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सावधान! कहीं आप भी तो नहीं हो रहे 'डिजिटल अरेस्ट' के शिकार? ऐसे रहें सुरक्षित

डिजिटल युग में जहां सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं ठगी के नए और डरावने तरीके भी सामने आए हैं। इन्हीं में से एक है "डिजिटल अरेस्ट"। यह स्कैम आजकल इतनी तेजी से फैल रहा है कि अच्छे-खासे पढ़े-लिखे लोग भी इसके जाल में फंस रहे हैं। अक्सर इसकी शुरुआत एक शांत और गंभीर फोन कॉल से होती है, जहाँ दूसरी तरफ बैठा व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई एजेंट या साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेटर बताता है।
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वे बड़े आत्मविश्वास से दावा करते हैं कि आपका आधार कार्ड, बैंक खाता या कोई पार्सल किसी गैरकानूनी गतिविधि या मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है। इसके बाद वे एक ऐसा शब्द इस्तेमाल करते हैं जो किसी को भी डरा दे: आप "डिजिटल अरेस्ट" के तहत हैं।

क्या वास्तव में डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ होता है?



सबसे पहले यह जान लीजिए कि भारतीय कानून में "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई प्रावधान या शब्द ही नहीं है। यह पूरी तरह से जालसाजों का बनाया हुआ एक जाल है। वे वीडियो कॉल पर नकली पुलिस स्टेशन का सेटअप, वर्दी और जाली दस्तावेज दिखाकर आपको यह विश्वास दिलाते हैं कि आप एक कानूनी कार्रवाई का हिस्सा हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य आपको इतना डराना होता है कि आप सवाल पूछना बंद कर दें और बस उनके निर्देशों का पालन करें।

लोग इस जाल में कैसे फंस जाते हैं?



ज्यादातर लोग लापरवाही की वजह से नहीं, बल्कि डर और हड़बड़ी के कारण इसका शिकार बनते हैं। ठग आपके किसी पुराने सिम कार्ड, बैंक लोन या पार्सल जैसी किसी चीज का हवाला देते हैं जो सुनने में सच लगती है। जैसे ही व्यक्ति के मन में डर बैठता है, उसकी सोचने-समझने की शक्ति कम हो जाती है। वे भूल जाते हैं कि कोई भी असली पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करता और न ही व्हाट्सएप के जरिए केस रफा-दफा करता है।

इन बड़े संकेतों को कभी न करें नजरअंदाज

  • अत्यधिक जल्दबाजी: ठग हमेशा चाहेंगे कि मामला तुरंत सुलझ जाए। वे आपको सोचने या किसी से सलाह लेने का समय नहीं देंगे।
  • अकेलापन और गोपनीयता: वे आपको किसी से भी बात करने या कॉल काटने से मना करेंगे। यह इसलिए किया जाता है क्योंकि जैसे ही कोई तीसरा व्यक्ति इस बात को सुनेगा, यह स्कैम उजागर हो जाएगा।
  • पैसे की मांग: यह सबसे बड़ा संकेत है। कोई भी सरकारी एजेंसी वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने, ओटीपी साझा करने या किसी "सेफ अकाउंट" में पैसे डालने के लिए नहीं कहेगी।

सुरक्षा के सबसे आसान तरीके


अगर आपको ऐसा कोई कॉल आता है, तो सबसे पहले शांत रहें। याद रखें कि असली अधिकारी आपको कॉल काटने पर धमकी नहीं देंगे। आप तुरंत फोन काट दें और खुद नजदीकी पुलिस स्टेशन या अपने बैंक जाकर जानकारी लें। कानूनी प्रक्रियाएं हमेशा दस्तावेजों और नोटिस के जरिए होती हैं, वीडियो कॉल पर "उल्टी गिनती" शुरू करके नहीं।


यदि आप अनजाने में पैसे ट्रांसफर कर चुके हैं या अपनी जानकारी साझा कर चुके हैं, तो बिना देर किए साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। आपकी जागरूकता ही आपका सबसे बड़ा बचाव है।