मशीन से खुलने वाला दरवाजा, 17 सीसीटीवी कैमरे और किलेनुमा घर, दिल्ली की ड्रग क्वीन का साम्राज्य देखकर सब हैरान
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में ड्रग सिंडिकेट चलाने वाली 54 साल की लेडी डॉन कुसुम को दिल्ली पुलिस ने 9 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया। जिस हालात में कुसुम अरेस्ट हुई, वो हैरान करने वाली थी। उसे सुल्तानपुरी के जिस घर से पकड़ा गया, वह जेलनुमा किले की तरह था। लंबे समय तक फरार रहकर नशे का नेटवर्क चला रही कुसुम को गिरफ्तार करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कुसुम एक घोषित क्रिमिनल है। MCOCA जैसे कानून में मुख्य आरोपी है। पिछले साल उसे भगोड़ा घोषित किया गया था। गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये के इनाम का ऐलान था।

हैरान करने वाली एक बात यह भी है कि कुसुम अपने घर से ही काम करती थी। उसका ठिकाना ऐसी जगह था, जहां आपस में 4 मकान जुड़े हुए थे, जिनमें मशीनी दरवाजे, हर जगह CCTV कैमरे और निगरानी के लिए लोग मौजूद थे। DCP (शाहदरा) राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि पुलिस की एक टीम ने 200 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया और 100 से ज्यादा मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच की।
फोन इस्तेमाल नहीं करती थी कुसुमडीसीपी ने बताया कि कुसुम की गिरफ्तारी के लिए 3 राज्यों के कई ठिकानों पर छापे मारे गए। एक खास जानकारी के आधार पर आनंद विहार के पास एक जाल बिछाया गया। कुसुम ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे काबू पकड़ लिया गया। पकड़े जाने से बचने के लिए कुसुम ने जान-बूझकर स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं किया और बार-बार अपने बेसिक मोबाइल फोन, SIM कार्ड और ठिकाने बदलती रही, जिससे वह पूरी तरह से 'ऑफ द ग्रिड' (नजर से ओझल) रही।
दीवारें तोड़कर 4 घरों को जोड़ दियाहमारे सहयोगी अखबार TOI ने पिछले साल सबसे पहले कुसुम के इस ऑपरेशन के पैमाने और उसकी बारीकियों के बारे में रिपोर्ट किया था। यह रिपोर्ट मार्च में उसके सुल्तानपुरी स्थित घर पर हुई एक रेड के बाद आई थी। बाहर से देखने पर, वह जगह चार अलग-अलग साधारण घरों जैसी लगती थी। लेकिन अंदर से, बीच की दीवारों को तोड़कर आपस में जुड़ा हुआ एक ढांचा बना दिया गया था, जो एक विशाल घर जैसा दिखता था। हर दरवाजे और खिड़की को भारी स्टील की सलाखों से मजबूत बनाया गया था। यह लगभग जेल जैसी बनावट थी।
पहरेदारी के लिए खड़े किए थे लड़केकुसुम के ठिकाने में मशीनों से चलने वाले दरवाजे लगाए गए थे और 17 CCTV कैमरों से चौबीसों घंटे निगरानी की जाती थी। गली के आने-जाने के रास्तों पर लड़कों को पहरेदार के तौर पर तैनात किया गया था, ताकी पुलिस की जरा सी भी हलचल होने पर वे अंदर मौजूद लोगों को तुरंत आगाह कर सकें।
दरारों से खिसकाई जाती थी हेरोइनड्रग्स कभी भी सीधे तौर पर नहीं दिए जाते थे। इसके बजाय हेरोइन के पैकेट बालकनियों से नीचे इंतजार कर रहे पेडलर्स के लिए रस्सियों से बंधी टोकरियों में नीचे उतारे जाते थे। इसके अलावा इन पैकेट्स को ग्रिल वाली खिड़कियों में बनी पतली दरारों से खिसकाया जाता था।
इस तर भेजते थे ड्रग्स के पैकेटएक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि डिलीवरी का यह तरीका वैसा ही था, जैसा ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोग रस्सियों का इस्तेमाल करके टिफिन या किराने का सामान आपस में बदलते हैं। बस फर्क इतना था कि यहां हेरोइन के पैकेट या गोलियां नीचे भेजी जा रही थीं।
4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्तमार्च में आउटर डिस्ट्रिक्ट पुलिस की एक टीम ने जब छापा मारा तो कुसुम भाग निकलने में कामयाब रही। उसके बेटे को, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क के रोजमर्रा के कामकाज को संभालता था, गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि लगभग 4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें 8 ऐसी प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर ड्रग्स की तस्करी से कमाए गए पैसों से खरीदा गया था।
दोनों बेटियों पर लगाया गया MCOCAपैसों के लेन-देन की जांच करते हुए अधिकारी उसकी दो बेटियों-अनुराधा उर्फ चीकू और दीपा तक पहुंच गए। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 18 महीनों के दौरान कई बैंक खातों में दर्जनों छोटे-छोटे लेन-देन के जरिए लगभग 2 करोड़ रुपये जमा किए। इसमें से 70 लाख रुपये तो सिर्फ 6 महीनों में ही जमा किए गए थे। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसके बाद दोनों बहनों पर MCOCA लगा दिया गया।
हैरान करने वाली एक बात यह भी है कि कुसुम अपने घर से ही काम करती थी। उसका ठिकाना ऐसी जगह था, जहां आपस में 4 मकान जुड़े हुए थे, जिनमें मशीनी दरवाजे, हर जगह CCTV कैमरे और निगरानी के लिए लोग मौजूद थे। DCP (शाहदरा) राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि पुलिस की एक टीम ने 200 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया और 100 से ज्यादा मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच की।
फोन इस्तेमाल नहीं करती थी कुसुमडीसीपी ने बताया कि कुसुम की गिरफ्तारी के लिए 3 राज्यों के कई ठिकानों पर छापे मारे गए। एक खास जानकारी के आधार पर आनंद विहार के पास एक जाल बिछाया गया। कुसुम ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे काबू पकड़ लिया गया। पकड़े जाने से बचने के लिए कुसुम ने जान-बूझकर स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं किया और बार-बार अपने बेसिक मोबाइल फोन, SIM कार्ड और ठिकाने बदलती रही, जिससे वह पूरी तरह से 'ऑफ द ग्रिड' (नजर से ओझल) रही।
दीवारें तोड़कर 4 घरों को जोड़ दियाहमारे सहयोगी अखबार TOI ने पिछले साल सबसे पहले कुसुम के इस ऑपरेशन के पैमाने और उसकी बारीकियों के बारे में रिपोर्ट किया था। यह रिपोर्ट मार्च में उसके सुल्तानपुरी स्थित घर पर हुई एक रेड के बाद आई थी। बाहर से देखने पर, वह जगह चार अलग-अलग साधारण घरों जैसी लगती थी। लेकिन अंदर से, बीच की दीवारों को तोड़कर आपस में जुड़ा हुआ एक ढांचा बना दिया गया था, जो एक विशाल घर जैसा दिखता था। हर दरवाजे और खिड़की को भारी स्टील की सलाखों से मजबूत बनाया गया था। यह लगभग जेल जैसी बनावट थी।
पहरेदारी के लिए खड़े किए थे लड़केकुसुम के ठिकाने में मशीनों से चलने वाले दरवाजे लगाए गए थे और 17 CCTV कैमरों से चौबीसों घंटे निगरानी की जाती थी। गली के आने-जाने के रास्तों पर लड़कों को पहरेदार के तौर पर तैनात किया गया था, ताकी पुलिस की जरा सी भी हलचल होने पर वे अंदर मौजूद लोगों को तुरंत आगाह कर सकें।
दरारों से खिसकाई जाती थी हेरोइनड्रग्स कभी भी सीधे तौर पर नहीं दिए जाते थे। इसके बजाय हेरोइन के पैकेट बालकनियों से नीचे इंतजार कर रहे पेडलर्स के लिए रस्सियों से बंधी टोकरियों में नीचे उतारे जाते थे। इसके अलावा इन पैकेट्स को ग्रिल वाली खिड़कियों में बनी पतली दरारों से खिसकाया जाता था।
इस तर भेजते थे ड्रग्स के पैकेटएक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि डिलीवरी का यह तरीका वैसा ही था, जैसा ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोग रस्सियों का इस्तेमाल करके टिफिन या किराने का सामान आपस में बदलते हैं। बस फर्क इतना था कि यहां हेरोइन के पैकेट या गोलियां नीचे भेजी जा रही थीं।
4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्तमार्च में आउटर डिस्ट्रिक्ट पुलिस की एक टीम ने जब छापा मारा तो कुसुम भाग निकलने में कामयाब रही। उसके बेटे को, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क के रोजमर्रा के कामकाज को संभालता था, गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि लगभग 4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें 8 ऐसी प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर ड्रग्स की तस्करी से कमाए गए पैसों से खरीदा गया था।
दोनों बेटियों पर लगाया गया MCOCAपैसों के लेन-देन की जांच करते हुए अधिकारी उसकी दो बेटियों-अनुराधा उर्फ चीकू और दीपा तक पहुंच गए। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 18 महीनों के दौरान कई बैंक खातों में दर्जनों छोटे-छोटे लेन-देन के जरिए लगभग 2 करोड़ रुपये जमा किए। इसमें से 70 लाख रुपये तो सिर्फ 6 महीनों में ही जमा किए गए थे। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसके बाद दोनों बहनों पर MCOCA लगा दिया गया।
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