यमुना पर कड़ा पहरा: अब घरों में नहीं घुसेगा बाढ़ का पानी, सीएम ने दी प्रोटेक्शन वॉल बनाने की मंजूरी
नई दिल्ली: यमुना में आने वाली बाढ़ का पानी अब रिंग रोड, मजनू का टीला के रास्ते शहर में नहीं घुसेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसके लिए फ्लड प्रोटेक्शन वॉल बनाने की मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के अंतर्गत रिंग रोड के किनारे मजनू का टीला से लेकर ओल्ड रेलवे ब्रिज (ORB) तक लगभग 4.72 किलोमीटर लंबी एक मजबूत सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी।
इस फैसले पर सीएम ने कहा कि यह दीवार न केवल यमुना के पानी को रिहायशी इलाकों में घुसने से रोकेगी, बल्कि सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। वर्ष 1978 की भीषण बाढ़ से लेकर 2023 और 2025 की बाढ़ का पानी रिंग रोड पर रफ्तार रोकता रहा है।

मॉनसून में ट्रैफिक रहेगा सुचारुअधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का तकनीकी आधार अगस्त 2024 में तैयार की गई जॉइंट फ्लड कमिटी की रिपोर्ट है, जिसमें पुणे स्थित केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र (CWPRS) के एक्सपर्ट और सदस्यों द्वारा हाइड्रोलिक मॉडल अध्ययन और विस्तृत डेटा विश्लेषण किया गया था। उसमें रिंग रोड के इस हिस्से पर मजबूत फ्लड प्रोटेक्शन वॉल के निर्माण की सिफारिश की थी। इस दीवार के बनने से मॉनसून के दौरान रिंग रोड पर ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगा। नदी के किनारे पर मिट्टी के कटाव और अवैध अतिक्रमण पर भी रोक लगेगी।
4.7 किमी लंबी दीवार से बाढ़, कटाव और अतिक्रमण पर रोकअधिकारियों के मुताबिक इस दीवार की कुल लंबाई 4.7 किलोमीटर लंबी होगी। इसमें 850 मीटर लंबी आरसीसी रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी, जबकि 3.8 किलोमीटर मीटर हिस्से में ईंट और पत्थर की बाउंड्री का निर्माण किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से दीवार की ऊंचाई जमीन के स्तर से 211.500 मीटर से 212.500 मीटर के बीच रखी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से तीन बड़े फायदे होंगे। पहला, यमुना की बाढ़ के दौरान आसपास के निचले इलाकों और शहर की आधारभूत संरचना की रक्षा होगी। दूसरा नदी के किनारे होने वाले मिट्टी का कटाव रुकेगा और यमुना रिज क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।
इस फैसले पर सीएम ने कहा कि यह दीवार न केवल यमुना के पानी को रिहायशी इलाकों में घुसने से रोकेगी, बल्कि सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। वर्ष 1978 की भीषण बाढ़ से लेकर 2023 और 2025 की बाढ़ का पानी रिंग रोड पर रफ्तार रोकता रहा है।
मॉनसून में ट्रैफिक रहेगा सुचारुअधिकारियों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का तकनीकी आधार अगस्त 2024 में तैयार की गई जॉइंट फ्लड कमिटी की रिपोर्ट है, जिसमें पुणे स्थित केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र (CWPRS) के एक्सपर्ट और सदस्यों द्वारा हाइड्रोलिक मॉडल अध्ययन और विस्तृत डेटा विश्लेषण किया गया था। उसमें रिंग रोड के इस हिस्से पर मजबूत फ्लड प्रोटेक्शन वॉल के निर्माण की सिफारिश की थी। इस दीवार के बनने से मॉनसून के दौरान रिंग रोड पर ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगा। नदी के किनारे पर मिट्टी के कटाव और अवैध अतिक्रमण पर भी रोक लगेगी।
- 4.72 km लंबी दीवार मजनू का टीला से ORB तक
- 211.50 से 212.50 मीटर के बीच होगी ऊंचाई
- 208.66 मीटर रिकॉर्ड जलस्तर रहा है यमुना का
- 2027 में मॉनसून तक काम पूरा करने की योजना
4.7 किमी लंबी दीवार से बाढ़, कटाव और अतिक्रमण पर रोकअधिकारियों के मुताबिक इस दीवार की कुल लंबाई 4.7 किलोमीटर लंबी होगी। इसमें 850 मीटर लंबी आरसीसी रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी, जबकि 3.8 किलोमीटर मीटर हिस्से में ईंट और पत्थर की बाउंड्री का निर्माण किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से दीवार की ऊंचाई जमीन के स्तर से 211.500 मीटर से 212.500 मीटर के बीच रखी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से तीन बड़े फायदे होंगे। पहला, यमुना की बाढ़ के दौरान आसपास के निचले इलाकों और शहर की आधारभूत संरचना की रक्षा होगी। दूसरा नदी के किनारे होने वाले मिट्टी का कटाव रुकेगा और यमुना रिज क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।
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