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राजकोट में 7 साल की बच्ची के साथ रेप, खेत में लहूलुहान मिली, अस्पताल में भर्ती

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गुजरात के राजकोट जिले में हुई एक घटना ने देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। यह सिर्फ एक खबर नहीं है, यह हमारे समाज की आत्मा पर लगा एक ऐसा दाग है, जिसे धोने के लिए हमें सामूहिक रूप से आंसू बहाने होंगे और न्याय के लिए आवाज़ उठानी होगी। एक सात साल की मासूम बच्ची के साथ हुई क्रूरता की हदें पार करने वाली इस वारदात ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हमारे बच्चों का बचपन कितना असुरक्षित है।


राजकोट के ग्रामीण क्षेत्र में जहाँ यह घटना हुई, बच्ची का परिवार खेतिहर मज़दूर के तौर पर काम करता है। रोज़ की तरह माता-पिता अपने काम में व्यस्त थे और मासूम बच्ची आसपास खेल रही थी। यही वह पल था जब शैतान ने अपना जाल बिछाया। आरोपी, जिसकी पहचान बाद में 35 वर्षीय रामसिंह के रूप में हुई और जो उसी क्षेत्र में मज़दूरी करता था, उसने बच्ची को एकांत में ले जाकर उसके साथ अमानवीयता की।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब आरोपी अपने घिनौने इरादों में कामयाब नहीं हो पाया, तो उसने क्रूरता की पराकाष्ठा पार कर दी और बच्ची को गंभीर रूप से घायल कर दिया। कुछ देर बाद जब माता-पिता ने बच्ची की तलाश शुरू की, तो वह उन्हें लहूलुहान और दर्द से बेहाल मिली। बच्ची की हालत देखकर परिवार के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत उसे राजकोट के सरकारी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल इलाज शुरू किया।


अस्पताल से मिली सूचना पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। राजकोट ग्रामीण पुलिस ने इस वीभत्स अपराध को चुनौती के रूप में लिया। मामले की गंभीरता के चलते तुरंत 10 विशेष टीमें बनाई गईं। पुलिस ने आस पास के गाँवो के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, सैकड़ों संदिग्धों से पूछताछ की और तकनीकी साक्ष्यों को इकट्ठा किया।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच के दौरान 140 से अधिक लोगों की सूची तैयार की गई, और गहन पूछताछ के बाद 10 संदिग्धों पर ध्यान केंद्रित किया गया। आखिरकार, बाल परामर्शदाता और महिला पुलिस अधिकारियों की मदद से पीड़ित बच्ची ने आरोपी की पहचान की। हिरासत में लिए जाने के बाद आरोपी रामसिंह ने अपना अपराध कबूल कर लिया। आरोपी मूल रूप से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर का रहने वाला है और खुद तीन बच्चों का पिता है। यह तथ्य इस अपराध की गंभीरता और मानसिकता पर और भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।


यह ज़रूरी है कि हम अपने बच्चों को केवल प्यार न दें, बल्कि उन्हें सुरक्षा का पाठ भी पढ़ाएँ। उन्हें 'सुरक्षित स्पर्श' और 'असुरक्षित स्पर्श' के बीच का अंतर समझाएँ। हमें अपने आस-पड़ोस में सतर्कता बढ़ानी होगी। काम करने वाले मज़दूर हों या घर का कोई जानकार, हर व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार पर समाज की सामूहिक नज़र होनी चाहिए। बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों में 'पहचान' अक्सर सबसे बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि अपराधी अक्सर भरोसेमंद लोग होते हैं।


न्याय की मांग और उम्मीद की किरण

आज वह मासूम बच्ची अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। उम्मीद है कि वह जल्द ही ठीक होकर अपने परिवार के पास लौटेगी। लेकिन उसके मन पर लगे घाव को भरने में सालों लग जाएँगे।

पूरे देश की निगाहें अब राजकोट कोर्ट पर टिकी हैं। POCSO अधिनियम के तहत दर्ज किए गए इस मामले में तेज़ी से सुनवाई होनी चाहिए। इस तरह के अपराधों में, न्याय में देरी न्याय से वंचित करने के समान होती है। समाज की सामूहिक मांग है कि अपराधी को सख्त से सख्त सज़ा मिले, ताकि वह दूसरे दरिंदों के लिए एक कड़ा संदेश बन सके। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बच्चा भयमुक्त होकर खुले आसमान के नीचे खेल सके। यह हमारी सबसे बड़ी राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी है।






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