैरमौजूदगी के पीछे अलग-अलग व्यावहारिक और सुरक्षा कारण बताए हैं।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जंतर-मंतर पर इन दिनों CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों से साफ तौर पर पूछा कि अगर वे कानून-व्यवस्था संभाल रहे हैं तो उनकी पहचान वर्दी पर दिखाई क्यों नहीं दे रही। वहीं, पुलिसकर्मियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान नाम साफ दिखने से उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं।
नेमप्लेट को लेकर पुलिस का क्या कहना है?दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं हुआ कि जवान नेमप्लेट न लगाएं। कुछ जूनियर पुलिसकर्मियों ने बताया कि नेमप्लेट पिन से लगी होती है और धक्का-मुक्की के दौरान वह गिर सकती है। एक अधिकारी के मुताबिक, पिन ढीली होने पर वह खुद पुलिसकर्मी या आसपास मौजूद लोगों को चुभ भी सकती है।
नियम में क्या है?दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 51 के अनुसार, सभी रैंक के पुलिसकर्मियों को दाएं सीने पर हिंदी और अंग्रेजी में नेमप्लेट पहननी होती है। गैर-राजपत्रित अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों की नेमप्लेट पर रैंक का उल्लेख भी होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर पहचान का डरपुलिस अधिकारियों ने एक और चिंता बताई। उनका कहना है कि नाम और चेहरा तस्वीर या वीडियो से सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मी की पहचान तलाशना आसान हो जाता है। इसके बाद उसके परिवार और बच्चों की जानकारी निकालकर उन्हें निशाना बनाने या ऑनलाइन परेशान करने का खतरा रहता है।
जुलाई के प्रदर्शन के बाद बढ़ी चिंताजुलाई में CJP के संसद मार्च के दौरान भी बिना नेमप्लेट वाले पुलिसकर्मियों को लेकर सवाल उठे थे। पुलिस ने बाद में कहा था कि कुछ नेमप्लेट धक्का-मुक्की में क्षतिग्रस्त हुई थीं।
पुलिस के भीतर भी अलग-अलग वजहेंदिलचस्प बात यह है कि हालिया रिपोर्टों में नेमप्लेट न दिखने को लेकर पुलिस की ओर से अलग-अलग वजहें सामने आई हैं। कुछ अधिकारी इसे ड्यूटी के दौरान पिन गिरने जैसी सामान्य समस्या बता रहे हैं, जबकि अन्य रिपोर्टों में सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों को निशाना बनाए जाने से बचाने की बात कही गई है।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जंतर-मंतर पर इन दिनों CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों से साफ तौर पर पूछा कि अगर वे कानून-व्यवस्था संभाल रहे हैं तो उनकी पहचान वर्दी पर दिखाई क्यों नहीं दे रही। वहीं, पुलिसकर्मियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान नाम साफ दिखने से उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं।
नेमप्लेट को लेकर पुलिस का क्या कहना है?दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं हुआ कि जवान नेमप्लेट न लगाएं। कुछ जूनियर पुलिसकर्मियों ने बताया कि नेमप्लेट पिन से लगी होती है और धक्का-मुक्की के दौरान वह गिर सकती है। एक अधिकारी के मुताबिक, पिन ढीली होने पर वह खुद पुलिसकर्मी या आसपास मौजूद लोगों को चुभ भी सकती है।
नियम में क्या है?दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 51 के अनुसार, सभी रैंक के पुलिसकर्मियों को दाएं सीने पर हिंदी और अंग्रेजी में नेमप्लेट पहननी होती है। गैर-राजपत्रित अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों की नेमप्लेट पर रैंक का उल्लेख भी होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर पहचान का डरपुलिस अधिकारियों ने एक और चिंता बताई। उनका कहना है कि नाम और चेहरा तस्वीर या वीडियो से सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मी की पहचान तलाशना आसान हो जाता है। इसके बाद उसके परिवार और बच्चों की जानकारी निकालकर उन्हें निशाना बनाने या ऑनलाइन परेशान करने का खतरा रहता है।
जुलाई के प्रदर्शन के बाद बढ़ी चिंताजुलाई में CJP के संसद मार्च के दौरान भी बिना नेमप्लेट वाले पुलिसकर्मियों को लेकर सवाल उठे थे। पुलिस ने बाद में कहा था कि कुछ नेमप्लेट धक्का-मुक्की में क्षतिग्रस्त हुई थीं।
पुलिस के भीतर भी अलग-अलग वजहेंदिलचस्प बात यह है कि हालिया रिपोर्टों में नेमप्लेट न दिखने को लेकर पुलिस की ओर से अलग-अलग वजहें सामने आई हैं। कुछ अधिकारी इसे ड्यूटी के दौरान पिन गिरने जैसी सामान्य समस्या बता रहे हैं, जबकि अन्य रिपोर्टों में सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों को निशाना बनाए जाने से बचाने की बात कही गई है।
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